Magh Mela में शंकराचार्य का धरना, क्या साधु को गंगा स्नान के लिए अनुमति लेनी होगी?
मौनी अमावस्या पर प्रशासन ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को रथ से उतरकर पैदल जाने को कहा स्वामी ने परंपरा अपमानित होने का आरोप लगाया

नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क: प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के मुख्य स्नान पर्व के दौरान संगम तट पर अफरा-तफरी मच गई, जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को प्रशासन ने रोक दिया। शंकराचार्य सुबह करीब 9 बजे लगभग 200 अनुयायियों के साथ रथ और पालकी में संगम पहुंचे थे। लेकिन मेले में अत्यधिक भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने उन्हें रथ से उतरकर पैदल चलने का निर्देश दिया।
प्रशासन ने अनादि काल से चली आ रही परंपरा को तोड़ा
इस दौरान समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और तीखी झड़प हुई। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने अनादि काल से चली आ रही परंपरा को तोड़ा है। सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि क्या किसी साधु-संत या सनातनी को गंगा स्नान के लिए अनुमति लेनी होगी। उन्होंने कहा कि क्या कोई बच्चा अपनी मां से मिलने के लिए अनुमति मांगता है? शंकराचार्य ने परंपरा को अपमानित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि माघ मेले में अनादि काल से साधु-संतों का सम्मान करते हुए स्नान की परंपरा रही है।
सरकार और मेला प्रशासन पर भी सवाल उठाए
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार और मेला प्रशासन पर भी सवाल उठाए कि संतों और श्रद्धालुओं के साथ ऐसा व्यवहार कैसे किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे हमेशा नियमों का पालन करते आए हैं और आगे भी करेंगे, लेकिन परंपराओं के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस घटना के बाद साधु-संतों और श्रद्धालुओं के बीच विवाद चर्चा का विषय बन गया है। प्रयागराज पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार ने बताया कि संगम नोज पर उस समय लाखों लोग मौजूद थे। सुरक्षा के मद्देनजर वीवीआइपी स्नान पर रोक थी, और स्वामी जी से केवल पैदल जाने का अनुरोध किया गया था।
सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की
स्वामी ने बैरिकेड तोड़ने के आरोप को खारिज करते हुए सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की। उनका कहना था कि वे प्रशासन के साथ ही आगे बढ़े थे, और पुलिस ने ही वार्ता कर बैरिकेड हटवाए थे। गौरतलब है कि बीते रविवार को स्वामी का जुलूस करीब डेढ़ घंटे तक रुका रहा। पुलिस ने भीड़ नियंत्रण के लिए कुछ अनुयायियों को जीप में बैठाया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्वामी ने कहा कि उनके अनुयायियों के साथ मारपीट हुई और उनके धार्मिक 'छत्र' को तोड़ा गया। प्रशासन की कार्रवाई से असंतुष्ट होकर शंकराचार्य धरने पर बैठ गए और संगम स्नान किए बिना वापस चले गए।


