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हिंदी हमारी संस्कृति सभ्यता और आत्मा की अभिव्यक्ति : डॉ मुनीश चंद्र शर्मा

रामपुर में विश्व हिंदी दिवस पर हिंदी भूषण सम्मान से विभूषित किये गए मातृभाषा शिक्षक

A Sharma
हिंदी हमारी संस्कृति सभ्यता और आत्मा की अभिव्यक्ति : डॉ मुनीश चंद्र शर्मा
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वाईबीएन नेटवर्क, रामपुर। विश्व हिंदी परिषद रामपुर के तत्वावधान में विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। सरस्वती विद्या मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सूर्यप्रकाश पाल, डॉ अरुण कुमार और डॉ मुनीश चंद्र शर्मा विवेक दीक्षित ने दीप जलाकर समारोह की शुरुआत की। सरदार बलराम सिंह ने आलंकारिक शैली में अतिथियों का स्वागत किया। पूनम दीक्षित ने विश्व हिन्दी परिषद के उद्देश्यों और आगामी योजनाओं से परिचित कराया।

इसके पश्चात परिषद के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष डॉ मुनीश चंद्र शर्मा को पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष सूर्यप्रकाश पाल ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलायी। मुख्य अतिथि सूर्यप्रकाश पाल ने कहा कि हिंदी जन जन की भाषा है।इसमें अपने का भाव समाहित है।हिंदी हमारी संस्कृति और सभ्यता की रक्षक और पोषक है। अगर भारत को जानने का सबसे सरल माध्यम है हिंदी। इसे अंतर्मन से अपनाने की जरूरत है। विशिष्ट अतिथि डॉ अरुण कुमार ने कहा कि हिंदी सबसे अधिक देशों में बोली जानेवाली भाषा है। इसे पुस्तकों और राजनीतिक मंचों तक तक ही सीमित नहीं रखना है बल्कि व्यवहार में लाना आवश्यक है।

इसके पश्चात जनपद भर से आए लगभग पचास मातृभाषा शिक्षकों को अतिथियों द्वारा हिंदी भूषण सम्मान प्रदान किया गया। सम्मान में अंगवस्त्र प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न देकर प्रदान किया गया। समारोह को जैन इण्टर कॉलेज के प्रबंधक दिनेश जैन सेठी और दीक्षित ग्रुप ऑफ़ कॉलेजेज के प्रबंध निदेशक इंजी विवेक दीक्षित,ममता सक्सेना और कवि शिवकुमार चंदन ने संबोधित करते हुए कहा सभी भाषाओं का ज्ञान तो आवश्यक है लेकिन अपनी मातृ भाषा को नहीं भूलना चाहिए।अपनी पीढ़ी को संस्कारित करने के लिए अपनी भाषा को प्रयोग में लाना आवश्यक है।अध्यक्षता कर रहे परिषद के जिलाध्यक्ष डॉ मुनीश चंद्र शर्मा ने कहा कि विश्व हिंदी दिवस मनाने का उद्देश्य हिंदी भाषा के वैश्विक महत्व को समझाना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना है।हिंदी केवल एक भाषा ही नहीं बल्कि हमारी संस्कृति, सभ्यता और आत्मा की अभिव्यक्ति है।मैंने हिंदीमय जीवन जिया है इसके महत्वपूर्ण को जाना है और मन से स्वीकार किया है।हिंदी मेरी माँ है और मैं इसका पुत्र हूँ।यह भाव हर भारतीय के हृदय में होना चाहिए। संचालन कर रहे डॉ अरविंद गौतम ने वर्तमान समय में हिंदी भाषा की आवश्यकता और अनिवार्यता पर प्रकाश डाला।मदर इंडिया कॉलेज के प्रबंधक राजेश शर्मा ने सभी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।


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