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निलंबन के बाद धरने पर बैठे अलंकार अग्निहोत्री, जानें पूरा मामला

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने UGC 2026 नियमों और ब्राह्मण विरोधी अभियान का आरोप लगाते हुए इस्तीफा देने के बाद शासन से निलंबित होने के बाद धरने पर पीसीएस अधिकारी।

निलंबन के बाद धरने पर बैठे अलंकार अग्निहोत्री, जानें पूरा मामला
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बरेली, वाईबीएन न्यूज। गणतंत्र दिवस के मौके पर बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा देकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। शासन ने उन्हें निलंबित करने के साथ ही शामली डीएम कार्यालय से अटैच कर दिया और मामले की जांच का जिम्मा मंडलायुक्त बरेली को सौंप दिया। इस कार्रवाई के बाद अलंकार अ‌ग्निहोत्री मंगलवार को डीएम से मिलने पहुंचे और मुलाकात न होने पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने अपने इस्तीफे में सरकारी नीतियों, विशेषकर नए UGC 2026 नियमों और उत्तर प्रदेश में कथित ब्राह्मण विरोधी माहौल को इसकी प्रमुख वजह बताया। अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि हाल के वर्षों में ब्राह्मण समुदाय को लगातार निशाना बनाया जा रहा है और प्रशासनिक तंत्र इस पर मौन साधे हुए है।

शंकराचार्य के साथ हुए व्यवहार पर भी आपत्ति

पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ हुई कथित मारपीट, जेल में एक ब्राह्मण कैदी की मौत और अन्य घटनाओं का जिक्र करते हुए गहरी चिंता जताई। इस बीच उनकी शंकराचार्य से फोन पर बात हुई। बातचीत के दौरान शंकराचार्य ने कहा कि इतनी मेहनत के बाद ‌हासिल किए पद को आपने सनातन के लिए ठुकराया है, अन्यों को भी आपकी इस पहल का अनुसरण करना चाहिए। इसके साथ ही शंकराचार्य ने उन्हें धर्म के क्षेत्र में इससे भी बड़ा पद देने का प्रस्ताव अलंकार अग्निहोत्री को दिया है। शंकराचार्य के अपमान का मामला उठाने के साथ ही पीसीएस अधिकारी ने UGC 2026 के नियमों को लेकर आशंका जताई कि इससे सामान्य वर्ग के छात्रों को प्रताड़ना का सामना करना पड़ सकता है।

डीएम आवास में बंधक बनाकर रखने का आरोप

इस्तीफे के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि उन्हें डीएम आवास में करीब 45 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया और लखनऊ से आए एक फोन कॉल पर उनके लिए अपशब्द कहे गए। हालांकि जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए उन्हें तथ्यहीन बताया।


Dhiraj Dhillon

Dhiraj Dhillon

धीरज ढिल्लों दो दशकों से अधिक समय से हिंदी पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने करियर के दौरान दैनिक हिंदुस्तान और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में नोएडा और गाजियाबाद क्षेत्र में गहन रिपोर्टिंग की है। प्रिंट मीडिया के साथ-साथ, उन्होंने डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी काम किया है। उनकी लेखनी में निष्पक्षता, तथ्यपरकता और गहरी विश्लेषण क्षमता स्पष्ट रूप से झलकती है। समसामयिक विषयों के साथ-साथ स्वास्थ्य, जीवनशैली, विकास संबंधी मुद्दों और राजनीति में उनकी गहरी रुचि रही है। उन्होंने पांच वर्षों तक Centre for Advocacy & Research (CFAR) के साथ मिलकर सार्वजनिक स्वास्थ्य संचार कार्य किया है।

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