गुड न्यूज: तीन दशक का इंतजार खत्म करने की तैयारी, चीनी निगम कर्मियों के बकाया वेतन भुगतान को बिहार सरकार ने दी रफ्तार
बिहार के चीनी निगम कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर। 4180 कर्मियों के बकाया वेतन और भत्तों के भुगतान के लिए सरकार ने नई योजना बनाई। जानिए पूरा मामला।

स्टेट ब्यूरो, पटना. बिहार के चीनी निगम कर्मचारियों के लिए यह खबर लंबे संघर्ष के बाद आई बड़ी राहत की तरह है। वर्षों से बकाया वेतन और भत्तों की समस्या झेल रहे हजारों कर्मियों के मामले में राज्य सरकार ने अब ठोस पहल का संकेत दिया है। नीतीश सरकार के गठन के बाद एक बार फिर यह मुद्दा शासन के एजेंडे में ऊपर आया है और गन्ना उद्योग विभाग ने शेष बचे कर्मचारियों के भुगतान के लिए अलग कार्ययोजना तैयार कर ली है।
दरअसल, बिहार राज्य चीनी निगम में कभी 15481 कर्मचारी कार्यरत थे। 1990 के दशक में एक के बाद एक सभी चीनी मिलें बंद हो गईं। मिलों के बंद होते ही कर्मचारियों का वेतन भुगतान भी रुक गया और धीरे-धीरे बकाया राशि एक बड़े संकट में बदल गई। हालात इतने गंभीर हुए कि कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा और मामला अदालत तक पहुंचा, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।
नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद पहली बार इस ऐतिहासिक बकाये को चुकाने का निर्णय लिया गया। सरकार ने कुल 294.73 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की, जिसमें से पांच करोड़ रुपये भविष्य निधि के लिए निर्धारित किए गए। इसके बाद 11301 कर्मचारियों को 226.48 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। हालांकि, 4180 कर्मचारी ऐसे रह गए, जिन्हें अब तक न तो वेतन मिला और न ही अन्य भत्तों का लाभ।
अब सरकार इन्हीं शेष 4180 कर्मचारियों पर फोकस कर रही है। गन्ना उद्योग विभाग ने योजना बनाई है कि छूटे हुए कर्मियों या उनके आश्रितों की पहचान दोबारा की जाएगी। इसके लिए सार्वजनिक विज्ञापन प्रकाशित करने पर भी विचार हो रहा है, ताकि कोई भी पात्र कर्मचारी या परिवार भुगतान से वंचित न रह जाए। विभाग का मानना है कि इतने वर्षों में कई कर्मचारी या तो सेवानिवृत्त हो चुके हैं या उनका निधन हो चुका है, ऐसे में सही लाभार्थियों तक पहुंचना जरूरी है।
इस पूरे मामले को लेकर मजदूर संगठनों की नाराजगी भी सामने आई है। हिंद मजदूर सभा के अध्यक्ष अघ्नु यादव ने विभाग पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकार के पास पहले से ही कर्मचारियों का पूरा रिकॉर्ड मौजूद है। इसी आधार पर राशि का आकलन हुआ और कैबिनेट से स्वीकृति भी मिली। इसके बावजूद भुगतान में देरी कर्मचारियों के साथ अन्याय है। उनका कहना है कि विभागीय लापरवाही के कारण कई कर्मियों को पेंशन तक नहीं मिल पा रही है।
वहीं, ईंखायुक्त अनिल झा ने स्पष्ट किया है कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। उनका कहना है कि उद्देश्य यही है कि सभी पात्र कर्मचारियों या उनके परिजनों को उनका हक मिले। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं और भुगतान प्रक्रिया को जल्द अंतिम रूप देने पर विचार चल रहा है।


