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दिल्ली दंगा: पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत तीन लोग दंगों में शामिल थे, इनके खिलाफ पुख्ता सबूत

ये दलीलें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी के समक्ष पेश की गईं, जो तीनों आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे।

दिल्ली दंगा: पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत तीन लोग दंगों में शामिल थे, इनके खिलाफ पुख्ता सबूत
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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क। दिल्ली पुलिस ने एक अदालत को बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में फरवरी 2020 में हुए दंगों की बड़ी साजिश रचने से जुड़े मामले में आरोपी सलीम मलिक, अथर खान और पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन के खिलाफ लगाए गए प्रथम दृष्टया आरोपों को सही मानने के लिए पर्याप्त आधार हैं। ये दलीलें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी के समक्ष पेश की गईं, जो तीनों आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे।

तीनों ने कोर्ट में जमानत की याचिकाएं दी हैं

सुप्रीम कोर्ट की ओर से इसी मामले में पांच अन्य आरोपियों को जमानत दिए जाने के बाद तीनों आरोपियों ने जमानत याचिकाएं दायर की थीं, जिसमें उन्होंने दलील दी है कि उन पर समान आरोप हैं। जिरह के दौरान विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) ने तीनों आरोपियों की जमानत का विरोध करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपों से पता चलता है कि वे इस मामले में मुख्य साजिशकर्ताओं के साथ शामिल थे।

ताहिर हुसैन पर यूएपीएम के तहत मामला दर्ज

उन्होंने अदालत से कहा, “सलीम मलिक और अथर खान की जमानत याचिकाएं अन्य अदालतों और उच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दी गई थीं। सलीम ने उच्चतम न्यायालय में दायर अपनी जमानत याचिका भी वापस ले ली थी, जबकि हुसैन ने निचली अदालत से अपनी जमानत याचिका वापस ले ली थी। अथर खान, सलीम मलिक और ताहिर हुसैन पर 2020 के दंगों में कथित संलिप्तता के आरोप में कड़े गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया है। एसपीपी ने दलील दी कि तीनों आरोपियों के खिलाफ अपराध यूएपीए की धारा 43डी (5) के अंतर्गत आता है, क्योंकि यह मानने के लिए उचित आधार थे कि उनके खिलाफ आरोप प्रथम दृष्टया सही था।

मुख्य साजिशकर्ताओं के साथ संलिप्त थे

उन्होंने कहा,प्रथम दृष्टया आरोपों से पता चलता है कि वे इस मामले के मुख्य साजिशकर्ताओं के साथ संलिप्त थे। याचिका की प्रकृति एक प्रकार की पुनर्विचार याचिका है। यह अदालत में स्वीकार्य नहीं है।” अदालत द्वारा तीनों आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर आदेश बृहस्पतिवार को पारित किए जाने की संभावना है। भाषा यासिर पारुलपारुल


Mukesh Pandit

Mukesh Pandit

पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 1989 में अमर उजाला से रिपोर्टिंग से करने वाले मुकेश पंडित का जनसरोकार और वास्तविकत पत्रकारिता का सफर सतत जारी है। उन्होंने अमर उजाला, विश्व मानव, हरिभूमि, एनबीटी एवं दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक अपनी सेवाएं दीं हैं। समाचार लेखन, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में निपुणता के साथ-साथ उन्होंने समय के साथ डिजिटल और सोशल मीडिया को भी बख़ूबी अपनाया है। करीब 35 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ मुकेश पंडित आज भी पत्रकारिता में सक्रिय हैं और जनहित, राष्ट्रहित और समाज की सच्ची आवाज़ बनने के मिशन पर अग्रसर हैं।

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