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शाहजहांपुर में सायरन बजते ही युद्ध जैसे हालात, ब्लैकआउट मॉकड्रिल

कलेक्ट्रेट परिसर में आधे घंटे तक अफरा-तफरी, आग-घायल-रेस्क्यू के दृश्य; प्रशासनिक तैयारी ने सभी को चौंकाया

शाहजहांपुर, वाईबीएन संवाददाताः शुक्रवार सायं ठीक 6 बजे जैसे ही खतरे का वेलिंग टोन सायरन गूंजा, कलेक्ट्रेट परिसर अचानक युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया। रोशनी गुल हो गई, चारों ओर अंधेरा छा गया और माहौल ऐसा बन गया मानो दुश्मन का हमला हो चुका हो।

चीख-पुकार और कोड बर्ड में गूंजती आवाज़ें

अंधेरे के बीच अचानक “विंग कमांडर… हेल्प… सेक्टर क्लियर नहीं” जैसे कोड बर्ड में अधिकारियों की आवाज़ें सुनाई देने लगीं। रेडियो सेट और वायरलेस पर लगातार संदेश चलने लगे। कुछ ही पलों में चीख-पुकार शुरू हो गई और लोग इधर-उधर दौड़ते नजर आए।

आग लगी… दौड़े अग्निशमन दल





इसी बीच कलेक्ट्रेट परिसर में आग लगने की सूचना दी गई। देखते ही देखते अग्निशमन दल मौके पर पहुंचा। अंधेरे में पानी की बौछारों और फायर टेंडर की आवाज़ों ने हालात को और भी वास्तविक बना दिया। लोग यह समझ ही नहीं पाए कि यह अभ्यास है या सचमुच आपदा।

घायल पड़े लोग, एंबुलेंस ने संभाला मोर्चा

अभ्यास के दौरान कुछ लोग जमीन पर पड़े दिखाई दिए। उन्हें घायल मानते हुए स्वास्थ्य कर्मियों ने तत्काल फर्स्ट एड दिया और एंबुलेंस से उपचार के लिए ले जाया गया। स्ट्रेचर, टॉर्च और मेडिकल किट के बीच दृश्य पूरी तरह युद्धकालीन लग रहा था।

आधे घंटे तक अफरा-तफरी, कई लोगों की अटकी सांसें





करीब आधे घंटे तक चला यह मॉकड्रिल अभ्यास इतना वास्तविक था कि कई दर्शकों की सांसें अटक गईं। अफरा-तफरी, अंधेरा, सायरन, दौड़ते लोग और राहत दल—हर दृश्य मानो किसी युद्ध फिल्म का सजीव दृश्य बन गया हो।

स्वयंसेवकों और वार्डनों ने संभाली कमान

नागरिक सुरक्षा के वार्डनों और स्वयंसेवकों ने गलियों और सड़कों पर गश्त कर लोगों को घर के भीतर रहने और लाइट बंद रखने के निर्देश दिए। सड़कों पर चल रहे वाहनों की हेडलाइट्स भी बंद कराई गईं, जिससे वास्तविक युद्धकालीन अनुशासन का पालन हुआ।

डीएम का वर्ज़न: “ब्लैकआउट सिर्फ लाइट बंद करना नहीं”





सामाजिक सरोकारो के प्रति सक्रिय रहने वाले जिलाधिकारी एवं नियंत्रक नागरिक सुरक्षा धर्मेंद्र प्रताप सिंह भी पूरे समय मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने कहा “ब्लैकआउट मॉकड्रिल का उद्देश्य केवल बिजली बंद करना नहीं, बल्कि शत्रु विमानों या मिसाइलों के लिए लक्ष्य पहचान को असंभव बनाना है। आज के अभ्यास में सायरन सिस्टम, संचार व्यवस्था और रिस्पॉन्स टाइम अत्यंत संतोषजनक रहा।” उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध शहरों तक सीमित हो चुका है, इसलिए नागरिकों की सजगता बेहद जरूरी है।

ऑल क्लियर सायरन के साथ लौटी राहत

सायं 6:30 बजे ऑल क्लियर (Steady Tone) सायरन बजा। बिजली बहाल हुई, अंधेरा छंटा और लोगों ने राहत की सांस ली। तब जाकर समझ आया कि यह सब एक अभ्यास था—लेकिन पूरी तरह वास्तविक।

प्रशासन बोला: अभ्यास जरूरी, लापरवाही खतरनाक

दैवीय आपदा प्रभारी व एडीएम वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार ने जनपदवासियों से अपील की कि भविष्य में होने वाली ऐसी मॉकड्रिल को गंभीरता से लें। आपात स्थिति में घबराने के बजाय निर्देशों का पालन ही सबसे बड़ा बचाव है।

माकड्रिल के समय ये अधिकारी रहे मौजूद


अपर जिलाधिकारी (वित्त) अरविंद कुमार, सीएमओ डॉ. विवेक मिश्रा, नगर मजिस्ट्रेट प्रवेंद्र कुमार, डीआईओएस हरिवंश कुमार, बीएसए दिव्या गुप्ता सहित पुलिस, एनसीसी, होमगार्ड, नेहरू युवा केंद्र, स्काउट-गाइड व नागरिक सुरक्षा के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।




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