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प्रधानाचार्य दें शैक्षिक नेतृत्व, शिक्षा इतर कार्यों से मिले मुक्ति

- उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद के मंडलीय सम्मेलन में बोले स्वामी चिन्मयानंद, डा केके शुक्ला को मंडलीय अध्यक्ष, डॉ. अमीर सिंह को जिलाध्यक्ष की कमान

शाहजहांपुर, वाईबीएन संवाददाता : जनपद के लिए यह उपलब्धि का क्षण रहा, जब उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद के मंडलीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी शाहजहांपुर को मिली। लंबे समय से जिलाध्यक्ष के रूप में संगठन का नेतृत्व कर रहे डॉ. के.के. शुक्ला को परिषद का मंडलीय अध्यक्ष चुना गया, जबकि उनकी पदोन्नति से रिक्त हुए जिलाध्यक्ष पद पर स्वामी धर्मानंद सरस्वती इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. अमीर सिंह को दायित्व सौंपा गया।

संगोष्ठी व सम्मेलन में हुई घोषणा

यह घोषणा एस.एस. विधि महाविद्यालय, मुमुक्षु आश्रम स्थित मूट कोर्ट में आयोजित “माध्यमिक शिक्षा के संवर्धन में प्रधानाचार्य की भूमिका” विषयक शैक्षिक संगोष्ठी एवं मंडलीय सम्मेलन के दौरान की गई। सम्मेलन की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद के संगठन मंत्री डॉ. एस.सी. रस्तोगी ने की।

मां सरस्वती के पूजन से शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।

मुख्य अतिथि मुमुक्षु शिक्षा संकुल के अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती एवं विशिष्ट अतिथि जिला विद्यालय निरीक्षक हरवंश कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर संगोष्ठी का उद्घाटन किया।

नवनिर्वाचित पदाधिकारियों का भव्य स्वागत

सम्मेलन में डॉ. के.के. शुक्ला के मंडलीय अध्यक्ष तथा डॉ. अमीर सिंह के जिलाध्यक्ष चुने जाने पर उपस्थित प्रधानाचार्यों ने करतल ध्वनि के साथ स्वागत किया और माल्यार्पण कर शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम में मंडल के चारों जनपदों से आए जिला अध्यक्षों एवं जिला मंत्रियों को अंगवस्त्र प्रदान कर एवं माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया, जिससे सम्मेलन का वातावरण गरिमामय बना रहा।

सेवानिवृत्त व नवनियुक्त प्रधानाचार्यों का अभिनंदन

इस दौरान जनपद के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सुरेश पाल सिंह, दिवाकर शर्मा एवं डॉ. दोदराम वर्मा को शाल ओढ़ाकर, माल्यार्पण कर एवं रामचरितमानस भेंट कर सम्मानित किया गया। वहीं नवनियुक्त प्रधानाचार्य धर्मेंद्र कुमार सिंह, देवकीनंदन, बृजपाल सिंह एवं अनिलेश सिंह को अंगवस्त्र प्रदान कर परिषद में स्वागत किया गया।

प्रधानाचार्य बनें शैक्षिक प्रेरक, बोले स्वामी चिन्मयानंद

मुख्य वक्ता स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने कहा कि प्रधानाचार्य विद्यालय के शैक्षिक नेतृत्वकर्ता होते हैं। उन्हें शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हेतु प्रेरित करना चाहिए। साथ ही उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि शिक्षकों को शिक्षा से इतर कार्यों—जैसे जनगणना, बीएलओ आदि में न लगाया जाए। इस दौरान विशिष्ट अतिथि जिला विद्यालय निरीक्षक हरवंश कुमार ने प्रधानाचार्यों को हरसंभव सहयोग और सम्मान देने का आश्वासन देते हुए विभागीय समन्वय को मजबूत करने की बात कही।

व्यय मदों का प्रशिक्षण जरूरी : डॉ. रस्तोगी

अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. एससी रस्तोगी ने कहा कि विद्यालयों में विभिन्न मदों में होने वाले व्यय को लेकर प्रधानाचार्यों को डीआईओएस स्तर से नियमित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, जिससे प्रशासनिक कार्य अधिक पारदर्शी बन सकें। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दोदराम वर्मा ने किया। डॉ. केके शुक्ला ने स्वागत भाषण दिया। डॉ. अमीर सिंह ने आभार जताया।

ये रहे प्रमुख उपस्थित

इस अवसर पर सूरजपाल, बंशीधर यादव, रमेश चंद्र, अवधेश सिंह, जगदीश प्रसाद मौर्य, धर्मेंद्र कुमार सिंह, अनिलेश सिंह, दिवाकर शर्मा, योगेश गंगवार, भूपेश कुमार श्रीवास्तव, फखरे आलम, योगेंद्र पाल सिंह, शाइस्ता नसीम, अनुपम मौर्य, श्रद्धा टंडन, मीनू शंखधर, अंजू सिंह सहित बड़ी संख्या में प्रधानाचार्य व शिक्षाविद् मौजूद रहे।


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