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अजित पवार के बाद कौन संभालेगा NCP की कमान? क्‍या शरद पवार लेंगे फैसले

परिवार अंतिम संस्कार में एकजुट दिखा, लेकिन राजनीति में एकता पर सवाल; सत्ता, नेतृत्व और समीकरणों को लेकर शरद पवार और अजित पवार खेमे आमने-सामने

अजित पवार के बाद कौन संभालेगा NCP की कमान? क्‍या शरद पवार लेंगे फैसले
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नई दिल्‍ली, वाईबीएन डेस्‍क: महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार के जाने से ऐसा राजनीतिक शून्य पैदा हो गया है, जिसे भरना फिलहाल आसान नहीं दिखता। हालांकि, इस घटनाक्रम के बाद राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें भी लगने लगी हैं कि अगर भविष्य में एनसीपी में एकता होती है, तो पार्टी की कमान दोबारा शरद पवार खेमे के हाथ में जा सकती है। इसी आशंका के चलते एकता के प्रयासों को फिलहाल टालने की रणनीति अपनाई जा सकती है, क्योंकि अजित पवार गुट का कोई भी नेता नहीं चाहता कि शरद पवार गुट की राजनीतिक पकड़ फिर से मजबूत हो।

सुनेत्र पवार की आंखों से आंसू नहीं थमे

इन हालातों में आने वाले कुछ महीने एनसीपी के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं और यह देखना होगा कि पार्टी के भीतर समीकरण किस दिशा में बदलते हैं। अजित पवार के अंतिम संस्कार के दौरान पूरा परिवार एकजुट नजर आया। शरद पवार भावुक दिखे, वहीं सुनेत्र पवार की आंखों से आंसू नहीं थमे। अजित पवार के दोनों बेटे, जय और पार्थ, पिता की अर्थी के साथ चलते दिखाई दिए। इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी समेत कई बड़े नेता बारामती पहुंचे और शरद पवार परिवार को सांत्वना दी।

शरद पवार इसके लिए कितने तैयार

हालांकि, परिवार की यह एकजुटता राजनीति में भी बनी रहेगी या नहीं, यह बड़ा सवाल है। मौजूदा राजनीतिक गणित की बात करें तो अजित पवार गुट के पास महाराष्ट्र विधानसभा में 41 विधायक हैं, जबकि शरद पवार खेमे के पास लोकसभा में 8 सांसद हैं। एकता की स्थिति में भी अजित पवार गुट सत्ता से बाहर जाने के पक्ष में नहीं होगा। फिलहाल महाराष्ट्र सरकार में इस गुट की स्थिति काफी मजबूत और सहज मानी जा रही है। ऐसे में सरकार छोड़ना उनके लिए आसान नहीं होगा। यही वजह है कि अजित पवार गुट की प्राथमिकता सत्ता में बने रहने की रहेगी, अब देखना यह है कि शरद पवार इसके लिए कितने तैयार होते हैं।राजनीतिक चर्चाओं के बीच यह भी कहा जा रहा है कि अजित पवार गुट सुनेत्र पवार को उपमुख्यमंत्री पद के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है। इसके बदले बेटे या किसी अन्य नेता को राज्यसभा भेजे जाने का विकल्प भी सामने रखा जा सकता है। सुनेत्र पवार के अलावा प्रफुल्ल पटेल के नाम पर भी उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की अटकलें हैं, लेकिन परिवार के बाहर किसी नाम पर सहमति बनना फिलहाल मुश्किल नजर आ रही है।

देवेंद्र फडणवीस की सरकार पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा

अगर एनसीपी सरकार से बाहर होती है, तो भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। अकेले भाजपा के पास 132 विधायक हैं और बहुमत का आंकड़ा 145 है। इसके अलावा शिवसेना के पास भी पर्याप्त संख्या में विधायक मौजूद हैं। हालांकि, इस स्थिति में एकनाथ शिंदे का दबाव जरूर बढ़ सकता है। ऐसे में भाजपा और एनसीपी, दोनों ही अपने-अपने रास्ते अलग रखने में ही सहज महसूस करेंगे। गौर करने वाली बात यह भी है कि 2024 के चुनाव में गठबंधन के बावजूद जनता का समर्थन अच्छा रहा है, जिससे साफ है कि मतदाताओं के बीच इस गठबंधन को लेकर कोई बड़ी असहजता नहीं है।


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