बंगाल में चुनाव आयोग ने एसआईआर का कार्य देख रहे अधिकारियों के ट्रांसफर पर लगाई रोक
राज्य सरकार को भविष्य में ईसीआई में डेपुटेशन पर तैनात आईएएस अधिकारियों के डिपार्टमेंटल ट्रांसफर के ऐसे आदेश जारी करने से पहले कमीशन की पहले से मंजूरी लेनी चाहिए।

कोलकाता,आईएएनएस। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार को बताया कि उसने राज्य सरकार के आदेश पर आईएएस अधिकारियों के डिपार्टमेंटल ट्रांसफर को रोकने का फैसला किया है। ये अधिकारी पश्चिम बंगाल कैडर के हैं और फिलहाल राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए कमीशन में अस्थायी डेपुटेशन पर हैं।पश्चिम बंगाल की चीफ सेक्रेटरी नंदिनी चक्रवर्ती को भेजे गए विज्ञप्ति में ईसीआई के सेक्रेटरी सुजीत कुमार मिश्रा ने यह भी याद दिलाया कि राज्य सरकार को भविष्य में ईसीआई में डेपुटेशन पर तैनात आईएएस अधिकारियों के डिपार्टमेंटल ट्रांसफर के ऐसे आदेश जारी करने से पहले कमीशन की पहले से मंजूरी लेनी चाहिए।
किसी भी अधिकारी का ट्रांसफर ने किया जाए
ईसीआई सेक्रेटरी ने राज्य के चीफ सेक्रेटरी को याद दिलाया कि एसआईआर अवधि के दौरान चीफ सेक्रेटरी को यह सुनिश्चित करना होगा कि एसआईआर प्रक्रिया में शामिल किसी भी अधिकारी का ट्रांसफर कमीशन की पहले से मंजूरी के बिना न किया जाए। कमीशन ने कहा कि ईसीआई ने एसआईआर के मकसद से पांच डिविजनल कमिश्नरों के साथ 12 इलेक्टोरल रोल ऑब्जर्वर नियुक्त किए थे, और ये अधिकारी एसआईआर के लिए ईसीआई में डेपुटेशन पर हैं।
तीन अफसरों के ट्रांसफर से आयोग नाखुश
इसके बाद, ईसीआई सेक्रेटरी ने यह भी दावा किया कि हाल ही में कमीशन के संज्ञान में आया है कि राज्य सरकार ने तीन आईएएस अधिकारी अश्विनी कुमार यादव, रणधीर कुमार और स्मिता पांडे के डिपार्टमेंटल ट्रांसफर/पोस्टिंग का आदेश दिया है। ईसीआई के विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि इन अधिकारियों के ट्रांसफर का आदेश चुनाव आयोग की पहले से मंजूरी के बिना दिया गया है, इसलिए यह इस मामले में कमीशन के निर्देशों का उल्लंघन है।
ट्रांसफर के आदेश तुरंत रद्द करें
उन्होंने आगे कहा कि मुझे यह कहने का निर्देश दिया गया है कि ट्रांसफर के आदेश तुरंत रद्द किए जाएं। इसके अलावा, आपसे अनुरोध है कि भविष्य में ऐसे आदेश जारी करने से पहले कमीशन की पहले से मंजूरी लें। इस संबंध में अनुपालन 28 जनवरी को दोपहर 03:00 बजे तक आयोग को भेजा जाए।जब यह रिपोर्ट फाइल की गई, तब तक इस मामले पर न तो राज्य सरकार और न ही सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई प्रतिक्रिया आई थी।


