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Noida Yuvraj Death Case: एक और चश्मदीद ने रेस्क्यू पर उठाए सवाल

नोएडा में युवराज मेहता की मौत मामले में नए चश्मदीद ने पुलिस रेस्क्यू पर सवाल उठाए हैं। बिना उपकरण पहुंचे पुलिसकर्मियों और ट्रक चालक के बयान को लेकर भी विवाद।

Noida Yuvraj Death Case: एक और चश्मदीद ने रेस्क्यू पर उठाए सवाल
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नोएडा, वाईबीएन न्यूज। सेक्टर-150 में युवराज मेहता की मौत के मामले में एक और चश्मदीद सामने आया है। इस चश्मदीद ने भी रेस्क्यू ऑपरेशन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। चश्मदीद का कहना है कि अगर उसने पुलिस को कॉल करने के बजाय अपने दोस्तों को पहले बुलाया होता, तो शायद युवराज की जान बच जाती। सुरक्षा कारणों से उसने अपनी पहचान उजागर नहीं की है। बता दें कि इससे पहले फ्लिपकार्ट के एक डिलीवरी बॉय ने इसी तरह के सवाल खुलेआम उठाए थे, हालांकि बाद में उसका बयान बदल गया और सोशल मीडिया पर इस बात की चर्चा जोरों पर है कि पुलिस के दवाब में डिलीवरी बॉय बयान बदलने का मजबूर हो गया।

दो पीसीआर पहुंच गई थीं मौके पर लेकिन...

अब सामने आए दूसरे चश्मदीद के मुताबिक, उसके पास दो लोग आए और बताया कि कोई मदद के लिए चिल्ला रहा है। इसके बाद वह अपने दो दोस्तों के साथ मौके पर पहुंचा। उसने रात करीब 12:14 बजे डायल 112 पर कॉल की, जिसकी कॉल हिस्ट्री उसके मोबाइल फोन में मौजूद है। दावा है कि लगभग 12:20 बजे पहली पीसीआर मौके पर पहुंची और कुछ देर बाद दूसरी पीसीआर भी आ गई। इसी दौरान युवराज मेहता के पिता भी घटनास्थल पर पहुंच चुके थे। हालांकि, चश्मदीद का आरोप है कि मौके पर मौजूद 10 से 12 पुलिसकर्मियों के पास न तो रस्सा था और न ही कोई जरूरी रेस्क्यू उपकरण। पुलिसकर्मियों की इस लापरवाही के चलते तत्काल बचाव कार्य शुरू नहीं हो सका।

डिलीवरी बॉय ने बचाया, अपनी पीठ थपथपा रही पुलिस

मामले में एक और विवाद ट्रक चालक के बयान को लेकर खड़ा हो गया है। नोएडा सेक्टर-150 रोड स्थित गड्ढे में गिरे ट्रक चालक का बुधवार को पुलिस की ओर से बयान जारी किया गया, जिसमें उसने कहा कि पुलिस ने आकर उसकी जान बचाई। वहीं, डिलीवरी बॉय मुनेंद्र का दावा है कि उसने अपने दो साथियों के साथ मिलकर ट्रक चालक को तालाब से बाहर निकाला था। इस विरोधाभास के बाद सवाल उठ रहे हैं कि अगर ट्रक चालक को मुनेंद्र और उसके साथियों ने बाहर निकाला, तो फिर उसने पुलिस के पक्ष में बयान क्यों दिया। आशंका जताई जा रही है कि कहीं ट्रक चालक से दबाव में आकर बयान तो नहीं दिलवाए गए। बता दें कि इसी तालाब में गिरने से युवराज मेहता की मौत हुई थी।

सिस्टम की लापरवाही छिपाई नहीं जा सकती

मामले में लगातार सामने आ रहे नए बयानों से पुलिस की भूमिका पर सवाल गहराते जा रहे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग तेज होती जा रही है। हालांकि इस बीच युवराज मेहता की गुरुग्राम के एक बार की फुटेज भी वायरल हो रही है, जो यह साबित करने का प्रयास है कि युवराज के नशे में होने से यह‌ हादसा हुआ। हालांकि युवराज नशे में था तो सिस्टम अपनी जवाबदेही से नहीं बच सकता। बेसमेंट में लंबे समय से पानी भरा था, यह लापरवाही अपनी जगह रहेगी ही।


Dhiraj Dhillon

Dhiraj Dhillon

धीरज ढिल्लों दो दशकों से अधिक समय से हिंदी पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने करियर के दौरान दैनिक हिंदुस्तान और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में नोएडा और गाजियाबाद क्षेत्र में गहन रिपोर्टिंग की है। प्रिंट मीडिया के साथ-साथ, उन्होंने डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी काम किया है। उनकी लेखनी में निष्पक्षता, तथ्यपरकता और गहरी विश्लेषण क्षमता स्पष्ट रूप से झलकती है। समसामयिक विषयों के साथ-साथ स्वास्थ्य, जीवनशैली, विकास संबंधी मुद्दों और राजनीति में उनकी गहरी रुचि रही है। उन्होंने पांच वर्षों तक Centre for Advocacy & Research (CFAR) के साथ मिलकर सार्वजनिक स्वास्थ्य संचार कार्य किया है।

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