क्या चंद्रशेखर की राह रोकेंगे आकाश आनंद? पढ़ें, BSP की नई रणनीति
UP में मुद्दा गर्म है क्योंकि सियासत एक बार फिर करवट ले रही है… इस बार मुकाबला दलों का नहीं, पीढ़ियों का भी है। जानें चंद्रशेखर और आकाश का सियासी मुकाबला।

नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क । यूपी विधानसभा चुनावों को लेकर उदासीन नजर आ रही बसपा में एकाएक हलचल हो गई है। और इस हलचल और बसपा के भीतर बैचेनी का कारण है आजाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर की आक्रामक रणनीतियां... जिसने बसपा की प्रासंगिकता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं... और यही कारण है कि मायावती ने आखिरकार यूपी के युवाओं को फिर से पार्टी के साथ जोड़ने के लिए आकाश आनंद को सियासी मैदान में उतारने का ऐलान कर दिया है।
यूपी में मुद्दा गर्म है क्योंकि यूपी की सियासत एक बार फिर करवट ले रही है… इस बार मुकाबला सिर्फ दलों का नहीं, पीढ़ियों का भी है। दलित राजनीति की सबसे मजबूत आवाज मानी जाने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती ने ऐसा कदम उठा लिया है, जिसने 2027 की चुनावी जंग को और दिलचस्प बना दिया है।
और ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या मायावती, चंद्रशेखर आजाद की बढ़ती लोकप्रियता से सच में बेचैन हो गई हैं?
- क्या इसीलिए बसपा ने अपना सबसे बड़ा दांव चलते हुए भतीजे आकाश आनंद को सीधे फ्रंट फुट पर उतार दिया है?.... अब सियासी अखाड़े में एक तरफ हैं... दलितों के नए मसीहा कहे जा रहे चंद्रशेखर आजाद, और दूसरी तरफ... लंदन से MBA कर लौटे, 30 साल के आकाश आनंद।
सवाल कई हैं... क्या इस बार दलितों – मुस्लिमों के युवाओं को अपने दल से जोड़ने की यह जंग आकाश बनाम चंद्रशेखर बनने जा रही है?
- क्या आकाश आनंद उन दलित और मुस्लिम युवाओं को वापस खींच पाएंगे, जो चंद्रशेखर की ओर झुक चुके हैं?
-सवाल उठ रहे हैं कि क्या 2027 की सबसे बड़ी लड़ाई में Gen Z आखिर किसके साथ है? ... आकाश को आगे कर मायावती क्या कोई बड़ा सियासी संदेश दे रही हैं? और सबसे बड़ा सवाल ... क्या 2007 की तरह मायावती एक बार फिर दलित-पिछड़े-मुसलमान-ब्राह्मण का सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला दोहरा पाएंगी?
ऐसे कई सवाल हैं... जिनका जवाब 2027 की राजनीति की दिशा तय करेगा... तो अगर आप भी जानना चाहते हैं इनके जवाब... तो इस वीडियो को अंत तक जरूर देखें। और अगर अगर आपने अभी तक हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो अभी कर लें और बेल आइकन का बटन दबाना न भूलें।
तो चलिए सबसे पहले बात करते हैं उस सियासी दांव की, जिसने यूपी की राजनीति में हलचल मचा दी है… असल में, मायावती ने 2027 की चुनावी बिसात पर अपना अगला दांव चल दिया है। नाम है — आकाश आनंद… जी हां, बसपा सुप्रीमो के भतीजे और अब पार्टी के नए फ्रंटलाइन फेस। महज 30 साल का यह युवा चेहरा अब यूपी के 75 जिलों की राजनीति को नापने निकल पड़ा है। रैलियां होंगी, रोड शो होंगे… और वो भी पूरी तरह ग्राउंड जीरो पर उतरकर। पार्टी ने इसकी तैयारियां चुपचाप शुरू भी कर दी हैं, ताकि सियासी सरप्राइज पूरा हो।
मायावती के बाद अगर बसपा का कोई चेहरा आज भी कैडर और मतदाता सुनना चाहता है, तो वह आकाश आनंद हैं। यही वजह है कि मायावती उन्हें आगे कर प्रदेशभर में नई राजनीतिक जमीन तैयार करना चाहती हैं। इन कार्यक्रमों को कामयाब बनाने के लिए भाईचारा कमेटियों, बीएस-4 और संगठन को मोर्चे पर लगा दिया गया है।
आकाश आनंद सिर्फ मंच से भाषण नहीं देंगे… वे कार्यकर्ताओं के साथ रात भी गुजारेंगे, चर्चा भी करेंगे और भरोसा भी बनाएंगे। मकसद साफ है... पुराने छिटके वोटर को वापस लाना... और नए, खासकर युवा मतदाता को बसपा से जोड़ना।
लेकिन सवाल वहीं.... क्या बसपा ने अपनी इस रणनीति को जमीं पर उतारने में देर कर दी है... क्या आकाश आनंद मायावती के इस सियासी दांव को 2027 की जीत में बदल पाएंगे?
और सवाल ये भी है कि आखिर आकाश आनंद ही क्यों? इस सवाल का जवाब एक ही नाम में छिपा है... नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद।
जी हां… वही चंद्रशेखर, जिन्होंने 2024 में न सिर्फ नगीना लोकसभा सीट जीती, बल्कि खुद को दलित राजनीति के नए पोस्टर ब्वॉय के तौर पर भी स्थापित कर दिया। आज हालात ये हैं कि दलित राजनीति में चंद्रशेखर सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि एक प्रतीक बन चुके हैं...
खासकर दलित युवाओं के बीच उनकी पकड़ लगातार मजबूत हो रही है। सड़क से संसद तक, हर मंच पर वह दलित मुद्दों को आक्रामक और बेबाक अंदाज में उठाते नज़र आते हैं। उनकी रैलियों में जनसभाओं में युवाओं की भारी भीड़ नजर आ रही है। सिर्फ दलित ही नहीं पिछड़ों और मुस्लिम युवाओं में भी चंद्रेशेखर का काफी क्रेज है..
दूसरी तरफ… 70 की उम्र पार कर चुकीं मायावती, इस नई पीढ़ी की तेज रफ्तार राजनीति में कहीं न कहीं पीछे छूटती दिख रही हैं। शायद यही वजह है कि अब उन्होंने पीढ़ी बदलने का बड़ा दांव चल दिया है। चंद्रशेखर के जवाब में— आकाश आनंद। युवा चेहरा, नई ऊर्जा और भविष्य का संदेश। आकाश आनंद को आगे कर मायावती साफ संकेत दे रही हैं कि दलित राजनीति की कमान वह किसी और को नहीं सौंपने वालीं।
...यह सिर्फ चेहरा बदलने की रणनीति नहीं, बल्कि चंद्रशेखर आजाद के बढ़ते कद पर लगाम लगाने की सियासी कोशिश है। अब देखना ये है कि इस पीढ़ी की जंग में… अनुभव भारी पड़ेगा या युवाओं का जोश?
एक नया सवाल... क्या आकाश आनंद बसपा को आगे ले जा पाएंगे...
राजनीति के जानकार एक सुर में कहते हैं... आकाश आनंद बड़ा चेहरा जरूर बनेंगे… लेकिन बसपा का असली चेहरा, कमान और आखिरी फैसला अब भी मायावती के हाथ में ही रहेगा। इसकी सबसे बड़ी मिसाल खुद मायावती का बयान है। 15 जनवरी को अपने जन्मदिन पर उन्होंने साफ कहा... 'कार्यकर्ता मुझे 5वीं बार यूपी का मुख्यमंत्री बनाने का मन बना चुके हैं।'
तो फिर सवाल उठता है… आकाश आनंद को इतनी आक्रामक तरीके से आगे क्यों लाया जा रहा है? इसका जवाब आज की नहीं, कल की राजनीति में छिपा है। दरअसल, मायावती 2027 की नहीं… उसके बाद की बसपा भी तैयार कर रही हैं। आकाश आनंद को फ्रंट पर लाकर वह कार्यकर्ताओं और वोटरों को यह संकेत दे रही हैं कि जब भी उत्तराधिकार का वक्त आएगा... नाम पहले से तय होगा… और उस पर सवाल उठाने की गुंजाइश नहीं बचेगी।
यानी साफ है… यह सिर्फ चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि दलित राजनीति की विरासत को सुरक्षित रखने का मास्टर प्लान है। अब देखना यही है... 2027 में चेहरा रहेगा मायावती का… लेकिन भविष्य की तस्वीर में सबसे आगे दिखेंगे आकाश आनंद।
पश्चिम यूपी से आकाश आनंद का सियासी शंखनाद?
जी हां… बसपा का अगला दांव शायद पश्चिमी यूपी से चलने वाला है... वही इलाका, जो कभी मायावती की ताकत का सबसे मजबूत किला माना जाता था। आकाश आनंद अपने चुनावी अभियान की पहली हुंकार यहीं से भर सकते हैं। पश्चिम यूपी इसलिए भी अहम है, क्योंकि...
बसपा का कोर जाटव वोट बैंक यहीं सबसे मजबूत रहा है और यहीं सबसे ज्यादा सक्रिय हैं चंद्रशेखर आजाद, जिन्हें आज दलित युवाओं का नया चेहरा माना जा रहा है... राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आकाश आनंद की रणनीति साफ है... जाटव + मुस्लिम समीकरण को दोबारा जोड़ना, वही समीकरण जिसने कभी बसपा को आंख मूंदकर वोट दिलाए थे।
अगर यह दांव चला... तो बसपा को पुरानी जमीन मिल सकती है… और चंद्रशेखर आजाद के सियासी विस्तार पर सीधा ब्रेक लग सकता है। यानी पश्चिम यूपी सिर्फ शुरुआत नहीं, बसपा बनाम चंद्रशेखर की सबसे बड़ी सियासी रणभूमि बनने जा रहा है।
पश्चिम के बाद पूर्वांचल पर मायावती की अगली चाल
पश्चिम यूपी में मोर्चा संभालने के बाद… मायावती की नजरें पूर्वांचल पर हैं। 2027 की चुनावी जंग के लिए बसपा सुप्रीमो एक–एक चाल नपी-तुली और रणनीतिक तरीके से चलती दिख रही हैं। एक तरफ पश्चिम में चंद्रशेखर आजाद के बढ़ते असर को सीमित करने की कोशिश, तो दूसरी तरफ पूर्वांचल में ब्राह्मण वोट बैंक की दोबारा घरवापसी का मिशन।
पश्चिम से निकलते ही आकाश आनंद का अगला पड़ाव पूर्वांचल होगा। पहला लक्ष्य होगा... ब्राह्मण समाज को यह संकेत देना कि बसपा के दरवाजे एक बार फिर खुले हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस दौरान कई चर्चित ब्राह्मण नेताओं की बसपा में एंट्री हो सकती है। कहा तो यह भी जा रहा है कि पर्दे के पीछे बातचीत शुरू हो चुकी है...
और मायावती की नजरें भाजपा के उन नाराज ब्राह्मण विधायकों पर भी हैं, जिन्हें लेकर खुद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी को चेतावनी तक देनी पड़ी थी। मकसद साफ है.. 2007 का इतिहास दोहराना। यानी एक बार फिर दलित + पिछड़ा + ब्राह्मण + मुस्लिम... इस सियासी कॉकटेल को तैयार कर सत्ता तक पहुंचने की जमीन बनाना।
अब सवाल यही है.. क्या मायावती की यह पुरानी... लेकिन आजमाई हुई सोशल इंजीनियरिंग... 2027 में फिर कमाल दिखा पाएगी? या यूपी की राजनीति का मिजाज बदल चुका है? तो साफ है… यूपी की राजनीति अब सिर्फ सीटों की लड़ाई नहीं रही... यह वर्चस्व, विरासत और भविष्य की सीधी टक्कर बन चुकी है।
एक तरफ हैं... अनुभव की राजनीति... सोशल इंजीनियरिंग की मास्टरमाइंड और सत्ता तक पहुंचने का आजमाया हुआ रास्ता जानने वाली मायावती।
तो दूसरी तरफ.. नई पीढ़ी की उम्मीद... सड़क से संसद तक गूंजती आवाज... और दलित युवाओं की धड़कन बन चुके... चंद्रशेखर आजाद। और इन दोनों के बीच खड़ा है— एक नया चेहरा ... एक नया दांव... और एक सोचा-समझा सियासी प्रयोग ...आकाश आनंद।
2027 दरअसल चुनाव नहीं… यह तय करेगा कि दलित राजनीति का नेतृत्व अनुभव के हाथों में रहेगा... या युवा जोश के साथ नई दिशा पकड़ेगा। क्या मायावती का 2007 वाला फॉर्मूला ... एक बार फिर इतिहास रचेगा? या चंद्रशेखर की लोकप्रियता ... पुराने किले की दीवारें हिला देगी? और सबसे अहम... क्या आकाश आनंद मायावती की राजनीतिक विरासत को सिर्फ संभाल पाएंगे… या खुद एक नई पहचान गढ़ पाएंगे?
इन सवालों के जवाब अभी भविष्य के गर्भ में हैं… लेकिन इतना तय है... 2027 की सियासत में हर चाल, हर चेहरा और हर वोट यूपी की अगली सत्ता की कहानी लिखेगा।
यानी मुकाबला दिलचस्प नहीं… इतिहास बदलने वाला होने जा रहा है।
मुद्दा गर्म है के आज के इस एपिसोड में इतना ही... एक बार फिर ऐसे ही एक नए मुद्दे के साथ होंगे।


