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किसी पर पिस्तौल तानने मात्र से जान से मारने का इरादा साबित नहीं होता: दिल्ली की अदालत

हालांकि, अदालत ने अवैध रूप से पिस्तौल और कारतूस रखने के लिए इस व्यक्ति को शस्त्र अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया।

किसी पर पिस्तौल तानने मात्र से जान से मारने का इरादा साबित नहीं होता: दिल्ली की अदालत
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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क। दिल्ली की एक अदालत ने 2020 में एक पुलिसकर्मी की हत्या के प्रयास के आरोपी को बरी करते हुए कहा कि किसी पर केवल पिस्तौल तानने को हत्या करने के निश्चित इरादे का संकेत नहीं माना जा सकता। हालांकि, अदालत ने अवैध रूप से पिस्तौल और कारतूस रखने के लिए इस व्यक्ति को शस्त्र अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया।

छापेमारी के दौरान हेड कांस्टेबल पर तानी थी पिस्तौल

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ, सागर उर्फ रिंकू के खिलाफ एक मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिस पर 2020 में पुलिस छापेमारी के दौरान हेड कांस्टेबल राजेश कुमार की ओर पिस्तौल तानने का आरोप था। अदालत ने 23 जनवरी के अपने फैसले में कहा, "बिना किसी अन्य तथ्य के, केवल (हेड कांस्टेबल) राजेश की ओर पिस्तौल तानने के कृत्य को अपने आप में जान से मारने के निश्चित इरादे का सूचक नहीं माना जा सकता। न ही इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि यदि अन्य पुलिस अधिकारी हस्तक्षेप नहीं करते, तो पूरी संभावना थी कि आरोपी पिस्तौल का ट्रिगर दबा ही देता।"

आरोपी के घर पर पुलिस ने मारा था छापा

अभियोजन पक्ष के अनुसार, सागर ने कथित तौर पर अपनी पिस्तौल तब निकाली जब पुलिस ने 14 जुलाई, 2020 को भारतीय विद्या पीठ के आसपास किसी अपराध को अंजाम देने के इरादे से उसकी उपस्थिति की सूचना मिलने के बाद उसके घर पर छापा मारा था। अदालत ने कहा कि यह भी संभव है कि आरोपी का इरादा पुलिसकर्मी को गोली मारने या जान से मारने का न होकर केवल उसे डराने का हो। न्यायाधीश ने कहा कि उपरोक्त तथ्यों के आलोक में, भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत उसे दोषी ठहराया जा सकता है।


Mukesh Pandit

Mukesh Pandit

पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 1989 में अमर उजाला से रिपोर्टिंग से करने वाले मुकेश पंडित का जनसरोकार और वास्तविकत पत्रकारिता का सफर सतत जारी है। उन्होंने अमर उजाला, विश्व मानव, हरिभूमि, एनबीटी एवं दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक अपनी सेवाएं दीं हैं। समाचार लेखन, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में निपुणता के साथ-साथ उन्होंने समय के साथ डिजिटल और सोशल मीडिया को भी बख़ूबी अपनाया है। करीब 35 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ मुकेश पंडित आज भी पत्रकारिता में सक्रिय हैं और जनहित, राष्ट्रहित और समाज की सच्ची आवाज़ बनने के मिशन पर अग्रसर हैं।

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