योगी के समर्थन में एक अफसर का इस्तीफा: क्या है पूरा सच?
क्या यूपी में अफसरों के इस्तीफे का दौर और तेज होगा! अयोध्या के GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह ने किस साजिश का पर्दाफाश किया?

नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क । उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में मचे हड़कंप के बीच अयोध्या के GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने सीएम योगी आदित्यनाथ के समर्थन में इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बयानों को 'साजिश' करार देते हुए यह इस्तीफा यूपी की राजनीति और प्रशासन में नई बहस छेड़ गया है।
#WATCH | Ayodhya, UP | On his resignation, Prashant Kumar Singh, GST Commissioner, Ayodhya, says, "In favour of the government and to oppose Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand, I have resigned. For the last 2 days, I was deeply hurt by his baseless allegations against our CM… pic.twitter.com/ajPjHErYIQ
— ANI (@ANI) January 27, 2026
सियासी गलियारों में हलचल: एक इस्तीफे के कई मायने
उत्तर प्रदेश में इन दिनों अफसरों के इस्तीफे की खबरें सिर्फ प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि एक गहरी वैचारिक जंग की ओर इशारा कर रही हैं। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे की गूंज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि अयोध्या से आई खबर ने लखनऊ तक हलचल मचा दी।
GST विभाग के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने न केवल अपना पद छोड़ा, बल्कि इसके पीछे जो तर्क दिए, वे किसी भी सरकारी सेवक के लिए विरल हैं। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का बचाव करते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
'राजकीय धर्म' बनाम 'विरोध की राजनीति'
प्रशांत सिंह ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को भेजे अपने त्यागपत्र में एक बेहद भावुक और कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने लिखा कि जिस सरकार से उनकी आजीविका चलती है, उस सरकार के मुखिया (योगी आदित्यनाथ) के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी वे बर्दाश्त नहीं कर सकते।
प्रशांत सिंह के इस्तीफे की 3 बड़ी बातें
निष्ठा का सवाल: उन्होंने इसे अपना 'राजकीय धर्म' बताया कि वे सरकार के खिलाफ होने वाली अनर्गल बयानबाजी का विरोध करें।
संविधान पर खतरा: मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के खिलाफ टिप्पणियों को उन्होंने लोकतंत्र और संविधान के विरुद्ध साजिश करार दिया।
शंकराचार्य पर आरोप: उन्होंने दावा किया कि भोले-भाले अफसरों को प्रलोभन देकर सरकार के खिलाफ खड़ा किया जा रहा है।
क्या यह केवल एक इस्तीफा है या नौकरशाही के भीतर पनप रहे किसी बड़े असंतोष और वैचारिक ध्रुवीकरण का संकेत?
शंकराचार्य और सरकार: कहां फंसा है पेंच?
यह पूरा विवाद प्रयागराज माघ मेले और उसके आसपास के घटनाक्रमों से जुड़ा है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा सरकार की नीतियों और कार्यशैली पर की गई टिप्पणियों ने राज्य के अधिकारियों को दो गुटों में बांट दिया है। जहां एक ओर बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने शंकराचार्य के सम्मान में इस्तीफा दिया, वहीं प्रशांत सिंह ने उनके विरोध में पद त्याग दिया।
प्रशांत सिंह का आरोप है कि शंकराचार्य समाज में 'जातिवाद का जहर' घोल रहे हैं और देश-प्रदेश को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं। एक सरकारी अफसर का धार्मिक गुरु पर इस तरह का सीधा हमला उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक इतिहास में दुर्लभ है।
इस्तीफों की चेन: क्या प्रशासन में 'दरार' पड़ चुकी है?
पिछले 48 घंटों में दो बड़े अधिकारियों का जाना यूपी सरकार के लिए चिंता का विषय हो सकता है।
अलंकार अग्निहोत्री (बरेली): उन्होंने 5 पन्नों का पत्र लिखकर शंकराचार्य के साथ दुर्व्यवहार को मुद्दा बनाया।
प्रशांत कुमार सिंह (अयोध्या): उन्होंने सरकार के पक्ष में खड़े होकर विरोधियों को आईना दिखाने की कोशिश की।
यह स्थिति दिखाती है कि अब विवाद केवल सड़कों या सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी फाइलों और दफ्तरों के भीतर तक पैठ बना चुका है।
क्यों खास है यह घटनाक्रम?
आमतौर पर सरकारी कर्मचारी 'सर्विस रूल्स' (Service Rules) के कारण राजनीतिक या धार्मिक विवादों से दूरी बनाए रखते हैं। लेकिन प्रशांत सिंह ने अपनी 'संवेदनशीलता' और 'राष्ट्रप्रेम' का हवाला देते हुए नियमों की एक नई व्याख्या पेश की है। उनका कहना है कि अगर लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी होगी, तो एक संवेदनशील व्यक्ति चुप नहीं रह सकता।
अयोध्या के इस अफसर के इस्तीफे ने अब गेंद सरकार और राजभवन के पाले में डाल दी है। क्या सरकार इन इस्तीफों को स्वीकार कर मामले को शांत करेगी, या फिर नौकरशाही के भीतर छिपे इस 'असंतोष' और 'अति-उत्साह' की जांच होगी?


