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Noida News: SC के आदेश से 3 लाख वाहनों को राहत, BS-3 पर पाबंदी बरकरार

SC के ताजा आदेश के बाद नोएडा में BS-4 व उससे उन्नत श्रेणी के 3 लाख से अधिक वाहन एनसीआर में चल सकेंगे। BS-3, BS-2 और BS-1 वाहनों पर 10-15 साल वाली पाबंदी रहेगी।

Noida News: SC के आदेश से 3 लाख वाहनों को राहत, BS-3 पर पाबंदी बरकरार
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नोएडा, वाईबीएन डेस्क। सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा आदेश से नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में करीब तीन लाख वाहन चालकों को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने कुछ श्रेणियों के वाहनों को संचालन की अनुमति देते हुए लोगों की रोज़मर्रा की परेशानी को कम किया है। हालांकि, प्रदूषण पर नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए BS-3 मानक वाले वाहनों पर लगी पाबंदी को बरकरार रखा गया है। कोर्ट ने साफ किया कि पर्यावरण और जनता के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। प्रशासन को आदेश दिया गया है कि नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए और वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

बीएस-4 और उससे उन्नत वाहनों से पाबंदी हटी

एनसीआर ही नहीं बल्कि यूपी का एक अहम हिस्सा है नोएडा। यहां वाहन स्वामियों के लिए सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने एनजीटी और सीएक्यूएम द्वारा 10-15 साल पुराने वाहनों पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर स्पष्ट किया है कि अब बीएस-4 और उससे उन्नत श्रेणी के वाहनों पर यह पाबंदी लागू नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से तीन लाख से अधिक वाहन स्वामियों को बड़ा लाभ होगा। हालांकि, बीएस-3 और उससे नीचे की श्रेणी के वाहनों पर 10 और 15 साल वाला प्रतिबंध जारी रहेगा।

नोएडा में कुल 12.09 लाख वाहन पंजीकृत हैं

परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, नोएडा में कुल 12.09 लाख वाहन पंजीकृत हैं। इनमें से करीब 2.78 लाख वाहन बीएस-3, बीएस-2 और बीएस-1 श्रेणी के हैं, इन वाहनों पर प्रतिबंध यथावत जारी रहेंगे। इन वाहनों को अब 10-15 साल की तय मियाद पूरी होने के बाद एनसीआर में चलने की अनुमति नहीं मिलेगी, जबकि बीएस-4 और बीएस-6 जैसे उन्नत श्रेणी के वाहन इस प्रतिबंध से मुक्त रहेंगे।


Dhiraj Dhillon

Dhiraj Dhillon

धीरज ढिल्लों दो दशकों से अधिक समय से हिंदी पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने करियर के दौरान दैनिक हिंदुस्तान और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में नोएडा और गाजियाबाद क्षेत्र में गहन रिपोर्टिंग की है। प्रिंट मीडिया के साथ-साथ, उन्होंने डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी काम किया है। उनकी लेखनी में निष्पक्षता, तथ्यपरकता और गहरी विश्लेषण क्षमता स्पष्ट रूप से झलकती है। समसामयिक विषयों के साथ-साथ स्वास्थ्य, जीवनशैली, विकास संबंधी मुद्दों और राजनीति में उनकी गहरी रुचि रही है। उन्होंने पांच वर्षों तक Centre for Advocacy & Research (CFAR) के साथ मिलकर सार्वजनिक स्वास्थ्य संचार कार्य किया है।

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