शहीद दिवस पर संविधान कथा के जरिए युवाओं को दिखाई नई राह
- RLD पब्लिक स्कूल एवं उद्देश्यिका डिजीस्कूल की संयुक्त पहल, गांधी विचारों से विद्यार्थियों में संवैधानिक चेतना का संचार
शाहजहांपुर, वाईबीएन संवाददाताः शहीद दिवस यानी बलिदान दिवस पर के अवसर पर RLD पब्लिक स्कूल में उद्देश्यिका डिजीस्कूल के संयुक्त तत्वावधान में “संविधान कथा” का अनूठा आयोजन किया गया। जनपद के पहले व जरा हटके इस कार्यक्रम के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानियों को सच्ची श्रद्धांजलि के अर्पित करने के साथ विद्यार्थियों को भारतीय संविधान, नागरिक कर्तव्यों और लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ने की सराहनीय व अनुकरणीय पहल की गई। यह आयोजन बलिदानियों के स्मरण मात्र के लिए नहीं बल्कि भावी पीढ़ी को सही दिशा देने की एक सार्थक पहल के रूप में सामने आया है।
बलिदानियों को श्रद्धांजलि से कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ श्रवण कुमार दीक्षित ने महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण के साथ किया। इस दौरान स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों के सम्मान में दो मिनट का मौन रखा गया। उपस्थित विद्यार्थियों और शिक्षकों ने शहीदों के बलिदान को नमन करते हुए उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी समेत महापुरुषों के बलिदान का स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।
गांधी विचारों से कर्तव्य और अधिकार का संदेश
छावनी परिषद के नामित सदस्य अवधेश दीक्षित ने कार्यक्रम में महात्मा गांधी के विचारों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। उन्होने गांधी जी के इस कथन को उद्धृत किया कि “अधिकार तभी सुरक्षित रह सकते हैं, जब कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन किया जाए।” विद्यार्थियों को यह समझाया गया कि संविधान केवल अधिकारों की सूची नहीं, बल्कि नागरिकों के लिए कर्तव्यों का नैतिक दस्तावेज भी है।
संविधान कथा के माध्यम से सरल प्रस्तुति
उद्देश्यिका डिजीस्कूल की टीम की ओर से संविधान कथा का क्रमबद्ध, सरल एवं प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण किया गया। कथा के माध्यम से भारतीय संविधान की प्रस्तावना, मौलिक अधिकार, मौलिक कर्तव्य तथा लोकतंत्र की मूल भावना को विद्यार्थियों के समक्ष सहज भाषा में प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि स्वतंत्र भारत की नींव संविधान के नैतिक मूल्यों—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व—पर आधारित है।
शहीदों का सपना: न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज
संविधान कथा के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों का संघर्ष केवल राजनीतिक आज़ादी तक सीमित नहीं था। उनका सपना एक ऐसे समाज का निर्माण था, जहां हर नागरिक को न्याय मिले, समान अवसर हों और सभी जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। इस संदर्भ में गांधी जी का कथन प्रस्तुत किया गया—“सच्ची स्वतंत्रता आत्मसंयम और कर्तव्यबोध के बिना संभव नहीं है।”
धर्म से ऊपर संविधान का संदेश
कार्यक्रम में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि वर्तमान समय में युवाओं को धर्म, जाति और संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर संविधान को समझने की आवश्यकता है। वक्ताओं ने कहा कि संविधान पढ़ने और समझने से युवाओं के अधिकार सुरक्षित होते हैं और वे भटकाव से बचते हैं। यह पहल धर्म में उलझे युवाओं के लिए एक नई, सकारात्मक और राष्ट्रहितकारी राह दिखाने का कार्य करती है।
प्रबंधन और शिक्षकों की प्रतिक्रिया
RLD पब्लिक स्कूल के प्रबंधन एवं शिक्षकों ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ संवैधानिक और नैतिक शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। उद्देश्यिका डिजीस्कूल द्वारा प्रस्तुत संविधान कथा ने विद्यार्थियों में सोचने, प्रश्न करने और जिम्मेदार नागरिक बनने की चेतना विकसित की है। गांधी जी के विचार—“शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण है”—को इस अवसर पर विशेष रूप से दोहराया गया।
विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। उन्होंने संविधान से जुड़े प्रश्न पूछे और अपने विचार साझा किए। विद्यार्थियों को यह प्रेरणा दी गई कि सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से होती है। इस अवसर पर महात्मा गांधी का सुप्रसिद्ध कथन—“जो परिवर्तन आप संसार में देखना चाहते हैं, वह पहले स्वयं में लाइए”—को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
संविधान को व्यवहारिक जीवन से जोड़ने का संकल्प
इस दौरान बताया गया कि संविधान कथा का मुख्य उद्देश्य संविधान को पुस्तकों तक सीमित न रखकर उसे व्यवहारिक जीवन से जोड़ना है। जब विद्यार्थी अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी पालन करते हैं, तभी शहीदों के बलिदान को वास्तविक अर्थों में श्रद्धांजलि अर्पित होती है।
कार्यक्रम के समापन पर कजरी नूरपुर के शिक्षक सुमित कुमार, कलान के शिक्षक आकाश पांडेय, पवन कुमार, हर्ष वर्धन यादव, वासिर अली,RLD पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य सौरभ सक्सेना, रमाकांत आदि विद्यार्थियों, शिक्षकों और आयोजकों ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि वे संविधान के मार्ग पर चलकर शहीदों के सपनों के भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देंगे। शहीद दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी को राष्ट्र और संविधान से जोड़ने वाली एक प्रेरणादायी पहल के रूप में यादगार बन गया।








