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गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर शाहजहांपुर के रेस्टोरेंट में फायरिंग

लोधीपुर में अराजक तत्वों ने गाली-गलौज के बाद चलाई गोली, गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सुरक्षा पर उठे सवाल। पुलिस जांच में जुटी।

शाहजहांपुर वाईबीएन संवाददाता। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। अभी देश गणतंत्र दिवस के जश्न की तैयारियों में डूबा ही था कि शनिवार शाम रोजा थाना क्षेत्र के लोधीपुर में गोलियों की तड़तड़ाहट से इलाका दहल उठा। लोधीपुर स्थित Q-CUP रेस्टोरेंट में शाम लगभग 07:39 बजे कुछ अराजक तत्वों ने सरेआम गुंडागर्दी की सारी हदें पार कर दीं।

चश्मदीदों के मुताबिक, रेस्टोरेंट में घुसे कुछ युवकों ने पहले गाली-गलौज शुरू की और विरोध करने पर तमंचा निकालकर फायरिंग झोंक दी। गोली चलने की आवाज सुनते ही रेस्टोरेंट में मौजूद ग्राहकों और स्टाफ के बीच भगदड़ मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए मेजों के नीचे और किचन की ओर भागे। रेस्टोरेंट मालिक शुभम गुप्ता ने तत्काल इस जानलेवा हमले की सूचना रोजा थाना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा, लेकिन तब तक आरोपी फरार हो चुके थे। पुलिस अब रेस्टोरेंट में लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाल रही है ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके।

वर्जन :

लोदीपुर स्थित रेस्टोरेंट में कुछ लोग शराब पीकर पहुंचे और वहां होटल स्वामी से नोक झोंक हुई। इस दौरान गोली भी चली है। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस बल को भेजा गया। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच की जा रही है, तहरीर मिलने पर प्राथमिकी भी दर्ज की जाएगी। फायरिंग करने वाले लोग स्थानीय हैं।

राजीव कुमार, प्रभारी निरीक्षक थाना रोजा


साइड स्टोरी: "क्या यही है आजादी? जब हाथों में किताब की जगह सरेआम तमंचा है"

एक तरफ पूरा देश 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर तिरंगे के रंग में रंगा है, वहीं दूसरी ओर शाहजहांपुर की सड़कों और रेस्टोरेंट्स में घूमते ये "तमंचाधारी युवा" हमारी आजादी और सुरक्षा की परिभाषा पर कालिख पोत रहे हैं।

कानून का खौफ खत्म: यह घटना केवल एक फायरिंग नहीं, बल्कि पुलिस के इकबाल को चुनौती है। जिस समय पूरे जिले में 'हाई अलर्ट' होना चाहिए, उस समय अराजक तत्व रेस्टोरेंट के भीतर घुसकर गोलियां चला रहे हैं। क्या आजादी का मतलब खुलेआम तमंचा लेकर घूमना और किसी की जान जोखिम में डालना है?

दहशत में शहरवासी: लोधीपुर जैसी प्राइम लोकेशन पर इस वारदात ने आम नागरिकों के मन में डर पैदा कर दिया है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या अब परिवार के साथ बाहर खाना खाना भी सुरक्षित नहीं रहा? सोशल मीडिया पर वीडियो और रील बनाने के चक्कर में युवा जिस तरह हथियारों को अपनी 'शान' समझ रहे हैं, वह समाज के लिए एक कैंसर बन चुका है। प्रशासन को चाहिए कि गणतंत्र दिवस के इस अवसर पर केवल झंडा फहराने तक सीमित न रहे, बल्कि इन "जेब कतरे और तमंचा छाप" गुंडों से शहर को वास्तविक आजादी दिलाए।



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