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उत्तराखंड की बड़ी छलांग: स्टार्टअप की दुनिया में बना 'लीडर'

क्या DPIIT की स्टार्टअप रैंकिंग में उत्तराखंड को मिला 'लीडर' का दर्जा। क्या वाणिज्य मंत्रालय ने नवाचार और मजबूत इकोसिस्टम के लिए यह सम्मान दिया है?

उत्तराखंड की बड़ी छलांग: स्टार्टअप की दुनिया में बना लीडर
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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को धरातल पर उतारते हुए उत्तराखंड ने स्टार्टअप रैंकिंग में 'लीडर' का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की इस रिपोर्ट ने साबित कर दिया है कि पहाड़ का पानी और जवानी अब नवाचार Innovation के जरिए देश की अर्थव्यवस्था की नई रीढ़ बन रहे हैं। पहाड़ से स्टार्टअप हब तक आखिर उत्तराखंड ने कैसे पलटी बाजी?

जब हम स्टार्टअप की बात करते हैं, तो अक्सर बेंगलुरु, पुणे या गुरुग्राम जैसे शहरों का नाम जेहन में आता है। लेकिन अब कहानी बदल चुकी है। भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय DPIIT द्वारा जारी 'States’ Startup Ecosystem Ranking' के 5वें संस्करण ने सबको चौंका दिया है। उत्तराखंड को इस रैंकिंग में ‘लीडर’ Leader का दर्जा दिया गया है। यह सिर्फ एक प्रमाण पत्र नहीं है, बल्कि उन हजारों युवाओं के सपनों की जीत है जो केदारनाथ की वादियों से लेकर तराई के मैदानों तक कुछ नया करने का जज्बा रखते हैं।

लेकिन सवाल यह है कि एक पहाड़ी राज्य ने तकनीकी और औद्योगिक रूप से संपन्न राज्यों को पीछे छोड़ते हुए यह मुकाम हासिल कैसे किया? नीति, नियत और नवाचार का संगम उत्तराखंड की इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा हाथ राज्य की उत्तराखंड स्टार्टअप नीति Startup Policy का है।

सरकार ने न केवल कागजों पर नियम बनाए, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारने के लिए प्रक्रियाओं को इतना सरल कर दिया कि एक आम युवा भी उद्यमी बनने का साहस कर सके।

सिंगल विंडो क्लीयरेंस: लालफीताशाही को खत्म कर युवाओं को सीधे सरकारी मदद से जोड़ा गया।

इन्वेस्टमेंट हब: निवेशकों को लुभाने के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया गया।

मेंटरशिप प्रोग्राम: अनुभवी विशेषज्ञों के जरिए नए स्टार्टअप्स को गाइडेंस दी गई। क्या उत्तराखंड अब 'हिमालयी सिलिकॉन वैली' बनने की राह पर है?

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का विजन और युवाओं का जोश

इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे प्रदेश के लिए गर्व का क्षण बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल रोजगार मांगना नहीं, बल्कि युवाओं को 'रोजगार प्रदाता' Job Provider बनाना है। मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य के युवाओं में नवाचार की अद्भुत क्षमता है और सरकार उन्हें हर संभव मंच प्रदान कर रही है।

"यह उपलब्धि प्रदेश के सभी उद्यमियों, स्टार्टअप्स और अधिकारियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।" - पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस पर मिला विशेष सम्मान

राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के मौके पर उत्तराखंड के उद्योग विभाग को जो Certificate of Appreciation मिला है, वह इस बात की तस्दीक करता है कि उत्तराखंड का मॉडल अब दूसरे पहाड़ी राज्यों के लिए एक बेंचमार्क बन चुका है। स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए जो 5 प्रमुख स्तंभ Pillars तय किए गए थे, उत्तराखंड उन सभी में खरा उतरा है।

उत्तराखंड स्टार्टअप रैंकिंग की मुख्य विशेषताएं

संसाधनों की पहुंच राज्य में इन्क्यूबेशन सेंटर्स की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।

महिला उद्यमिता: पहाड़ी क्षेत्रों की महिलाओं को स्टार्टअप से जोड़ने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए गए।

एग्री-टेक पर फोकस: चूंकि उत्तराखंड कृषि प्रधान है, इसलिए कृषि आधारित स्टार्टअप्स को प्राथमिकता दी गई।

टूरिज्म स्टार्टअप: होमस्टे और साहसिक पर्यटन को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने वाले युवाओं को फंडिंग मिली।

क्या आपको लगता है कि पहाड़ का यह मॉडल भारत के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बन सकता है? भविष्य की राह क्या चुनौतियां अभी बाकी हैं? लीडर का दर्जा मिलना एक शुरुआत है, मंजिल नहीं। उत्तराखंड के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस रैंकिंग को बरकरार रखने और इन स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर Global Scale पर ले जाने की है। पलायन जैसी समस्याओं का समाधान अब इन छोटे-छोटे व्यवसायों और नवाचारों में ही छिपा है।

क्या आपको लगता है कि उत्तराखंड के युवा अब नौकरी ढूंढने के बजाय स्टार्टअप शुरू करने को प्राथमिकता दे रहे हैं? आपके क्षेत्र में कौन सा नया स्टार्टअप कमाल कर रहा है? नीचे कमेंट में अपनी राय साझा करें और इस खबर को हर युवा तक शेयर करें।


Ajit Kumar Pandey

Ajit Kumar Pandey

पत्रकारिता की शुरुआत साल 1994 में हिंदुस्तान अख़बार से करने वाले अजीत कुमार पाण्डेय का मीडिया सफर तीन दशकों से भी लंबा रहा है। उन्होंने दैनिक जागरण, अमर उजाला, आज तक, ईटीवी, नवभारत टाइम्स, दैनिक हिंट और दैनिक जनवाणी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक अपनी सेवाएं दीं हैं। समाचार लेखन, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में निपुणता के साथ-साथ उन्होंने समय के साथ डिजिटल और सोशल मीडिया को भी बख़ूबी अपनाया। न्यू मीडिया की तकनीकों को नजदीक से समझते हुए उन्होंने खुद को डिजिटल पत्रकारिता की मुख्यधारा में स्थापित किया। करीब 31 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ अजीत कुमार पाण्डेय आज भी पत्रकारिता में सक्रिय हैं और जनहित, राष्ट्रहित और समाज की सच्ची आवाज़ बनने के मिशन पर अग्रसर हैं।

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