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UGC Regulations: वाराणसी में सुप्रीम कोर्ट फैसले पर जश्न

उत्तर प्रदेश के मंत्री केशव प्रसाद मौर्य और अन्य नेताओं ने यूजीसी के नए नियमों पर समाधान का भरोसा दिया। सुप्रीम कोर्ट के रोक के बाद वाराणसी में जश्न मनाया गया।

UGC Regulations:  वाराणसी में सुप्रीम कोर्ट फैसले पर जश्न
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लखनऊ, आईएएनएस। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य समेत उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रियों ने यूजीसी के नए नियमों को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जल्द ही इसका समाधान देखने को मिलेगा और किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचेगी। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट की ओर से यूजीसी के नए रेगुलेंशंस पर रोक लगाए जाने की खबर के बाद बनारस से जश्न की खबर आई है।

निषाद बोले- कोर्ट रोक लगाई, खारिज नहीं किया

आईएएनएस से बातचीत में मंत्री जयवीर सिंह ने यूजीसी विवाद पर कहा, "आपको जल्द ही इसका समाधान देखने को मिलेगा। एक सही समाधान दिया जाएगा और किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचेगी।" वहीं मंत्री संजय निषाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ रोक लगाई है। अदालत ने इसे खारिज नहीं किया है। शायद विचार करने के बाद अदालत अपना फैसला देगी। संजय निषाद ने आगे कहा, "केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस विषय पर खुद बयान दिया कि सरकार खुद चाहती है कि कोई निर्दोष न फंसे और कोई दोषी बचे नहीं। ऐसा होना भी चाहिए।"

बनारस में प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम फैसले का स्वागत किया

इसी बीच, वाराणसी में लोगों ने यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की तरफ से रोक लगाए जाने के बाद जश्न मनाया। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "यह फैसला हमारी ऊंची जाति के समुदाय के लिए बहुत अच्छा है। हम सभी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। वाराणसी में सभी लोगों ने हवन पूजन भी किया।" एक और प्रदर्शनकारी ने अपने बयान में कहा कि यह रोक मार्च तक लागू है और हमें उम्मीद है कि 19 मार्च के बाद इस पर स्थायी रोक लगा दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर फैसला विरोध में जाता है तो हम सभी आंदोलन के लिए उतरेंगे।


Dhiraj Dhillon

Dhiraj Dhillon

धीरज ढिल्लों दो दशकों से अधिक समय से हिंदी पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने करियर के दौरान दैनिक हिंदुस्तान और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में नोएडा और गाजियाबाद क्षेत्र में गहन रिपोर्टिंग की है। प्रिंट मीडिया के साथ-साथ, उन्होंने डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी काम किया है। उनकी लेखनी में निष्पक्षता, तथ्यपरकता और गहरी विश्लेषण क्षमता स्पष्ट रूप से झलकती है। समसामयिक विषयों के साथ-साथ स्वास्थ्य, जीवनशैली, विकास संबंधी मुद्दों और राजनीति में उनकी गहरी रुचि रही है। उन्होंने पांच वर्षों तक Centre for Advocacy & Research (CFAR) के साथ मिलकर सार्वजनिक स्वास्थ्य संचार कार्य किया है।

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