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आठ माह में 150 करोड़ की फर्जी बिलिंग, 25 करोड़ की जीएसटी चोरी उजागर

- एसआइबी के डिप्टी कमिश्नर ने टीम के साथ ग्राम मरैना स्थित फर्म की जांच में पकडा मामला, दिल्ली समेत कई राज्यों से जुड़े बोगस नेटवर्क का राजफाश

आठ माह में 150 करोड़ की फर्जी बिलिंग,  25 करोड़ की जीएसटी चोरी उजागर
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शाहजहांपुर, वाईबीएन संवाददाता : बोगस फर्म से टैक्स चोरी का मामला थम नहीं रहा है। शनिवार को जनपद के ग्राम मरैना में एक बड़े फर्जी बिलिंग और बोगस आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) रैकेट का राजफाश हुआ है। जांच में बोगस फर्मों के संगठित रैकेट ने 150 करोड़ रुपये के फर्जी बिलों से लगभग 25 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी पकडी गई है।

राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा यानी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन ब्रांच (SIB) बरेली के डिप्टी कमिश्नर अनिरुद्ध सिंह के निर्देशन में कार्रवाई की गई। टीम में असिस्टेंट कमिश्नर वेद प्रकाश शुक्ला, विकास मिश्रा समेत सचल दल इकाई के कार्मिक शामिल रहे। शिकायत पर की गई जांच में कोई वास्तविक व्यापार नहीं पाया गया। केवल फर्जी बिल जारी कर आईटीसी का खेल किया गया ।

डाटा विश्लेषण में चौंकाने वाले खुलासे

जांच के दौरान किए गए डाटा विश्लेषण में सामने आया कि संबंधित फर्म ने अप्रैल 2025 में जीएसटी पंजीकरण प्राप्त किया था। इसके बाद मात्र 8 माह की अवधि में लखनऊ, एटा, हाथरस, दिल्ली और हरियाणा में संचालित बोगस फर्मों का एक संगठित रैकेट बनाते हुए करीब 150 करोड़ रुपये के फर्जी बिल दिल्ली की बोगस फर्मों को जारी किए गए।

इन फर्जी लेन-देन के माध्यम से लगभग 25 करोड़ रुपये की जीएसटी कर चोरी की गई है।

व्यापार स्थल पर नहीं मिला कोई वास्तविक कारोबार

उक्त तथ्यों के आधार पर जब फर्म के व्यापार स्थल की भौतिक जांच की गई, तो पाया गया कि वहां किसी भी प्रकार का वास्तविक व्यापार नहीं किया जा रहा था। न तो कोई स्टॉक मिला और न ही व्यापारिक गतिविधियों के प्रमाण।

फर्म के प्रोपराइटर सूरज पाल सिंह ने जांच के दौरान बयान दिया कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि उनके जीएसटी नंबर का उपयोग कर 150 करोड़ रुपये के फर्जी बिल जारी किए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि फर्म से संबंधित कार्य उनके बेटे और दामाद देखते हैं, जो वर्तमान में दिल्ली में रहते हैं।

100 करोड़ से अधिक की टैक्स चोरी पहले ही उजागर

जांच एजेंसियों के अनुसार, अब तक रैकेट से जुड़ी फर्मों की ओर से बोगस आईटीसी के फर्जी बिल जारी कर 100 करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी सामने आ चुकी है। मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे एवं गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है। डिप्टी कमिश्नर अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि संबंधित फर्मों के विरुद्ध कड़ी वैधानिक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।



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