271 शिक्षकों के समायोजन पर भड़के संगठन, 19 जनवरी से आंदोलन का एलान
- संयुक्त शिक्षक संघर्ष समिति गठित, बीएसए समेत अधिकारियों पर अनियमितताओं के आरोप

शाहजहांपुर, यंग भारत न्यूज। जनपद के परिषदीय विद्यालयों में 271 शिक्षक-शिक्षिकाओं के कथित अनियमित समायोजन को लेकर शिक्षक संगठनों में भारी रोष व्याप्त है। सभी प्रमुख शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर संयुक्त शिक्षक संघर्ष समिति का गठन किया है और 19 जनवरी से चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है।
रोटीगोदाम स्थित परिषदीय विद्यालय परिसर में आयोजित संयुक्त बैठक में संगठनों ने आरोप लगाया कि समायोजन प्रक्रिया में शासनादेशों और विभागीय निर्देशों की अनदेखी की गई। महिला शिक्षिकाओं, सेवानिवृत्ति के नजदीक पहुंचे शिक्षकों, दिव्यांग एवं गंभीर रोगों से पीड़ित शिक्षकों को 60 से 70 किलोमीटर दूर विद्यालयों में भेजकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया है।
संयुक्त शिक्षक संघर्ष समिति ने निर्णय लिया कि 19 जनवरी (सोमवार) को प्रातः 11 बजे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद 20 जनवरी (मंगलवार) को प्रातः 11 बजे खिरनीबाग रामलीला मैदान में जनपद स्तरीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष मुनीश मिश्र ने कहा कि समायोजन में न तो वरिष्ठता का पालन किया गया और न ही महिला व गंभीर बीमार शिक्षकों की परिस्थितियों को ध्यान में रखा गया।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि अनियमित समायोजन के चलते कई विद्यालय बंद या एकल अध्यापक वाले हो गए हैं, जबकि कुछ शिक्षकों को बिना आधार संरक्षण दिया गया।
यूनाइटेड शिक्षक यूनियन के जिला महामंत्री हरिशंकर ने आरोप लगाया कि न तो वरिष्ठता सूची जारी की गई और न ही रिक्त पदों की जानकारी सार्वजनिक की गई।
बेसिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राजकमल आर्य ने कहा कि पुरुष शिक्षकों को नजदीकी विद्यालयों में और महिला शिक्षिकाओं को दूरस्थ क्षेत्रों में भेजा गया, जो भेदभावपूर्ण है।
271 शिक्षकों के समायोजन पर भड़के संगठन, 19 जनवरी से आंदोलन का एलान
- संयुक्त शिक्षक संघर्ष समिति गठित, बीएसए समेत अधिकारियों पर अनियमितताओं के आरोप
कौमी एकता शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष नफीस अहमद ने कहा कि समायोजन का उद्देश्य विद्यालयों को सुदृढ़ करना नहीं, बल्कि शिक्षकों का उत्पीड़न प्रतीत होता है।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला महामंत्री अंकुर त्रिपाठी ने मांग की कि समायोजन को तत्काल निरस्त कर नियमावली, सरप्लस शिक्षकों तथा एकल अध्यापक विद्यालयों की सूची सार्वजनिक की जाए।
बैठक में विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहें।


