मां सलाखों के पीछे, पिता की हत्या… चार मासूम हुए बेसहारा
- पुवायां की खौफनाक वारदात के बाद बुजुर्ग दादी और चार नन्हे बच्चों पर टूटा दुखों का पहाड़
शाहजहांपुर, वाईबीएन संवाददाताः पुवायां थाना क्षेत्र में हुई दिल दहला देने वाली हत्या की वारदात ने केवल एक युवक की जान ही नहीं ली, बल्कि चार मासूम बच्चों से उनका पूरा बचपन, सुरक्षा और सहारा छीन लिया। पिता की बेरहमी से हत्या और मां के जेल जाने के बाद यह परिवार एक झटके में उजड़ गया।
पिता की हत्या, मां जेल में—एक झटके में उजड़ा परिवार
मुख्य मामले में आरोप है कि बलराम की पत्नी ने अपने प्रेमी व उसके साथियों के साथ मिलकर पति की गला रेतकर हत्या कर दी। घटना बच्चों के सामने हुई। हत्या के बाद मां जेल पहुंच गई और पिता की अर्थी उठ गई। अब पीछे रह गए चार मासूम, जिनके सिर से दोनों साए छिन चुके हैं।
सदमे में बुजुर्ग दादी, खुद सहारे की मोहताज
बलराम की मौत के बाद उसकी बुजुर्ग मां गहरे सदमे में हैं। वही मां, जिनके कंधों पर कभी परिवार की जिम्मेदारी थी, अब खुद चलने-बोलने में असहाय नजर आती हैं। बेटे की मौत और बहू की गिरफ्तारी ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया है।
चार मासूम, जो बार-बार पूछ रहे—“पापा कहां गए?”
घर में अब केवल सन्नाटा है और चार बच्चे कांति (7), पवन (5), परि (3) और छोटू (2)। ये बच्चे बार-बार अपने पिता को पुकार रहे हैं। उन्हें यह समझ ही नहीं आ रहा कि जिन हाथों ने उन्हें गोद में उठाया, वे हाथ अब कभी लौटकर नहीं आएंगे।
गांव की महिलाएं संभाल रहीं बच्चे, आंखों में डर और भूख
गांव की महिलाएं बच्चों को संभालने की कोशिश कर रही हैं। कोई दूध पिला रहा है, कोई गोद में लेकर चुप कराने का प्रयास कर रहा है। बच्चों की आंखों में डर, भूख और अनकहे सवाल साफ दिखाई दे रहे हैं—
“मां कब आएगी? पापा कब लौटेंगे?”
लेकिन किसी के पास कोई जवाब नहीं।
बलराम ही था एकमात्र कमाने वाला सहारा
ग्रामीणों के अनुसार, बलराम ही परिवार का इकलौता सहारा था। मजदूरी कर वह किसी तरह घर चला रहा था। अब न तो कमाने वाला बचा है और न ही बच्चों के भविष्य की कोई स्पष्ट राह दिखाई दे रही है।
गांव स्तब्ध, मदद के हाथ बढ़े लेकिन भविष्य अनिश्चित
इस घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है। लोग अपनी ओर से मदद के लिए आगे आ रहे हैं, लेकिन सवाल यही है कि
इन चार मासूमों की पढ़ाई, परवरिश और भविष्य की जिम्मेदारी आखिर कौन उठाएगा?
एक सवाल, जो पूरे समाज से है
यह वारदात सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़ा एक कठोर सवाल है—
जब माता-पिता ही बच्चों की दुनिया उजाड़ दें, तो उन मासूमों को कौन संभाले?







