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दांत शरीर का दर्पण व पांचन तंत्र में सहायक, इनकी देखरेख बेहद जरूरी

सेना के अनुशासन से लेकर आनंद डेंटल क्लीनिक तक 33 साल की सेवा, अनुशासन और मुस्कान की कहानी, कैप्टन डॉ. एवी सिंह की जुबानी

शाहजहांपुर, वाईबीएन संवाददाताः शाहजहांपुर में दंत चिकित्सा को नई पहचान देने वाले डेंटिस्ट कैप्टन डॉ. आनंद विजय सिंह (ए.वी. सिंह) का सफर केवल एक डॉक्टर की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, समयबद्धता, तकनीकी बदलाव और सेवा भाव की जीवंत मिसाल है।





सेना में कैप्टन के रूप में अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाले डॉ. सिंह ने स्वास्थ्य विभाग में दायित्व निभाने के बाद वीआरएस लेकर “आनंद डेंटल क्लीनिक” की स्थापना की। आज यह क्लीनिक शाहजहांपुर और आसपास के जनपदों के लिए आधुनिक, भरोसेमंद और संवेदनशील दंत चिकित्सा का केंद्र बन चुका है।

प्रश्न : सेना और स्वास्थ्य विभाग का अनुभव आपकी पहचान कैसे बना?

उत्तर : सेना ने मुझे अनुशासन, समय पालन और जिम्मेदारी सिखाई। वहां एक मिनट की भी कीमत होती है। जब मैंने स्वास्थ्य विभाग में दायित्व संभाला, तो वही संस्कार मेरी पहचान बने। मरीज का समय, उसकी पीड़ा और उसके भरोसे का सम्मान करना मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता रही है।

प्रश्न : वीआरएस के बाद निजी क्लीनिक शुरू करने का निर्णय क्यों लिया?

उत्तर : वीआरएस के बाद लगा कि अब सेवा को और व्यक्तिगत, मानवीय और आधुनिक तरीके से आगे बढ़ाया जाए। इसी सोच से आनंद डेंटल क्लीनिक की शुरुआत की, ताकि आम आदमी को बड़े शहरों जैसी दंत चिकित्सा अपने जिले में ही मिल सके।

प्रश्न : नई पीढ़ी इस मिशन को कैसे आगे बढ़ा रही है?

उत्तर : मेरे बेटे डॉ. हर्ष विजय सिंह का सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में चयन हुआ था, लेकिन उन्होंने स्वयं बीडीएस को चुना उन्होंने देश के प्रतिष्ठित मौलाना आज़ाद डेंटल कॉलेज से बीडीएस और यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज से एमडीएस किया। कुछ समय दिल्ली में सेवा के बाद अब शाहजहांपुर लौटकर यहां के लोगों को आधुनिक उपचार दे रहे हैं।

डॉ. समृद्धि माहेश्वरी सिंह : नई सोच, नई तकनीक की पहचान





इस चिकित्सकीय यात्रा को और मजबूती देती हैं डॉ. समृद्धि माहेश्वरी सिंह, जो परिवार की बहू होने के साथ-साथ मैक्सिलोफेशियल डेंटल सर्जन हैं। डॉ. समृद्धि कहती हैं “दंत चिकित्सा आज केवल दर्द दूर करने तक सीमित नहीं है। यह चेहरे की बनावट, आत्मविश्वास और जीवन-गुणवत्ता से जुड़ी है। हम चाहते हैं कि मरीज इलाज के बाद केवल स्वस्थ ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास से भरी मुस्कान के साथ बाहर जाए।

डॉ. समृद्धि आधुनिक सर्जिकल तकनीक, जबड़े की जटिल सर्जरी, इंप्लांट आधारित उपचार में विशेष दक्षता रखती हैं।

“जहां आनंद है, वहां हर्ष है…”

डॉ. एवी सिंह मुस्कराते हुए कहते हैं— “जहां आनंद है, वहां हर्ष है,जहां हर्ष है, वहीं समृद्धि है, और जहां समृद्धि है, वहीं खुशहाली है।”

यही कारण है कि आनंद डेंटल क्लीनिक में कराहते हुए आने वाला मरीज, मुस्कराते हुए विदा होता है।

प्रश्न : 33 वर्षों में दंत चिकित्सा में क्या बदलाव आया?

उत्तर : मैंने हैंगिंग मशीन और फुट इंजन से भी काम किया है। आज इलेक्ट्रिक यूनिट, लेजर, डिजिटल एक्स-रे और एडवांस्ड तकनीक उपलब्ध है। इन 33 वर्षों में तकनीक ही नहीं, मरीजों की जागरूकता भी बदली है। अब लोग दांतों को केवल दर्द से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और सुंदरता से जोड़कर देखते हैं।

प्रश्न : आनंद डेंटल क्लीनिक की प्रमुख विशेषताएं?

उत्तर : यहां हर प्रकार की आधुनिक दंत चिकित्सा उपलब्ध है, टेढ़े-मेढ़े दांतों का उपचार, पायरिया, रूट कैनाल ट्रीटमेंट (RCT), कॉस्मेटिक डेंटिस्ट्री, बच्चों की दंत चिकित्सा (पीडियाट्रिक) मेरे बेटे कॉस्मेटिक और पीडियाट्रिक डेंटल सर्जन हैं, जबकि बहू जटिल सर्जिकल मामलों की विशेषज्ञ हैं।

प्रश्न : शाहजहांपुर को ही क्यों चुना?

उत्तर : मेरा सपना था कि शाहजहांपुर और आसपास के लोगों को इलाज के लिए लखनऊ या दिल्ली न जाना पड़े। यहां भी वही गुणवत्ता, वही तकनीक और वही संवेदनशीलता मिलनी चाहिए।

प्रश्न : दांतों को आप “चेहरे का दर्पण” क्यों कहते हैं?

उत्तर : दांत चेहरे का दर्पण हैं। स्माइल हमारी पर्सनैलिटी की पहचान है। ओरल कैविटी से ही भोजन शरीर में जाता है। अगर दांत स्वस्थ होंगे तो भोजन अच्छे से चबाया जाएगा और पाचन तंत्र पर कम दबाव पड़ेगा।

आम लोगों के लिए डॉ. एवी सिंह की जरूरी सलाह




- दिन में दो बार ब्रश अवश्य करें

- रात में मिठाई खाने के बाद ब्रश जरूर करें

- 32 दांतों का अर्थ है भोजन को कम से कम 32 बार चबाना

- स्वस्थ दांत से स्वस्थ शरीर और मन प्रसन्नचित रहता है। इसलिए दांतों के स्वास्थ्य के प्रति भी सतर्क व जागरूक रहे।



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