राजद में नया सियासी शिफ्ट: तेजस्वी यादव बने राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, लालू यादव की मौजूदगी में संगठन को मिला नया नेतृत्व
पटना में हुई राजद राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में तेजस्वी यादव को नया राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया। लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी में सर्वसम्मति से हुए इस फैसले से पार्टी नेतृत्व में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

स्टेट ब्यूरो, पटना. पटना की राजनीति में एक अहम मोड़ उस समय देखने को मिला जब राष्ट्रीय जनता दल ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा फैसला लेते हुए तेजस्वी यादव को पार्टी का नया राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष घोषित कर दिया। यह फैसला पटना के एक प्रमुख होटल में आयोजित राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया, जहां पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और राज्यसभा सांसद मीसा भारती समेत लगभग सभी वरिष्ठ नेता मौजूद थे। बैठक का माहौल गंभीर था, लेकिन इसके केंद्र में भविष्य की रणनीति और नेतृत्व को लेकर स्पष्टता दिखाई दी।
बैठक के दौरान यह प्रस्ताव वरिष्ठ नेता भोला यादव ने रखा, जिसे लालू प्रसाद यादव के निर्देश पर कार्यसूची में शामिल किया गया था। प्रस्ताव पर चर्चा के बाद कार्यकारिणी के सदस्यों ने हाथ उठाकर सर्वसम्मति से समर्थन जताया। इसके बाद बिहार प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने औपचारिक रूप से तेजस्वी यादव के नाम की घोषणा की। पार्टी के इतिहास में यह पहला अवसर है जब अस्वस्थता के कारण लालू प्रसाद यादव ने संगठन की कमान संभालने के लिए कार्यकारी अध्यक्ष की व्यवस्था की है, जिससे नेतृत्व में निरंतरता बनी रहे।
तेजस्वी यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के साथ ही अध्यक्ष पद से जुड़ी सभी प्रशासनिक और राजनीतिक शक्तियां सौंप दी गई हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार यह केवल प्रतीकात्मक बदलाव नहीं है, बल्कि यह संगठन को सक्रिय और निर्णायक नेतृत्व देने की रणनीति का हिस्सा है। बैठक में मौजूद नेताओं ने यह राय रखी कि तेजस्वी यादव ने पिछले वर्षों में विपक्ष के नेता के रूप में जिस तरह सरकार को घेरा और जनमुद्दों पर मुखर भूमिका निभाई, उसने उन्हें स्वाभाविक नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित किया है।
एक वरिष्ठ राजद नेता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पार्टी के भीतर लंबे समय से यह भावना थी कि अब नई पीढ़ी को औपचारिक जिम्मेदारी मिलनी चाहिए। नेताओं का मानना था कि तेजस्वी यादव न केवल बिहार की राजनीति का भविष्य हैं, बल्कि राजद की वैचारिक धारा को आगे बढ़ाने की क्षमता भी रखते हैं। इसी भावना के तहत सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया। बैठक के अंत में लालू प्रसाद यादव ने तेजस्वी यादव को जिम्मेदारी का प्रमाण पत्र सौंपते हुए संगठन को एकजुट रखने और सामाजिक न्याय की राजनीति को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।


