बेटे की चाह में 11वीं बार मां बनी Haryana की सुनीता
10 बेटियों के बाद बेटे के जन्म से हरियाणा के ढाणी भोजराज गांव में खुशियों का माहौल, 11वीं संतान में बेटे की मुराद पूरी हुई, परिवार और गांव में उत्सव

नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क: भारत में बढ़ती जनसंख्या और महंगाई के दौर में जहां ज्यादातर परिवार “हम दो, हमारे दो” के सिद्धांत को अपनाकर सीमित संतान पर जोर दे रहे हैं, वहीं हरियाणा की सुनीता ने बेटे की चाह में 11वीं बार मां बनकर सबको हैरान कर दिया। 19 साल के लंबे इंतजार और 10 बेटियों के बाद सुनीता ने 11वीं संतान के रूप में बेटे को जन्म दिया है।
10 बेटियों के बाद दिया बेटे को जन्म
हरियाणा के फतेहाबाद जिले के भूना ब्लॉक स्थित ढाणी भोजराज गांव में इन दिनों एक अनोखी खुशी की कहानी हर जुबान पर है । सुनीता और उनके पति संजय की शादी को 19 साल हो चुके हैं। शादी के शुरुआती दिनों से ही दोनों को बेटे की चाह थी, लेकिन समय के साथ उनके आंगन में एक-एक कर 10 बेटियों ने जन्म लिया। समाज के तानों और दबाव के बावजूद दंपती ने कभी बेटियों को बोझ नहीं समझा और सभी बेटियों को समान प्यार और सम्मान दिया। संजय बताते हैं कि उनकी सबसे बड़ी बेटी 18 साल की है और 12वीं कक्षा में पढ़ रही है, जबकि बाकी बेटियां भी शिक्षा हासिल कर रही हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद परिवार ने बेटियों की पढ़ाई और परवरिश में कोई कमी नहीं आने दी। गांव के लोगों के अनुसार, सीमित संसाधनों में रहते हुए भी इस परिवार ने बेटियों को अच्छे संस्कार और आत्मसम्मान दिया है।
संजय की जिंदगी भी संघर्षों से भरी रही
हाल ही में सुनीता ने 11वीं संतान को जन्म दिया। खास बात यह रही कि यह डिलीवरी पूरी तरह सामान्य रही। बेहतर इलाज के लिए संजय अपनी पत्नी को घर से करीब 50 किलोमीटर दूर एक निजी अस्पताल में ले गए थे। जन्म के समय नवजात में खून की कमी पाई गई, जिसके बाद डॉक्टरों ने समय रहते खून चढ़ाया। इलाज के बाद बच्चे की हालत में सुधार हुआ और फिलहाल मां और बेटा दोनों स्वस्थ हैं। बेटे के जन्म के बाद परिवार में जश्न का माहौल है। घर में मिठाइयां बांटी जा रही हैं और रिश्तेदार बधाई देने पहुंच रहे हैं। सुनीता की सास माया देवी पोते के जन्म से बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि भगवान ने वर्षों की मन्नत पूरी कर दी। संजय की जिंदगी भी संघर्षों से भरी रही है। वह पहले लोक निर्माण विभाग में डेली वेज पर काम करते थे, लेकिन 2018 में नौकरी छूट गई। इसके बाद उन्होंने मनरेगा के तहत मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण किया। फिलहाल वह बेरोजगार हैं, लेकिन इसके बावजूद बच्चों के भविष्य को लेकर उनकी उम्मीदें कायम हैं।
एक बेटी को रिश्तेदार ने लिया गोद
संजय बताते हैं कि उनकी एक बेटी को रिश्तेदारी में गोद दिया गया है, जबकि बाकी नौ बेटियों की जिम्मेदारी वह और उनकी पत्नी खुद निभा रहे हैं। उनका मानना है कि बेटियां किसी से कम नहीं होतीं और वे पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनेंगी तो वही परिवार की सबसे बड़ी ताकत होंगी। 19 साल बाद बेटे की चाह पूरी होने की यह कहानी पूरे ढाणी भोजराज और आसपास के इलाकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। गांव की सरपंच ज्योति देवी ने इस परिवार को सम्मानित करने का निर्णय लिया है। हालांकि संजय और सुनीता का कहना है कि बेटे के जन्म से खुशी जरूर मिली है, लेकिन उनके लिए बेटियां भी उतनी ही अहम हैं।


