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वाशिंगटन यात्रा से पहले अमेरिकी राजदूत गोर से क्यों मिले विदेश मंत्री एस जयशंकर?

कहा जा रहा है कि जयशंकर और गोर के बीच इस वार्ता में व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों और रक्षा जैसे क्षेत्रों सहित द्विपक्षीय संबंधों के प्रमुख आयामों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

वाशिंगटन यात्रा से पहले अमेरिकी राजदूत गोर से क्यों मिले विदेश मंत्री एस जयशंकर?
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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर उन प्रशासकों में शामिल है, जिनकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ सबसे ज्यादा करीबी है। टैरिफ वार और ट्रेड डील पर अटकी गाड़ी के बीच जिस तरह गोर की नियुक्ति की गई, उसके राजनयिक स्तर पर कई मायने निकाले जा रहे हैं। अब विदेश मंत्री एस जयशंकर अगले सप्ताह वाशिंगटन की यात्रा पर रवाना होने वाले हैं। इससे पहले उन्होंने भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के साथ लंबी बातचीत की। कहा जा रहा है कि जयशंकर और गोर के बीच इस वार्ता में व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों और रक्षा जैसे क्षेत्रों सहित द्विपक्षीय संबंधों के प्रमुख आयामों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

यह मुलाकात काफी महत्वपूर्ण

विदेश मंत्री जयशंकर महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति शृंखलाओं पर आयोजित होने वाली पहली मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लेने के लिए अमेरिका की यात्रा पर अगले सप्ताह जाएंगे, लेकिन राजदूत गोर से उनकी यह मुलाकात काफी महत्वपूर्ण इस मायने में मानी जा रही है, कि दोनों दोस्तों के संबंधों में आई खटास कुछ कम होगी। ईयू से मेगा डील के बाद वैसे भी विदेश मंत्री जयशंकर की यह पहली अमेरिकी यात्रा है। इस डील पर अमेरिका काफी करीब से नजर रखे हुए है। इस यात्रा के दौरान ऐसी उम्मीद है कि जयशंकर अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे।

अमेरिकी विदश मंत्री से मुलाकात संभव

यह बैठक द्विपक्षीय बैठक इन संकेतों के बीच होगी कि दोनों पक्ष प्रस्तावित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए नये सिरे से प्रयास कर रहे हैं। जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच पर लिखा, "आज नयी दिल्ली में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से मिलकर खुशी हुई। बातचीत में हमारी साझेदारी के कई पहलुओं पर चर्चा हुई।" उन्होंने कहा, "मैंने उनका स्वागत किया और विश्वास जताया कि वह भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने में योगदान देंगे।" अमेरिकी राजदूत ने कहा कि उनकी और जयशंकर की "रक्षा, व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों और हमारे साझा हितों की दिशा में काम करने जैसे सभी विषयों पर गहन चर्चा हुई।"

क्या दूर होंगी ट्रेड डील की बाधाएं

गोर ने इस महीने की शुरुआत में पदभार ग्रहण किया था। भारत और अमेरिका ने प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए पिछले वर्ष कई दौर की बातचीत की थी। हालांकि, पिछले वर्ष अगस्त में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत तक भारी शुल्क लगाने के बाद वार्ता में बाधा आ गई, जिसमें रूसी तेल खरीद पर 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क भी शामिल था। शुल्क के अलावा, कई अन्य मुद्दों पर भी संबंधों में तनाव आया, जिनमें पिछले साल मई में ट्रंप द्वारा भारत-पाकिस्तान संघर्ष को समाप्त करने का किया गया दावा और वाशिंगटन की नयी आव्रजन नीति शामिल है।


Mukesh Pandit

Mukesh Pandit

पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 1989 में अमर उजाला से रिपोर्टिंग से करने वाले मुकेश पंडित का जनसरोकार और वास्तविकत पत्रकारिता का सफर सतत जारी है। उन्होंने अमर उजाला, विश्व मानव, हरिभूमि, एनबीटी एवं दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक अपनी सेवाएं दीं हैं। समाचार लेखन, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में निपुणता के साथ-साथ उन्होंने समय के साथ डिजिटल और सोशल मीडिया को भी बख़ूबी अपनाया है। करीब 35 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ मुकेश पंडित आज भी पत्रकारिता में सक्रिय हैं और जनहित, राष्ट्रहित और समाज की सच्ची आवाज़ बनने के मिशन पर अग्रसर हैं।

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