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मौत के साये से मिली सुरक्षा: वो 13 हादसे जिन्होंने आसमान के नियम बदल दिए

क्या अजित पवार के निधन ने विमान सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं? जानिए उन 13 ऐतिहासिक विमान हादसों के बारे में जिन्होंने दुनिया को हैरान कर दिया?

मौत के साये से मिली सुरक्षा: वो 13 हादसे जिन्होंने आसमान के नियम बदल दिए
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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क । अजित पवार के निधन की दुखद खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया है। विमान हादसे सिर्फ जिंदगियां नहीं छीनते, बल्कि एविएशन इतिहास को नए सुरक्षा मानकों से सींचते हैं। आइए, जानें उन 13 दर्दनाक विमान हादसों की कहानी, जिन्होंने हवाई सफर को हमेशा के लिए सुरक्षित बना दिया।

विमान दुर्घटनाएं सभ्य समाज के लिए सबसे डरावने बुरे सपनों की तरह होती हैं। जब एक विशालकाय लोहे का परिंदा आसमान से गिरता है, तो बचने की उम्मीद सच में बहुत कम होती है। महाराष्ट्र के बारामती से आई हालिया खबर ने इसी डर को फिर से जिंदा कर दिया है, जहां एनसीपी नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत 5 लोगों का एक विमान हादसे में दुखद निधन हो गया।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज आप बेफिक्र होकर बादलों के ऊपर सफर करते हैं, इसकी कीमत हजारों लोगों ने अपनी जान देकर चुकाई है? विमानन (Aviation) के इतिहास में हर बड़ी त्रासदी ने एक नया कानून जन्म दिया। चलिए, उन 13 ऐतिहासिक हादसों का विश्लेषण करते हैं जिन्होंने उड़ानों की दुनिया को बदलकर रख दिया।

1. ग्रैंड कैन्यन की टक्कर: जब आसमान को मिला 'ट्रैफिक पुलिस' (1956)

30 जून, 1956 को ग्रैंड कैन्यन के ऊपर दो विमान आपस में टकरा गए। उस समय जमीन से निगरानी की तकनीक इतनी पुरानी थी कि पायलटों को पता ही नहीं चला कि उनके पास कोई दूसरा विमान है।

बदलाव: इस हादसे के बाद अमेरिका में FAA (Federal Aviation Administration) का गठन हुआ।

नतीजा: आज हर विमान में TCAS (Traffic Collision Avoidance System) होता है, जो पायलट को बता देता है कि आसपास कोई दूसरा विमान है या नहीं।

2. यूनाइटेड एयरलाइंस 173: ईगो नहीं, टीम वर्क जरूरी (1978)

इस विमान का ईंधन इसलिए खत्म हो गया क्योंकि मुख्य पायलट एक छोटी तकनीकी खराबी को ठीक करने में इतना मग्न हो गया कि उसने क्रू मेंबर्स की चेतावनी अनसुनी कर दी।

बदलाव: इसके बाद CRM (Cockpit Resource Management) सिस्टम आया।

नतीजा: अब कॉकपिट में पायलट 'बॉस' नहीं, बल्कि एक टीम लीडर होता है जिसे हर सदस्य की बात सुननी पड़ती है।

3. एयर कनाडा 797: टॉयलेट में लगी आग ने लाखों जानें बचाईं (1983)

हवा में उड़ते प्लेन के टॉयलेट में आग लग गई और धुएं के कारण लोग बाहर निकलने का रास्ता नहीं ढूंढ पाए।

बदलाव: इस हादसे के बाद टॉयलेट में स्मोक डिटेक्टर और ऑटोमैटिक आग बुझाने वाले उपकरण अनिवार्य हुए।

नतीजा: प्लेन के फर्श पर चमकने वाली पट्टियां लगाई गईं ताकि धुएं में भी एग्जिट गेट दिख सके।

4. डेल्टा एयरलाइंस 191: अदृश्य हवा के झोंकों का अंत (1985)

लैंडिंग के दौरान अचानक हवा के नीचे की ओर दबाव (Microburst) ने प्लेन को पटक दिया।

बदलाव: इसके बाद विमानों में फॉरवर्ड-लुकिंग रडार लगाए गए।

नतीजा: अब पायलट को खराब मौसम और खतरनाक हवा के झोंकों की जानकारी मिनटों पहले मिल जाती है।

5. अलोहा एयरलाइंस 243: 'बूढ़े' विमानों पर कसी नकेल (1988)

उड़ते विमान की छत अचानक उड़ गई क्योंकि मेटल कमजोर हो चुका था। यह एक चमत्कार था कि पायलट ने विमान को उतार लिया।

बदलाव: 'वृद्ध विमान कार्यक्रम' (Aging Aircraft Program) की शुरुआत हुई।

नतीजा: अब पुराने विमानों की जांच इतनी सख्त होती है कि धातु में आई एक बारीक दरार भी पकड़ ली जाती है।

6. यूनाइटेड एयरलाइंस 232: बैकअप सिस्टम की ताकत (1989)

इंजन का पंखा फटने से विमान का हाइड्रोलिक सिस्टम (जो प्लेन को मोड़ने में मदद करता है) फेल हो गया।

बदलाव: विमानों में ट्रिपल बैकअप सिस्टम जोड़े गए।

नतीजा: आज अगर प्लेन का एक मुख्य हिस्सा फेल भी हो जाए, तो वैकल्पिक सिस्टम उसे सुरक्षित लैंड करा सकता है।

7. यूएस एयरवेज 427: रडर की मिस्ट्री को हल किया गया (1994)

पिट्सबर्ग में लैंडिंग के समय अचानक रडर (दिशा मोड़ने वाला हिस्सा) जाम हो गया।

बदलाव: बोइंग ने हजारों विमानों के रडर डिजाइन बदले।

नतीजा: इस हादसे ने इंजीनियरिंग की ऐसी खामी को पकड़ा जिसे पहले कभी नोटिस नहीं किया गया था।

8. वैल्यूजेट 592: कार्गो होल्ड की सुरक्षा (1996)

सामान रखने वाली जगह (Cargo Hold) में रखे केमिकल्स ने आग लगा दी।

बदलाव: कार्गो एरिया में भी स्मोक डिटेक्टर और फायर सप्रेशन सिस्टम अनिवार्य हुए।

नतीजा: खतरनाक सामान (Hazardous Goods) ले जाने के नियमों को बेहद सख्त कर दिया गया।

9. टीडब्ल्यूए फ्लाइट 800: फ्यूल टैंक को बनाया सुरक्षित (1996)

ईंधन टैंक में उठी एक छोटी सी चिंगारी ने पूरे विमान को हवा में उड़ा दिया।

बदलाव: विमान के फ्यूल टैंकों में नाइट्रोजन गैस डालने की प्रणाली आई।

नतीजा: नाइट्रोजन ऑक्सीजन को कम करती है, जिससे चिंगारी लगने पर भी धमाका नहीं होता।

10. स्विसएयर 111: वायरिंग बनी अग्निरोधी (1998)

एंटरटेनमेंट सिस्टम की वायरिंग में शॉर्ट सर्किट हुआ और आग फैल गई।

बदलाव: विमानों में इस्तेमाल होने वाले वायरिंग कवर को बदलकर उन्हें 100% फायरप्रूफ बना दिया गया।

नतीजा: अब विमान के अंदर बिजली का फॉल्ट आग का कारण नहीं बन सकता।

11. एयर फ्रांस 447: मशीनों पर भरोसा नहीं, इंसानी हुनर महत्वपूर्ण (2009)

गति मापने वाला यंत्र जाम होने पर पायलट घबरा गए और प्लेन क्रैश हो गया।

बदलाव: पायलट ट्रेनिंग में बड़ा बदलाव आया।

नतीजा: अब पायलटों को मशीनों से ज्यादा 'मैन्युअल कंट्रोल' की सख्त ट्रेनिंग दी जाती है।

12. मलेशिया एयरलाइंस MH370: गायब होने का डर खत्म (2014)

यह प्लेन रहस्य बन गया, जिसका मलबा तक नहीं मिला।

बदलाव: रियल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम।

नतीजा: अब हर विमान हर पल सैटेलाइट से जुड़ा रहता है, भले ही वह समुद्र के बीच में क्यों न हो।

13. बोइंग 737 मैक्स (लायन एयर): सॉफ्टवेयर बनाम पायलट (2018)

MCAS नामक सॉफ्टवेयर ने पायलट की मर्जी के खिलाफ प्लेन की नाक नीचे झुका दी।

बदलाव: सॉफ्टवेयर री-डिजाइन और स्पेशल ट्रेनिंग।

नतीजा: यह साबित हुआ कि तकनीक को हमेशा पायलट के नियंत्रण में रहना चाहिए, न कि इसका उल्टा।

हर विमान दुर्घटना एक त्रासदी है, लेकिन एविएशन इंडस्ट्री ने इन हादसों से मिले कड़वे सबक को सुरक्षा के 'गोल्डन रूल्स' में बदल दिया है। आज हवाई सफर सड़क यात्रा से कहीं ज्यादा सुरक्षित है, और इसके पीछे इन्हीं 13 हादसों के वे नियम हैं जो हर उड़ान के साथ हमारी रक्षा करते हैं।


Ajit Kumar Pandey

Ajit Kumar Pandey

पत्रकारिता की शुरुआत साल 1994 में हिंदुस्तान अख़बार से करने वाले अजीत कुमार पाण्डेय का मीडिया सफर तीन दशकों से भी लंबा रहा है। उन्होंने दैनिक जागरण, अमर उजाला, आज तक, ईटीवी, नवभारत टाइम्स, दैनिक हिंट और दैनिक जनवाणी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक अपनी सेवाएं दीं हैं। समाचार लेखन, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में निपुणता के साथ-साथ उन्होंने समय के साथ डिजिटल और सोशल मीडिया को भी बख़ूबी अपनाया। न्यू मीडिया की तकनीकों को नजदीक से समझते हुए उन्होंने खुद को डिजिटल पत्रकारिता की मुख्यधारा में स्थापित किया। करीब 31 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ अजीत कुमार पाण्डेय आज भी पत्रकारिता में सक्रिय हैं और जनहित, राष्ट्रहित और समाज की सच्ची आवाज़ बनने के मिशन पर अग्रसर हैं।

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