बिहार कांग्रेस पर दिल्ली की सख्त निगरानी, दल बदल की आशंकाओं के बीच राहुल गांधी–खरगे की क्लास, विधायकों का टेस्ट
दल बदल की अटकलों के बीच कांग्रेस हाईकमान अलर्ट। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने बिहार कांग्रेस विधायकों को दिल्ली बुलाया। बैठक से बिहार की राजनीति में बड़े फैसलों के संकेत।

स्टेट ब्यूरो, पटना. बिहार की राजनीति इन दिनों सिर्फ सत्ता और विपक्ष की लड़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि दलों के भीतर की बेचैनी भी खुलकर सामने आ रही है। खासतौर पर कांग्रेस को लेकर चल रही दल बदल की चर्चाओं ने दिल्ली दरबार की चिंता बढ़ा दी है। इसी राजनीतिक माहौल के बीच कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने बड़ा कदम उठाया है। बिहार कांग्रेस के सभी विधायक और वरिष्ठ नेता 23 जनवरी को दिल्ली बुलाए गए हैं, जहां पार्टी के भविष्य को लेकर अहम मंथन होना तय माना जा रहा है।
यह बैठक केवल औपचारिक संवाद नहीं है, बल्कि इसे बिहार कांग्रेस के लिए एक तरह का राजनीतिक आकलन और भरोसे की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। खुद राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे बैठक में मौजूद रहेंगे और विधायकों से सीधा संवाद करेंगे। पार्टी नेतृत्व साफ संकेत देना चाहता है कि बिहार में किसी भी तरह की अंदरूनी टूट या असंतोष को अब हल्के में नहीं लिया जाएगा।
पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा लगातार तेज होती जा रही है कि कांग्रेस के कुछ विधायक असहज महसूस कर रहे हैं और उनके दूसरे राजनीतिक दलों के संपर्क में होने की अटकलें लगाई जा रही हैं। इन चर्चाओं ने न सिर्फ कांग्रेस को, बल्कि पूरे बिहार के सियासी समीकरण को बेचैन कर दिया है। यही वजह है कि कांग्रेस हाईकमान ने बिना देरी किए सभी विधायकों को दिल्ली बुलाने का फैसला किया।
सूत्रों के अनुसार बैठक की शुरुआत विधायकों के फीडबैक से होगी। राहुल गांधी और खरगे यह जानने की कोशिश करेंगे कि असंतोष की जड़ें कहां हैं। क्या वजह संगठनात्मक ढांचे की कमजोरी है, क्या विधानसभा में कांग्रेस की भूमिका को लेकर भ्रम है या फिर नेतृत्व को लेकर भरोसे की कमी। इन तमाम सवालों पर खुलकर चर्चा होने की संभावना है।
इस बैठक का एक अहम पहलू बिहार विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता का चयन भी माना जा रहा है। लंबे समय से इस पद को लेकर स्पष्ट फैसला नहीं होने से पार्टी को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा है। विधायकों के बीच समन्वय की कमी और विधानसभा में प्रभावी रणनीति के अभाव को भी इसी से जोड़ा जा रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि दिल्ली बैठक के बाद इस मुद्दे पर ठोस निर्णय लिया जा सकता है।
इसके अलावा आगामी विधानसभा सत्र में कांग्रेस की भूमिका और रणनीति भी बैठक के एजेंडे में शामिल है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि बिहार विधानसभा में कांग्रेस सिर्फ औपचारिक विपक्ष न बने, बल्कि आक्रामक और मुद्दों पर केंद्रित राजनीति करे। इससे न सिर्फ विधायकों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को भी स्पष्ट संदेश जाएगा।
दिल्ली में बुलाई गई यह बैठक यह भी दिखाती है कि कांग्रेस के लिए बिहार अब केवल एक राज्य नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से अहम मोर्चा बन चुका है। लोकसभा और आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी किसी भी तरह की टूट या भ्रम की स्थिति को पहले ही खत्म करना चाहती है।
अब सबकी नजरें 23 जनवरी की इस बैठक के नतीजों पर टिकी हैं। क्या यह पहल दल बदल की चर्चाओं पर विराम लगाएगी या बिहार कांग्रेस को नई दिशा और नेतृत्व मिलेगा, यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा। लेकिन इतना तय है कि दिल्ली दरबार से बिहार के सियासी समीकरणों को लेकर बड़ा संदेश जरूर निकलने वाला है।


