Top
Begin typing your search above and press return to search.

कांग्रेस की आंखों की किरकिरी रहे शशि थरूर होंगे केरल में पार्टी के स्टार कैंपेनर!

प्रमुख राज्य नेता ने तिरुवनंतपुरम के सांसद को आने वाले चुनावों में पार्टी के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के लिए स्टार कैंपेनर बनाया गया है।

कांग्रेस की आंखों की किरकिरी रहे शशि थरूर होंगे केरल में पार्टी के स्टार कैंपेनर!
X

नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क। कई मौकों पर प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ और ऑपरेशन सिंदूर के बाद पार्टी के इच्छा के विरुद्ध जाकर विदेशी प्रतिनिधिमंडल में शामिल होकर कांग्रेस की आंखों की किरकरी बने शशि थरूर की अचानक पार्टी में अहमियत बढ़ गई है। कांग्रेस हाईकमान राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात के बाद केरल में कांग्रेस नेताओं के साथ शशि थरूर के तनावपूर्ण रिश्तों में नरमी दिखी है। शुक्रवार को एक प्रमुख राज्य नेता ने तिरुवनंतपुरम के सांसद को आने वाले चुनावों में पार्टी के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के लिए स्टार कैंपेनर बनाया गया है।

मुलाकात के बाद बदलने लगे थरूर के स्वर

बता दें कि थरूर ने गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मिलकर अपनी शिकायतों का समाधान मांगा था, जिसके बाद उन्होंने कहा कि 'सब ठीक है' और 'हम सब एक ही पेज पर हैं, जो महत्वपूर्ण केरल विधानसभा चुनावों से पहले अपनी पार्टी के साथ सुलह का संकेत है। केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीसन ने यहां पत्रकारों से एक सवाल के जवाब में कहा, "वह (थरूर) चुनावों के लिए केरल में UDF द्वारा शुरू किए गए अभियान में सबसे आगे रहेंगे।

थरूर का लोगों से गहरा जुड़ाव है: सतीसन

विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीसन ने थरूर को एक वैश्विक नागरिक और एक जाने-माने लेखक बताते हुए, कहा कि उनका लोगों से गहरा जुड़ाव है। इसलिए, वह चुनाव अभियान में सबसे आगे रहेंगे। वह केरल में कांग्रेस पार्टी का भी हिस्सा हैं और चुनावों के कारण राज्य में अधिक सक्रिय रहेंगे। अगले दो महीनों तक, वह यहीं रहेंगे। उन्होंने आगे कहा कि पार्टी उन्हें केरल की सभी 140 विधानसभा सीटों पर ले जाने की योजना बना रही है।

अपनी उपेक्षा से नाराज थे थरूर

उल्लेखनीय है कि पिछले हफ्ते, थरूर ने कथित तौर पर दरकिनार किए जाने से निराशा के कारण केरल चुनाव रणनीति की एक महत्वपूर्ण बैठक छोड़ दी थी, और कहा जाता है कि इसका मुख्य कारण राहुल गांधी द्वारा कोच्चि में एक कार्यक्रम में उन्हें नज़रअंदाज़ करना था। सूत्रों ने बताया कि गांधी ने मंच पर अन्य वरिष्ठ नेताओं का नाम लिया, लेकिन चार बार के सांसद और सीडब्ल्यूसी सदस्य थरूर का ज़िक्र नहीं किया, जिससे नई बेचैनी पैदा हुई। पिछले साल भारत-पाकिस्तान तनाव पर अपनी टिप्पणियों को लेकर भी उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा था, हालांकि थरूर ने कहा है कि उनके विचार पार्टी के विचारों से मेल खाते हैं और वे द्विदलीय विदेश नीति का समर्थन करते हैं।


Mukesh Pandit

Mukesh Pandit

पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 1989 में अमर उजाला से रिपोर्टिंग से करने वाले मुकेश पंडित का जनसरोकार और वास्तविकत पत्रकारिता का सफर सतत जारी है। उन्होंने अमर उजाला, विश्व मानव, हरिभूमि, एनबीटी एवं दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक अपनी सेवाएं दीं हैं। समाचार लेखन, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में निपुणता के साथ-साथ उन्होंने समय के साथ डिजिटल और सोशल मीडिया को भी बख़ूबी अपनाया है। करीब 35 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ मुकेश पंडित आज भी पत्रकारिता में सक्रिय हैं और जनहित, राष्ट्रहित और समाज की सच्ची आवाज़ बनने के मिशन पर अग्रसर हैं।

Related Stories
Next Story
All Rights Reserved. Copyright @2019
Powered By Hocalwire