42 करोड़ का सर्वोदय आश्रम पद्धति विद्यालय अधर में, निर्माण सुस्त
कांट विकास खंड के जयप्रकाश नारायण सर्वोदय आश्रम पद्धति विद्यालय से बड़ी उम्मीदें, समय पर बजट न मिला तो मेडिकल कॉलेज जैसा हश्र होने की आशंका
शाहजहांपुर, वाईबीएन संवाददाताः शाहजहांपुर जनपद के कांट विकास खंड अंतर्गत गांव सिकरोही में निर्माणाधीन जयप्रकाश नारायण सर्वोदय आश्रम पद्धति विद्यालय को क्षेत्र के लिए शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी सौगात माना जा रहा है। करीब 42 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस विद्यालय का शिलान्यास अक्टूबर 2024 में किया गया था। योजना के तहत यह एक पूर्णतः आवासीय और निःशुल्क विद्यालय होगा, जिसमें कक्षा 1 से 12 तक के बच्चों को पढ़ाई, रहने, खाने और अन्य आवश्यक सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध कराई जाएंगी, लेकिन निर्माण की गति अत्यंत धीमी है।
ग्रामीण बच्चों के लिए बड़ा अवसर
यह आश्रम पद्धति विद्यालय खासतौर पर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए तैयार किया जा रहा है। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि यह विद्यालय उन बच्चों के लिए वरदान साबित होगा, जो संसाधनों के अभाव में अच्छी शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। आवासीय सुविधा होने के कारण बच्चों को दूर-दराज के स्कूलों में नहीं जाना पड़ेगा और पढ़ाई में निरंतरता बनी रहेगी।
निर्माण की वर्तमान स्थिति
यंग भारत न्यूज की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार विद्यालय का निर्माण कार्य चल तो रहा है, लेकिन उसकी रफ्तार अपेक्षा से धीमी नजर आ रही है। कुछ भवनों का ढांचा खड़ा हो चुका है, जबकि कई हिस्सों में काम अभी प्रारंभिक स्तर पर है। स्थानीय लोग और अभिभावक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कहीं यह परियोजना भी अधूरी योजनाओं की सूची में शामिल न हो जाए।
मेडिकल कॉलेज से जुड़ी चिंता
ग्रामीणों की चिंता यूं ही नहीं है। वे जिले के मेडिकल कॉलेज का उदाहरण देते हैं, जहां बजट की कमी के कारण 100 बेड का भवन छह वर्षों से अधूरा पड़ा है। इसी तरह वहां का क्रिटिकल केयर यूनिट भी समय पर पूरा नहीं हो सका। लोगों को आशंका है कि यदि आश्रम पद्धति विद्यालय को समय पर बजट और प्रशासनिक प्राथमिकता नहीं मिली, तो इसका हाल भी वैसा ही हो सकता है।
बजट और प्रशासन की भूमिका
विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि किसी भी बड़ी जनकल्याणकारी योजना की सफलता निरंतर बजट आवंटन और सख्त निगरानी पर निर्भर करती है। यदि निर्माण कार्य को समय-समय पर धनराशि मिलती रही और गुणवत्ता पर ध्यान दिया गया, तो यह विद्यालय तय समय में पूरा किया जा सकता है। प्रशासनिक स्तर पर नियमित समीक्षा की भी जरूरत महसूस की जा रही है।
क्षेत्रीय विकास की उम्मीद
सिकरोही में बनने वाला यह विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास का भी माध्यम बन सकता है। विद्यालय के संचालन से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आसपास के गांवों में शिक्षा के प्रति जागरूकता आएगी। इससे बालिका शिक्षा को भी मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
जनता की अपेक्षा और भविष्य
क्षेत्रवासियों की मांग है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। यदि सब कुछ योजना के अनुसार चला, तो इसी वर्ष शाहजहांपुर को यह आश्रम पद्धति विद्यालय मिल सकता है। अब निगाहें शासन और प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस जनउपयोगी परियोजना को समय पर पूरा कर जनता की उम्मीदों पर खरा उतरते हैं या नहीं।







