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चाइनीज मांझे के खिलाफ सलमान का जल-धरना, 6 घंटे नदी में बैठे

अवैध बिक्री पर रोक की मांग को लेकर समाजसेवी ने जान जोखिम में डाली, हालत बिगड़ने पर पुलिस ने आश्वासन देकर बाहर निकाला

शाहजहांपुर, वाईबीएन संवाददाता : जब ज्ञापन बेअसर हो जाएं, जब आवाज़ बार-बार दबा दी जाए और जब मौतें भी सिस्टम को न झकझोर सकें --- तब इंसान मजबूरी में अपनी जान को दांव पर लगाता है। शाहजहांपुर में समाजसेवी नवी सलमान खान ने कुछ ऐसा ही किया। उन्होंने चाइनीज मांझे के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए खन्नौत नदी की ठंडी, गहरी धार में उतरकर जल-धरना शुरू कर दिया।

छह घंटे, एक इंसान और ठंडा पानी


शुक्रवार को सलमान महानगर के पूरब में बह रही खन्नौत नदी के पुल के नीचे लगातार छह घंटे तक पानी में बैठे रहे। ठंड से शरीर कांपता रहा, होंठ नीले पड़ने लगे, लेकिन उनकी आंखों में एक ही सवाल था--- “जब लोग मर रहे हैं, तब प्रशासन क्यों खामोश है?” आखिरकार प्रशासन की संवेदना जागी। रोजा थाना प्रभारी राजीव कुमार पहुंचे और सलमान को नदी से निकाला, कार्रवाई के लिए ज्ञापन भी लिया।

मौत के बाद भी नहीं रुका चाइनीज मांझा





सलमान का कहना है कि चाइनीज मांझा अब सिर्फ पतंग उड़ाने का साधन नहीं रहा, बल्कि मौत का फंदा बन चुका है। अब तक एक पुलिसकर्मी समेत कई निर्दोष लोग इसकी चपेट में आकर जान गंवा चुके हैं, कई जिंदगी भर का दर्द झेलने को मजबूर हैं। इसके बावजूद बाजारों में यह जानलेवा मांझा खुलेआम बिक रहा है।

धरना नहीं, सिस्टम के खिलाफ सवाल था

नवी सलमान पिछले कई दिनों से डीएम कार्यालय के बाहर धरना दे रहे थे। बार-बार ज्ञापन सौंपे गए, चेतावनियां दी गईं, लेकिन कार्रवाई शून्य रही। इसी पीड़ा ने उन्हें यह कहने पर मजबूर कर दिया--- “अगर मेरी जान की कीमत पर भी सिस्टम जागे, तो यह सौदा मंजूर है।”

जब हालत बिगड़ी, तब हरकत में आया प्रशासन





लंबे समय तक ठंडे पानी में बैठे रहने से सलमान की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर पहुंचे रोजा थाना प्रभारी राजीव कुमार ने उन्हें बाहर निकाला, ढांढस बंधाया और कार्रवाई का आश्वासन देते हुए ज्ञापन स्वीकार किया।

जनता का सवाल—कितनी और जानें जाएंगी?

घटना स्थल पर जुटे लोगों का गुस्सा साफ नजर आया। हर जुबान पर एक ही सवाल था--- “क्या किसी और की मौत के बाद ही प्रशासन जागेगा?”

लोगों ने चाइनीज मांझे पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध और दोषियों पर रासुका जैसी सख्त कार्रवाई की मांग की।

एक आदमी, एक आवाज़, पूरा समाज

सलमान का यह जल-धरना सिर्फ विरोध नहीं था, यह उन मासूम जिंदगियों की चीख थी जो चाइनीज मांझे की भेंट चढ़ गईं। सवाल अब भी वही है---

क्या यह संघर्ष, मानवीय संवेदना को झकझोकरने वाला यह कृत्य व राहगीरों की चाइनीज मांझा से कुर्बानी रंग लाएगी या अगली खबर फिर किसी मौत की होगी?




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