Top
Begin typing your search above and press return to search.

अजीत के असामयिक निधन से एनसीपी के भविष्य पर सवाल, क्या वरिष्ठ पवार पार्टी को बचाएंगे?

अजीत पवार के नेतृत्व में एनसीपी का क्या शरद पवार की एनसीपी में विलय हो सकता है? ऐसी भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या परिवार के मुखिया शरद पवार आगे आएंगे?

अजीत के असामयिक निधन से एनसीपी के भविष्य पर सवाल, क्या वरिष्ठ पवार पार्टी को बचाएंगे?
X

मुंबई, वाईबीएन डेस्क। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार के असमय निधन से राजनीतिक अटकलों और भविष्यवाणियों का सिलसिला शुरू गया है। राज्य में अटकलें लगाई जा रही हैं कि अजीत पवार के नेतृत्व में एनसीपी का क्या शरद पवार की एनसीपी में विलय हो सकता है? ऐसी भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि शरद पवार, जिन्होंने साल के अंत तक रिटायर होने का संकेत दिया है, इस महत्वपूर्ण समय में दोनों गुटों के एकीकरण का आह्वान कर सकते हैं, जिससे उनके पोते पार्थ और जय और अजीत पवार के भतीजे रोहित एक साथ आ जाएंगे। कार्यकारी अध्यक्ष एवं अजीत की बहन सुप्रिया सुले की रुख इसे लेकर काफी सकारात्मक है।

दोनों गुटों के विलय की संभावना का संकेत

महाराष्ट्र की राजनीति पर नजदीक से निगाह रखने वाले जानते हैं कि पिछले कुछ महीनों में दोनों गुटों के बीच संबंध काफी बेहतर हुए थे। खासकर स्थानीय निकाय चुनावों के बाद से, जिसमें उन्होंने पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में दोनों पार्टियों ने हाथ मिलाया था। एनसीपी (शरद पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने तो बंटवारे के सिर्फ तीन साल बाद ही दोनों गुटों के पूरी तरह विलय की संभावना का संकेत दिया था। अजीत पवार ने भी विलय की संभावना का संकेत दिया था। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि वह "जोड़ने की राजनीति में विश्वास करते हैं, घटाने की नहीं।"

अजीत के बिना नेतृत्व का खालीपन अखरा

नेता के असामयिक निधन के बाद अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को नेतृत्व संकट का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि पार्टी में वास्तव में कोई दूसरा बड़ा नेता नहीं है। अजीत पवार की पत्नी, सुनेत्रा पवार, वर्तमान में राज्यसभा सदस्य हैं और राजनीतिक रूप से सक्रिय रही हैं। हालांकि, उनमें प्रशासनिक अनुभव की कमी है। पार्टी को वह चलाने में इतनी सक्षम नहीं माना जाती, जैसा प्रभाव औ क्षमता अजीत पवार में थी।

राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल पर भी निगाहें

एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे और राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल के अलावा, पार्टी में कोई वरिष्ठ नेता नहीं है जो दिवंगत नेता की जगह ले सके। हालांकि पटेल और तटकरे प्रमुख संगठनात्मक व्यक्ति रहे हैं, लेकिन उनमें राज्यव्यापी जमीनी जुड़ाव की कमी है। अजीत पवार के बेटे पार्थ और जय पवार भी हैं, जिनमें से पार्थ को अपने पिता की विरासत के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन उनके दोनों पुत्र राजनीतिक की दृष्टि से परिपक्व नहीं माने जाते हैं।

क्या वरिष्ठ पवार आगे आकर पार्टी को बचाएंगे?

ऐसी भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि शरद पवार, जिन्होंने साल के अंत तक रिटायर होने का संकेत दिया है, इस महत्वपूर्ण समय में दोनों गुटों के एकीकरण का आह्वान कर सकते हैं, जिससे उनके पोते पार्थ और जय और अजीत पवार के भतीजे रोहित एक साथ आ जाएंगे। महाराष्ट्र के वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक प्रकाश अकोलकर ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि दोनों एनसीपी गुट 5 फरवरी को होने वाले जिला परिषद चुनाव 'घड़ी' चुनाव चिह्न पर एक साथ लड़ रहे हैं, जो प्रभावी रूप से एक अनौपचारिक विलय का संकेत है।

क्या कांग्रेस खुद को पुनर्जीवित कर पाती है?

उन्होंने कहा, "सवाल अब यह नहीं है कि कौन किसके साथ विलय करेगा। केवल दो विपक्षी दल बचे हैं। कांग्रेस और शिवसेना (UBT)। यह देखना बाकी है कि क्या कांग्रेस खुद को पुनर्जीवित कर पाती है।" ऐसी अटकलों और अफवाहों के बीच, एनालिस्ट्स का कहना है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को यह पक्का करना होगा कि अजीत पवार के साथ जुड़े 41 विधायक शरद पवार की तरफ वापस न चले जाएं। यह उनके लिए बड़ी चुनौती है। इसके अलावा, स्थानीय निकाय चुनावों में गठबंधन पार्टी के पक्ष में खास काम नहीं आया।

एनसीपी, जिसने महायुति सहयोगियों से अलग चुनाव लड़ा था ने 29 नगर निगमों में 167 सीटें जीतीं और पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में भाजपा से उसे हार का सामना करना पड़ा, जबकि NCP (SP) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था। शरदपवार भी जानते हैं कि पार्टी के तेजी से गिरते जनाधार को बचाने के लिए उसके पास विकल्प काफी सीमित है। हो सकताहै कि अपनी खोई जमीन वापस हासिल करने के लिए वह दोनों पार्टियों के विलय के लिए हामी भर थे, लेकिन असली सवाल है कि अजीत के नेतृत्व वाली एनसीपी महाराष्ट्र सरकार का हिस्सा है। ऐसे में क्या वह बनी रहेगी, यह सबसे बड़ा सवाल है।


Mukesh Pandit

Mukesh Pandit

पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 1989 में अमर उजाला से रिपोर्टिंग से करने वाले मुकेश पंडित का जनसरोकार और वास्तविकत पत्रकारिता का सफर सतत जारी है। उन्होंने अमर उजाला, विश्व मानव, हरिभूमि, एनबीटी एवं दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक अपनी सेवाएं दीं हैं। समाचार लेखन, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में निपुणता के साथ-साथ उन्होंने समय के साथ डिजिटल और सोशल मीडिया को भी बख़ूबी अपनाया है। करीब 35 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ मुकेश पंडित आज भी पत्रकारिता में सक्रिय हैं और जनहित, राष्ट्रहित और समाज की सच्ची आवाज़ बनने के मिशन पर अग्रसर हैं।

Related Stories
Next Story
All Rights Reserved. Copyright @2019
Powered By Hocalwire