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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विदेश यात्रा निवेश लाने की नहीं, बल्कि पर्यटन यात्रा बनकर रह गई - प्रतुल शाह देव

दावोस में अन्य राज्यों को मिले हजारों करोड़ के निवेश, झारखंड को नहीं मिला कोई नया बड़ा करार—भाजपा ने सरकार पर उठाए सवाल

Manish Jha
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विदेश यात्रा निवेश लाने की नहीं, बल्कि पर्यटन यात्रा बनकर रह गई - प्रतुल शाह देव
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रांची वाईबीएन डेस्क : भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने झारखंड सरकार पर निवेश को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि निवेश आकर्षित करने के मामले में झारखंड देश के अंतिम पायदान पर खड़ा है और दावोस जैसे वैश्विक मंच से भी राज्य खाली हाथ लौटा है।

दावोस में अन्य राज्यों को हजारों करोड़, झारखंड को शून्य

प्रतुल शाह देव ने कहा कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की दावोस बैठक में भारत के पांच मुख्यमंत्री अपने-अपने राज्यों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। जहां महाराष्ट्र सरकार ने लगभग ₹14 से 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौतों (MoUs) किए, वहीं तेलंगाना सरकार ने ₹29,000 करोड़ रुपये के ठोस निवेश करार हासिल किए। इन निवेशों में डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे अहम सेक्टर शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों को भी हजारों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले, लेकिन झारखंड के हिस्से में एक भी नया बड़ा निवेश समझौता नहीं आया।

पुराने निवेश को नई पैकेजिंग में पेश कर रही सरकार : भाजपा

भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि दावोस में टाटा स्टील के साथ जिस पर्यावरण-अनुकूल ग्रीन समझौते को झारखंड सरकार उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है, वह कोई नया निवेश नहीं है। यह पहले से स्वीकृत और घोषित परियोजनाओं की री-पैकेजिंग मात्र है।

उन्होंने बताया कि जमशेदपुर प्लांट का आधुनिकीकरण, खनन लीज, कैप्टिव माइंस और विस्तार योजनाएं पहले ही स्वीकृत थीं। दावोस में न तो किसी नई यूनिट की घोषणा हुई, न नई स्टील क्षमता की, और न ही किसी नई लोकेशन की जानकारी दी गई।

न निवेश, न रोजगार का रोडमैप, सिर्फ फोटो-ऑप : प्रतुल शाह देव

प्रतुल शाह देव ने कहा कि सबसे गंभीर बात यह है कि MoU की राशि, समय-सीमा और संभावित रोजगार के आंकड़े तक सार्वजनिक नहीं किए गए। इससे साफ होता है कि सरकार के पास दावोस में दिखाने के लिए कोई नया विज़न नहीं था, केवल पुरानी फाइलें और फोटो-ऑप थे।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को वही देश पसंद आते हैं जो पर्यटन के लिहाज़ से प्रसिद्ध हैं। स्वीडन और स्पेन के बाद वे स्विट्ज़रलैंड की बर्फीली वादियों का आनंद लेकर लौट आए, लेकिन झारखंड के लिए ठोस निवेश नहीं ला सके।

उन्होंने कहा कि झारखंड का युवा रोजगार चाहता है, उद्योग चाहता है, लेकिन मुख्यमंत्री दावोस से निवेश नहीं, सिर्फ प्रचार लेकर लौटे हैं। झारखंड को विकास चाहिए, पर्यटन आधारित राजनीति नहीं।


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