20 साल पुराने मानहानि केस में LG वीके सक्सेना बरी, मेधा पाटकर को झटका
साकेत कोर्ट ने 20 साल पुराने मानहानि मामले में दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना को बरी कर दिया। यह केस सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने 2000 में दायर किया था।

नई दिल्ली, वाईबीएन न्यूज। साकेत कोर्ट ने 20 साल पुराने मानहानि मामले में दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) वीके सक्सेना को बरी कर दिया है। यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर के ओर से वर्ष 2000 में दायर किया गया था। उस समय वीके सक्सेना नेशनल काउंसिल फॉर सिविल लिबर्टीज (NCCL) के अध्यक्ष थे। मामला NCCL द्वारा वर्ष 2000 में प्रकाशित एक विज्ञापन से जुड़ा था, जिसे मेधा पाटकर ने झूठा और मानहानि करने वाला बताया था। इस विज्ञापन में नर्मदा बचाओ आंदोलन (NBA) से जुड़े कुछ दस्तावेज प्रकाशित किए गए थे।
आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो सकेः कोर्ट
एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) राघव शर्मा ने कहा कि आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो सके हैं। कोर्ट ने माना कि विज्ञापन प्रथम दृष्टया मामला मानहानि करने वाला नहीं है। कोर्ट माना कि वह प्रकाशन जनहित में किया गया था।
कोर्ट ने कहा- आप बरी किए जाते हैं
कोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए वीके सक्सेना से कहा, “आप बरी किए जाते हैं।” यहां यह भी उल्लेखनीय है कि हाल ही में इसी मामले से जुड़े एक अन्य मानहानि केस में मेधा पाटकर को भी अदालत से राहत मिल चुकी है।


