AI से उड़ेगी भारत की अर्थव्यवस्था: IMF चीफ ने क्यों कहा 'गेमचेंजर'?
क्यों दावोस में IMF चीफ ने भारत की AI क्षमता को 'गेमचेंजर' बताया? जानें, कैसे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से भारत बन रहा है दुनिया की नई आर्थिक महाशक्ति?

नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क । दावोस के बर्फीले पहाड़ों के बीच जब दुनिया के दिग्गज जुटे, तो चर्चा का केंद्र भारत और उसकी डिजिटल शक्ति रही। IMF चीफ क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने स्पष्ट किया कि भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और AI कौशल न केवल देश, बल्कि पूरी दुनिया की जीडीपी में 0.8 परसेंट की अतिरिक्त वृद्धि करने की ताकत रखता है।
डिजिटल क्रांति से AI तक भारत का नया सफर: पिछले एक दशक में भारत ने जिस तरह से अपनी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर DPI को खड़ा किया है, उसने विकसित देशों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। यूपीआई UPI से लेकर आधार और डिजिटल पहचान तक, भारत ने तकनीक को जमीन पर उतारा है।
अब बारी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI की है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष IMF की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच WEF में भारत की क्षमता पर मुहर लगा दी है। उन्होंने साफ कहा कि भारत अब केवल आईटी सर्विस का हब नहीं है, बल्कि वह AI के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक छोटी सी गलतफहमी ने कैसे सुर्खियां बटोरीं?
दरअसल, कुछ चर्चाओं में यह संकेत गया था कि IMF भारत की AI तैयारी को लेकर संशय में है। जॉर्जीवा ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वह महज एक मॉडरेटर की अटकल थी। सच तो यह है कि IMF भारत को AI की रेस में सबसे आगे खड़ा देख रहा है।
क्यों भारत है 'AI सुपरपावर' का दावेदार?
IMF ने भारत की तारीफ के पीछे तीन मुख्य स्तंभ बताए हैं।
आईटी-स्किल्ड वर्कफोर्स: भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा और हुनरमंद इंजीनियर पूल है।
तेजी से सुधार: सरकार द्वारा डिजिटल बदलावों के लिए किए गए नीतिगत फैसले।
प्रतिस्पर्धी जज्बा: वैश्विक स्तर पर पिछड़ने के बजाय, भारत खुद अपनी राह बना रहा है।
"भारत जिस तरह से AI को अपना रहा है, वह प्रभावशाली है। यह देश को वैश्विक स्तर पर न केवल प्रतिस्पर्धी बनाए रखेगा, बल्कि दूसरों के लिए एक बेंचमार्क भी सेट करेगा।" - क्रिस्टालिना जॉर्जीवा, IMF चीफ
दुनिया की GDP में 0.8% का इजाफा, भारत का असर
आमतौर पर किसी एक देश की प्रगति का वैश्विक डेटा पर इतना बड़ा असर नहीं दिखता, लेकिन AI के मामले में कहानी अलग है। IMF के अनुमान के मुताबिक, अगर भारत अपनी AI क्षमता का पूरा इस्तेमाल करता है, तो यह वैश्विक आर्थिक वृद्धि में 0.8 प्रतिशत तक का योगदान दे सकता है। यह कोई छोटा आंकड़ा नहीं है। यह दुनिया भर में करोड़ों नौकरियों, नए स्टार्टअप्स और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं के द्वार खोल सकता है। भारत की अर्थव्यवस्था पहले से ही दुनिया में सबसे तेज गति से बढ़ रही है, और AI इसमें 'रॉकेट फ्यूल' का काम करेगा।
क्या भारत के पास है सही रणनीति?
भारत केवल तकनीक का उपयोग नहीं कर रहा, बल्कि वह 'AI for All' के विजन पर काम कर रहा है। कृषि से लेकर स्वास्थ्य सेवा तक, भारत AI को आम आदमी की समस्याओं को हल करने का जरिया बना रहा है। IMF की नजर में भारत की खास बातें...
किफायती समाधान: भारत कम लागत में बड़ी तकनीकी समस्याओं को हल करने में माहिर है।
डेटा का भंडार: AI को सीखने के लिए डेटा चाहिए, और भारत के पास विशाल और विविध डेटा उपलब्ध है।
सरकारी प्रोत्साहन: इंडिया AI मिशन जैसे प्रोजेक्ट्स स्टार्टअप्स को नई ऊर्जा दे रहे हैं।
अगले महीने भारत में जुटेगी दुनिया
भारत की बढ़ती धमक का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अगले महीने भारत में एक भव्य AI समिट होने जा रही है। क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने संकेत दिया है कि वह खुद इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आ सकती हैं। यह वैश्विक मंच पर भारत की तकनीकी कूटनीति की एक बड़ी जीत मानी जा रही है।
क्या AI से नौकरियां कम होंगी? इस सवाल पर जॉर्जीवा का नजरिया सकारात्मक है। उनका मानना है कि उत्पादकता बढ़ने से नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे, बशर्ते वर्कफोर्स को समय रहते 'अपस्किल' हुनरमंद किया जाए। और इस मामले में भारत का ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा है।
बदल रहा है वैश्विक नक्शा: दावोस से आया यह संदेश साफ है भारत अब केवल एक बाजार नहीं है, बल्कि वह भविष्य की तकनीक का निर्माता है। IMF की यह सराहना इस बात का प्रमाण है कि आने वाला दशक भारत का है, जहां 'स्पीड' और 'स्केल' के साथ अब 'स्मार्ट तकनीक' का भी मेल होगा।


