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कबीर बेदी का अपमान! ममूटी की फिल्म प्रेस मीट से टकराव में रद्द हुई ‘कोरगज्जा’की कोच्चि प्रेस कॉन्फ्रेंस

‘कोरगज्जा’ एक पैन-इंडियन कन्नड़ फिल्म है, जिसमें कबीर बेदी महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। यह फिल्म कर्नाटक के तुलु नाडु क्षेत्र के लोक देवता कोरगज्जा की कहानी पर आधारित है।

कबीर बेदी का अपमान! ममूटी की फिल्म प्रेस मीट से टकराव में रद्द हुई ‘कोरगज्जा’की कोच्चि प्रेस कॉन्फ्रेंस
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अपकमिंग कन्नड़ फिल्म ‘कोरगज्जा’ के प्रमोशनल के दौरान एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी, जिसे अभिनेता कबीर बेदी ने दुर्भाग्यपूर्ण और अपमानजनक बताया। फिल्म की टीम का आरोप है कि अभिनेता ममूटी की टीम ने जानबूझकर उसी समय अपनी मलयालम फिल्म ‘चाथापाच’ की प्रेस कॉन्फ्रेंस तय कर दी, जिससे ‘कोरगज्जा’ का कार्यक्रम प्रभावित हुआ और रद्द करना पड़ा।

कबीर बेदी महत्वपूर्ण भूमिका में हैं

‘कोरगज्जा’ एक पैन-इंडियन कन्नड़ फिल्म है, जिसमें कबीर बेदी महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। यह फिल्म कर्नाटक के तुलु नाडु क्षेत्र के लोक देवता कोरगज्जा की कहानी पर आधारित है। प्रेस मीट के बारे में टीम ने एक सप्ताह पहले ही सभी मीडिया हाउस को निमंत्रण भेज दिए थे। कबीर बेदी और अभिनेत्री भव्या विशेष रूप से इस इवेंट के लिए कोच्चि पहुंचे थे, लेकिन प्रेस मीट से ठीक एक दिन पहले ममूटी की टीम ने अपनी फिल्म की प्रेस कॉन्फ्रेंस उसी समय पर घोषित कर दी।

यह जानबूझकर किया गया, टीम का आरोप

‘कोरगज्जा’ टीम का कहना है कि यह जानबूझकर किया गया, क्योंकि ममूटी जैसे बड़े स्टार के कार्यक्रम में मीडिया की भारी भीड़ जाती है। कोच्चि जैसे छोटे शहर में ज्यादातर पत्रकार, यानी एक ही व्यक्ति, फिल्म और अन्य बीट संभालते हैं, इसलिए दो बड़े इवेंट एक समय पर रखना इंडस्ट्री की सामान्य परंपरा के खिलाफ है। इसके लिए पीआरओ आपस में समन्वय करते हैं, लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ। आधी रात को ‘कोरगज्जा’ टीम के पीआर को फोन आया कि ममूटी की टीम चाहती है कि उनका इवेंट रद्द या स्थगित कर दिया जाए, क्योंकि पत्रकार नहीं आ पाएंगे।

ममूटी का प्रभाव बहुत ज्यादा है

टीम ने बताया कि इसमें लाखों रुपए पहले ही खर्च हो चुके थे। हालांकि, ममूटी का प्रभाव बहुत ज्यादा है। आखिरकार प्रेस मीट रद्द करनी पड़ी। शाम 5 बजे सीमित मीडिया के साथ छोटी मीट की गई, लेकिन प्रमोशन को भारी नुकसान हुआ। इस पर फिल्म के निर्देशक सुधीर अट्टावर और निर्माता त्रिविक्रम सपल्या ने दुख जताया। उन्होंने कहा कि यह व्यवहार अस्वीकार्य है और मलयालम इंडस्ट्री की छवि पर सवाल उठाता है।

मंगलुरु में 100 से ज्यादा पत्रकार आए

त्रिविक्रम सपल्या ने कहा कि देशभर में प्रमोशन सफल रहा, मंगलुरु में 100 से ज्यादा पत्रकार आए, लेकिन कोच्चि में यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण थी। फिल्म से कई मलयालम तकनीशियन और गायक जुड़े हैं, फिर भी बाधा डाली गई। निर्देशक ने सवाल उठाया कि मलयालम फिल्मों को बेंगलुरु में पूरा समर्थन मिलता है, लाखों कन्नड़ दर्शक उन्हें देखते हैं, तो कोच्चि में ऐसा क्यों हुआ? यह भाषा आधारित तनाव पैदा कर सकता है।

कबीर बेदी इस इवेंट के लिए विशेष रूप से कोच्चि आए थे

मलयालम सिनेमा के प्रशंसक कबीर बेदी इस इवेंट के लिए विशेष रूप से कोच्चि आए थे। उन्होंने कहा, मैं मलयालम फिल्मों का प्रशंसक हूं, जो भारत के 25 प्रतिशत राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी हैं। सम्मान के चलते मैं यहां आया था। यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। संभव है ममूटी को जानकारी न हो, लेकिन एक दिन पहले तय कार्यक्रम को बाधित करना सही नहीं। मीडिया या पीआरओ से समन्वय होना चाहिए था।अभिनेत्री भव्या ने भी इस घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कबीर बेदी जैसे सम्मानित अंतरराष्ट्रीय कलाकार का इस तरह अनादर करना अस्वीकार्य है। आईएएनएस


Mukesh Pandit

Mukesh Pandit

पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 1989 में अमर उजाला से रिपोर्टिंग से करने वाले मुकेश पंडित का जनसरोकार और वास्तविकत पत्रकारिता का सफर सतत जारी है। उन्होंने अमर उजाला, विश्व मानव, हरिभूमि, एनबीटी एवं दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक अपनी सेवाएं दीं हैं। समाचार लेखन, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में निपुणता के साथ-साथ उन्होंने समय के साथ डिजिटल और सोशल मीडिया को भी बख़ूबी अपनाया है। करीब 35 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ मुकेश पंडित आज भी पत्रकारिता में सक्रिय हैं और जनहित, राष्ट्रहित और समाज की सच्ची आवाज़ बनने के मिशन पर अग्रसर हैं।

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