ट्रांस-यमुना क्षेत्र के लिए 728 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को मिली हरी झंडी, क्या बदलेगी सूरत
ट्रांस-यमुना क्षेत्र के विकास के लिए बजट की कोई कमी नहीं होगी और बोर्ड के सदस्यों को वास्तविक जरूरतों के आधार पर परियोजनाओं को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।

नई दिल्ली, आईएएनएस। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को ट्रांस-यमुना क्षेत्र विकास बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें 728 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। उन्होंने कहा कि इस मंजूरी का उद्देश्य ट्रांस-यमुना क्षेत्र में विकास की गति को काफी तेज करना है, जहां दिल्ली की लगभग एक तिहाई आबादी रहती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रांस-यमुना क्षेत्र के विकास के लिए बजट की कोई कमी नहीं होगी और बोर्ड के सदस्यों को वास्तविक जरूरतों के आधार पर परियोजनाओं को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।
ट्रांस-यमुना क्षेत्र का विकास सर्वोच्च प्राथमिकता
दिल्ली सचिवालय में हुई इस बैठक में राज्य मंत्री कपिल मिश्रा, ट्रांस-यमुना क्षेत्र विकास बोर्ड के अध्यक्ष और भाजपा विधायक अरविंदर सिंह लवली के साथ-साथ बोर्ड के अन्य विशिष्ट सदस्य भी उपस्थित थे। बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा कि ट्रांस-यमुना क्षेत्र का विकास दिल्ली सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। दिल्ली सरकार का उद्देश्य ट्रांस-यमुना क्षेत्र को इस हद तक विकसित करना है कि लोग स्वेच्छा से यहां आकर बसना चाहें।
नागरिकों का बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी
उन्होंने विकास कार्यों में संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया और कहा कि सौंदर्यीकरण के साथ-साथ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, जैसे सड़कें, जल निकासी व्यवस्था, जलभराव की रोकथाम और सुरक्षित आवागमन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने चिंता व्यक्त की कि पिछली आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल में बोर्ड पूरी तरह निष्क्रिय हो गया था, जिसके परिणामस्वरूप ट्रांस-यमुना क्षेत्र में विकास लगभग ठप हो गया था और निवासियों को भारी असुविधा हुई थी।
बोर्ड द्वारा अनुशंसित सभी कार्य पूरे किए जाएंगे
उन्होंने आश्वासन दिया कि बोर्ड द्वारा अनुशंसित सभी कार्य पूरे किए जाएंगे और किसी भी वित्तीय बाधा को उन्हें रोकने नहीं दिया जाएगा। एक अन्य घटनाक्रम में, मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार कानून से संघर्ष कर रहे बच्चों के सुधार और पुनर्वास के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस एक आधुनिक एकीकृत परिसर का निर्माण करेगी। यह परिसर अलीपुर में लगभग आठ एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा। इस परिसर में लगभग 700 बच्चों को रखने की क्षमता होगी और इसमें किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के तहत किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष सुनवाई की प्रतीक्षा कर रहे बच्चों के साथ-साथ अपराधों के दोषी पाए गए बच्चों को भी रखा जाएगा।


