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राबड़ी आवास से विदाई के संकेत, 25 जनवरी की बैठक से पहले RJD में नेतृत्व और संगठन को लेकर बड़ी सियासी हलचल

राबड़ी आवास खाली होने और 25 जनवरी की अहम बैठक से पहले RJD में बड़े संगठनात्मक और नेतृत्व बदलाव के संकेत, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सक्रियता से बढ़ी सियासी हलचल।

राबड़ी आवास से विदाई के संकेत, 25 जनवरी की बैठक से पहले RJD में नेतृत्व और संगठन को लेकर बड़ी सियासी हलचल
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स्टेट ब्यूरो, पटना. बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल एक बार फिर बदलाव के दौर में खड़ा नजर आ रहा है। राबड़ी आवास को खाली करने की प्रक्रिया और 25 जनवरी को होने वाली अहम बैठक के बीच पार्टी के भीतर चल रही गतिविधियों ने सियासी गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया है। बुधवार सुबह लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का एक साथ 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी आवास से निकलना केवल निजी कार्यक्रम नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राजद की आने वाली रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी महुआबाग और कोटिल्य नगर में बन रहे अपने नए निजी आवास का निरीक्षण करने पहुंचे थे। यह पहला मौका रहा जब राबड़ी देवी स्वयं सार्वजनिक रूप से इस निरीक्षण में शामिल हुईं। लंबे समय से राबड़ी आवास खाली किए जाने की चर्चा चल रही थी और लालू प्रसाद यादव निर्माण कार्य की निगरानी करते भी दिखते रहे हैं, लेकिन राबड़ी देवी की सक्रिय मौजूदगी ने इस दौरे को राजनीतिक नजरिए से और अहम बना दिया है।

बिहार की राजनीति में राबड़ी देवी की सक्रियता को हमेशा संकेतों से जोड़कर देखा गया है। ऐसे में उनका बाहर निकलकर नए आवास का निरीक्षण करना राजद के भीतर चल रहे बदलावों की ओर इशारा माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों का मानना है कि यह केवल आवास परिवर्तन नहीं, बल्कि संगठनात्मक और नेतृत्व स्तर पर संभावित फैसलों की भूमिका भी हो सकती है।

राजद के अंदरखाने में लंबे समय से संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की बात हो रही है। विपक्षी दल भाजपा और जदयू पहले ही अपने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव कर चुके हैं, जिससे राजद पर भी दबाव बढ़ा है कि वह नए सियासी समीकरणों के साथ आगे बढ़े। लालू और राबड़ी की बढ़ती सक्रियता को इसी रणनीतिक तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।

इसी पृष्ठभूमि में 25 जनवरी को पटना के होटल मौर्य में प्रस्तावित राजद की अहम बैठक को बेहद निर्णायक माना जा रहा है। इस बैठक में पार्टी की भविष्य की रणनीति, संगठन विस्तार और नेतृत्व संरचना पर गहन चर्चा संभव है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक से राजद में बड़े संगठनात्मक बदलावों की घोषणा हो सकती है, जिससे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी को नई दिशा देने की कोशिश की जाएगी।

सूत्रों के अनुसार, राजद भी भाजपा और जदयू की तरह नए नेतृत्व मॉडल पर विचार कर सकती है। कार्यकारी अध्यक्ष जैसे पद की शुरुआत और संगठन में जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण संभावनाओं के केंद्र में है। ऐसे में राबड़ी आवास खाली करने की प्रक्रिया और लालू-राबड़ी की संयुक्त सक्रियता को महज संयोग नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक बदलावों की भूमिका के रूप में देखा जा रहा है।


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