Top
Begin typing your search above and press return to search.

हिमाचल से आंध्र प्रदेश तक: 4 महा-शक्तिपीठ, जहां विराजमान हैं आदिशक्ति

क्या आप जानते हैं कि देश में 4 ऐसे महाशक्तिपीठ भी हैं, जिनके दर्शन मात्र से 51 शक्तिपीठों के बराबर पुण्य मिलने की मान्यता है? इन्हें महाशक्तिपीठ या आदि शक्तिपीठ भी कहा जाता है।

हिमाचल से आंध्र प्रदेश तक: 4 महा-शक्तिपीठ, जहां विराजमान हैं आदिशक्ति
X

सनातन धर्म में देवी के 51 शक्ति पीठों को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि ये वही स्थान हैं, जहां देवी सती के शरीर के अलग-अलग अंग और आभूषण गिरे थे। इन्हीं स्थानों पर शक्ति पीठों की स्थापना हुई। हालांकि शास्त्रों में कहीं-कहीं 52 शक्ति पीठों का भी उल्लेख मिलता है, लेकिन आम तौर पर 51 शक्ति पीठ ही माने जाते हैं। हर शक्तिपीठ का अपना अलग महत्व, अलग कथा और अलग फल बताया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में 4 ऐसे महाशक्तिपीठ भी हैं, जिनके दर्शन मात्र से 51 शक्तिपीठों के बराबर पुण्य मिलने की मान्यता है? इन्हें महाशक्तिपीठ या आदि शक्तिपीठ भी कहा जाता है।

कालीघाट देवी काली का प्रमुख शक्तिपीठ

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में स्थित कालीघाट देवी काली का प्रमुख शक्तिपीठ है। मान्यता है कि यहां देवी सती के बाएं पैर का अंगूठा गिरा था। देवी यहां कालिका रूप में विराजमान हैं और भैरव को नकुशील कहा जाता है। यह स्थान तंत्र साधना और शक्ति उपासना का बड़ा केंद्र माना जाता है।कहा जाता है कि सच्चे मन से मां काली की पूजा करने से भय, बाधाएं और नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं और भक्तों को जीवन में साहस और आत्मबल की प्राप्ति होती है।

कामाख्या देवी मंदिर सबसे रहस्यमय पीठ

असम के गुवाहाटी में स्थित कामाख्या देवी मंदिर को सबसे रहस्यमय और शक्तिशाली पीठों में गिना जाता है। यह योनि पीठ है, जहां देवी सती का गर्भ स्थान गिरा था। यहां देवी की पूजा शक्ति और सृजन के प्रतीक के रूप में होती है। कामाख्या मंदिर में प्रतिमा नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक शिला की पूजा की जाती है।मान्यता है कि यहां दर्शन करने से इच्छाओं की पूर्ति होती है और साधकों को विशेष सिद्धियां प्राप्त होती हैं।

ज्वाला जी शक्ति पीठ

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित ज्वाला जी शक्ति पीठ अपनी अनोखी पहचान के लिए प्रसिद्ध है। यहां देवी की जिह्वा (जीभ) गिरी थी और आज भी मंदिर में प्राकृतिक रूप से जलती हुई अखंड ज्वालाएं दिखाई देती हैं। इन ज्वालाओं को देवी का स्वरूप माना जाता है।

दर्शन करने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं

कहा जाता है कि यहां दर्शन करने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं और रोग-शोक से मुक्ति मिलती है।आंध्र प्रदेश में स्थित शैलपुत्री या भ्रमराम्बा देवी का मंदिर भी महा-शक्तिपीठ माना जाता है। मान्यता है कि यहां देवी सती की ग्रीवा यानी गला गिरा था। यह स्थान आध्यात्मिक शांति और मनोकामना पूर्ति के लिए जाना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से की गई पूजा जीवन के बड़े संकटों से उबार देती है।आईएएनएस


Mukesh Pandit

Mukesh Pandit

पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 1989 में अमर उजाला से रिपोर्टिंग से करने वाले मुकेश पंडित का जनसरोकार और वास्तविकत पत्रकारिता का सफर सतत जारी है। उन्होंने अमर उजाला, विश्व मानव, हरिभूमि, एनबीटी एवं दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक अपनी सेवाएं दीं हैं। समाचार लेखन, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में निपुणता के साथ-साथ उन्होंने समय के साथ डिजिटल और सोशल मीडिया को भी बख़ूबी अपनाया है। करीब 35 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ मुकेश पंडित आज भी पत्रकारिता में सक्रिय हैं और जनहित, राष्ट्रहित और समाज की सच्ची आवाज़ बनने के मिशन पर अग्रसर हैं।

Related Stories
Next Story
All Rights Reserved. Copyright @2019
Powered By Hocalwire