अमेरिका की इस चेतावनी को नजरअंदाज करना क्यों मुश्किल होगा!
क्या अमेरिका ने पाकिस्तान के लिए 'लेवल 3' सुरक्षा अलर्ट जारी किया है।खैबर पख्तूनख्वा जैसे इलाकों को 'नो-गो जोन' में क्यों रखा गया?

नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क । अमेरिका ने पाकिस्तान के लिए 'लेवल 3' की ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है, जिससे उसके नागरिकों को चेताया गया है। कुछ इलाकों को, जहां आतंकवाद, अपहरण और नागरिक अशांति का खतरा है, 'लेवल 4' (नो-गो जोन) घोषित किया गया है। अगर आप पाकिस्तान जाने का सोच रहे हैं, तो ये सुरक्षा से जुड़ी कड़वी हकीकत जान लेना जरूरी है।
वाशिंगटन से इस्लामाबाद तक हलचल मची हुई है। अमेरिकी विदेश विभाग ने 26 जनवरी को अपनी ट्रैवल एडवाइजरी को अपडेट करते हुए पाकिस्तान को 'लेवल 3' में डाल दिया है। इसका सीधा मतलब है- "अपनी यात्रा की योजना पर दोबारा सोचें।" लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। अमेरिका ने ये साफ कहा है कि पाकिस्तान में बढ़ते अपराध, आतंकवाद और अचानक होने वाली नागरिक अशांति किसी की भी जान को खतरे में डाल सकती है। ये चेतावनी केवल पर्यटकों के लिए नहीं है, बल्कि उन पाकिस्तानी मूल के अमेरिकियों के लिए भी है जो अपने वतन लौटने का विचार कर रहे हैं।
लेवल 3 और लेवल 4 का 'खतरनाक' गणित
सरकारी कोड आम लोगों के लिए समझना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, लेकिन ये आपकी जिंदगी और मौत का फैसला कर सकते हैं। अमेरिका अपनी एडवाइजरी को चार श्रेणियों में बांटता है:
लेवल 1 (सामान्य सावधानी): जैसे कि आप किसी सुरक्षित पड़ोसी देश की यात्रा कर रहे हों।
लेवल 2 (अतिरिक्त सावधानी): सुरक्षा जोखिम थोड़े बढ़ गए हैं।
लेवल 3 (पुनर्विचार करें): गंभीर सुरक्षा जोखिम, जैसा कि पाकिस्तान के लिए जारी हुआ है।
लेवल 4 (यात्रा न करें): ये सबसे खतरनाक श्रेणी है। अमेरिका ने खैबर पख्तूनख्वा जैसे क्षेत्रों को इसी श्रेणी में रखा है। यहां जाने का मतलब ये है कि अगर आप मुसीबत में फंसते हैं, तो अमेरिकी सरकार भी आपकी मदद नहीं कर पाएगी।
आतंकवाद का साया: कहां है सबसे ज्यादा खतरा?
अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में आतंकवादी बिना चेतावनी के हमला कर सकते हैं। आतंकवादियों के निशाने पर कोई खास जगह नहीं होती, बल्कि वो हर उस जगह को टारगेट करते हैं जहां भीड़ होती है।
इन जगहों पर जाने से पहले एक बार सोचें:
बाजार और शॉपिंग मॉल: जहां लोगों की काफी भीड़-भाड़ होती है।
परिवहन केंद्र: बस अड्डे, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट।
धार्मिक स्थल: मस्जिदें और अन्य पूजा स्थल जो अक्सर सॉफ्ट टारगेट बनते हैं।
सरकारी और सैन्य इमारतें: जहां सुरक्षा बलों और चरमपंथियों के बीच टकराव होता है।
याद रखें: पाकिस्तान में स्थानीय कानूनों के बिना प्रदर्शन करना एक अपराध है। कई अमेरिकी नागरिक केवल प्रदर्शनों में शामिल होने के कारण सलाखों के पीछे जा चुके हैं।
अपहरण और टारगेट किलिंग: विदेशी नागरिकों पर जोखिम बढ़ता जा रहा है।
अमेरिका ने खास तौर पर 'किडनैपिंग' को लेकर रेड फ्लैग दिखाया है। खैबर पख्तूनख्वा (KPK) और बलूचिस्तान जैसे प्रांतों में विदेशी नागरिकों का अपहरण कर फिरौती मांगना या उन्हें राजनीतिक मोहरा बनाना अब आम बात हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां टारगेट किलिंग और बम धमाके भी अक्सर होते हैं।
दिलचस्प बात ये है कि एडवाइजरी में पाकिस्तानी मूल के अमेरिकियों को भी स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि वे खुद को स्थानीय न समझें, क्योंकि आतंकवादी उन्हें भी उतना ही बड़ा टारगेट मानते हैं जितना किसी और विदेशी को।
अमेरिकी सरकार क्यों बेबस हो जाती है?
जब कोई देश 'लेवल 4' की सूची में आता है, तो अमेरिकी दूतावास की क्षमताएं सीमित हो जाती हैं। अगर आप खैबर पख्तूनख्वा के कबीलाई इलाकों में पहुंचकर किसी संकट में फंसते हैं, तो अमेरिकी सरकार वहां अपनी टीम नहीं भेज पाएगी। स्थानीय कानून और बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था के कारण 'रेस्क्यू ऑपरेशन' करना लगभग असंभव होता है।
फिलहाल की स्थिति को देखते हुए, जवाब थोड़ा 'जोखिम भरा' है। यदि यात्रा अनिवार्य नहीं है, तो अमेरिकी विदेश विभाग की सलाह का पालन करके इसे टालना ही समझदारी है। पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था इस वक्त एक नाजुक स्थिति में है, जहां कब क्या हो जाए, कहना मुश्किल है।


