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Shankaracharya controversy: अपमान से नाराज पीसीएस अफसर ने इस्तीफा दिया

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद के बाद बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पीसीएस अफसर अलंकार अग्निहोत्री ने ब्राह्मणों पर अत्याचार का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया।

Shankaracharya controversy: अपमान से नाराज पीसीएस अफसर ने इस्तीफा दिया
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बरेली, वाईबीएन न्यूज। मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक रंग ले लिया है। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट और पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने ब्राह्मण समाज पर अत्याचार का आरोप लगाते हुए गणतंत्र दिवस के दिन अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे की खबर से प्रशासनिक हलकों और राजनैतिक गलियारों में खलबली मच गई है।

शंकराचार्य विवाद के बारे में जानिए

बता दें कि पुलिस ने मौनी अमावस्या के मौके पर शंकराचार्य को संगम नोज की ओर से पालकी से जाते समय रोक दिया था। कारण बताया गया था कि भीड़ अधिक है और शंकराचार्य का स्नान के लिए पालकी से जाना संभव नहीं है। चाहें तो वे पैदल जा सकते हैं। इस दौरान पुलिस ने शंकराचार्य के शिष्यों से कथित तौर पर मारपीट भी की थी। उसी के बाद से शंकराचार्य प्रयागराज में धरने पर बैठे हैं लेकिन सरकार की ओर से कोई नुमाइंदा उनसे बात करने नहीं पहुंचा। प्रशासन ने उनके शंकराचार्य होने पर सवाल उठाते हुए नोटिस तक भेज दिया। मामला अब राजनैतिक होता जा रहा है। विपक्ष इस मामले में सरकार पर हमलावर है।

ब्राहमण समाज के प्रतीकों का अपमान बताया

मीडिया से बातचीत में पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि मौनी अमावस्या के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बटुक शिष्यों के साथ अभद्रता और मारपीट की गई, जो ब्राह्मण समाज के सांस्कृतिक प्रतीकों का अपमान है। उन्होंने ब्राह्मण सांसदों-विधायकों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उनसे इस्तीफे की मांग की। पीसीएस अधिकारी ने यूपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और अपना इस्तीफा ईमेल के जरिए राज्यपाल, जिलाधिकारी और संबंधित अधिकारियों को भेजने की पुष्टि की।


Dhiraj Dhillon

Dhiraj Dhillon

धीरज ढिल्लों दो दशकों से अधिक समय से हिंदी पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने करियर के दौरान दैनिक हिंदुस्तान और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में नोएडा और गाजियाबाद क्षेत्र में गहन रिपोर्टिंग की है। प्रिंट मीडिया के साथ-साथ, उन्होंने डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी काम किया है। उनकी लेखनी में निष्पक्षता, तथ्यपरकता और गहरी विश्लेषण क्षमता स्पष्ट रूप से झलकती है। समसामयिक विषयों के साथ-साथ स्वास्थ्य, जीवनशैली, विकास संबंधी मुद्दों और राजनीति में उनकी गहरी रुचि रही है। उन्होंने पांच वर्षों तक Centre for Advocacy & Research (CFAR) के साथ मिलकर सार्वजनिक स्वास्थ्य संचार कार्य किया है।

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