कड़ाके की सर्दी, शराब का नशा और एक डाककर्मी… मदद करें या छोड़ दें?
शाहजहांपुर में रामगंगा के कोलाघाट पर बेहोशी की हालत में मिला डाककर्मी, दो घंटै तक पडा रहा बेहोशी की हालत में
शाहजहांपुर, वाईबीएन संवाददाता : यह दृश्य है कोलाघाट पुल का। 3 जनवरी की रात करीब 9 बजे पुल की रेलिंग के पास एक व्यक्ति घायल अवस्था में फंसा था। पहली नजर में एक्सीडेंट लगा। गाड़ी निकलती जा रही थी लेकिन कोई रुका नहीं। रामनगरिया गंगा ढाईघाट से जब शाहजहांपुर वापसी के समय वाईबीएन टीम ने रोककर घायल की मदद की। पांच किमी के बाद उसके बेटे के सुपर्दे कर दिया और उसकी जान बच गई।
दरअसल तीन जनवरी पौष पूर्णिमा को यंग भारत की टीम श्रृंगी ऋषि की तपोस्थली ढाई घाट रामनगरिया कवरेज से लौट रही थी। रात पौने नौ बजे के लगभग कोलाघाट पुल की दायी रेलिंग पर एक व्यक्ति बेहोशी की हालत में रेलिंग में फंसा था। गनीमत यह रही कि उसके सिर पर हेलमेट था, अन्यथा चोट लगने से उसकी मृत्यु भी हो सकती थी। उसे हिलाने डुलाने पर शराब की तेज गंध आ रही थी, यानी वह शराब के नशे में था। होश में आने पर उसने अपना नाम राजेश व बेटे का मोबाइल नंबर व नाम बताया। फोन करने पर बेटे ने फोन उठाया। राजेश को याकूब चौराहा पर लाकर उसके बेटे के सुपुर्द कर दिया। राजेश के पास डाक विभाग का बड़ा बैग था, जिसमें चिट्ठियां, रजिस्ट्री और सरकारी सामग्री रखी थी।
सोचिए…
अगर उस रात वह यूं ही पुल पर पड़ा रहता?
कड़ाके की सर्दी में कोई अनहोनी हो जाती तो?
घर में इंतजार कर रहे बच्चे क्या सोचते?
शराब पीने से पहले एक बार यह जरूर सोचें—
आपके नशे की कीमत कोई मासूम चुका सकता है।
एक सवाल, क्या ऐसी हालत में शराबियों की मदद करनी चाहिए या नहीं?
अधिकांश लोग हां कहेंगे, उत्तर भी यही सही है, लेकिन शराबियों को सुधार के लिए सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। दरअसल उनके कारण पूरा परिवार परेशान होता है। आर्थिक व मानसिक कष्ट भी होता है।







