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हिमाचल रैगिंग मौत: एनसीडब्ल्यू ने महाविद्यालय की छात्रा की मौत के मामले में पुलिस से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी

आयोग ने यहां जारी एक बयान में इसे ‘घिनौना, अमानवीय और निंदनीय कृत्य, और छात्रा के जीवन, गरिमा और अधिकारों का घोर उल्लंघन’ बताया है। आयोग ने कहा कि यह घटना शिक्षण परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करती है।

हिमाचल रैगिंग मौत: एनसीडब्ल्यू ने महाविद्यालय की छात्रा की मौत के मामले में पुलिस से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी
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नई दिल्ली, वाईबीएल डेस्क। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने धर्मशाला में सरकारी महाविद्यालय की 19-वर्षीय छात्रा की मौत के मामले में स्वतः संज्ञान लिया। आयोग ने हिमाचल प्रदेश पुलिस से पांच दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। आरोप है कि महाविद्यालय के एक सहायक प्रोफेसर ने छात्रा की रैगिंग की और उसका शारीरिक उत्पीड़न करने के साथ यौन शोषण किया था। आयोग ने यहां जारी एक बयान में इसे ‘घिनौना, अमानवीय और निंदनीय कृत्य, और छात्रा के जीवन, गरिमा और अधिकारों का घोर उल्लंघन’ बताया है। उधर,19 साल की दलित छात्रा की मौत पर गुस्सा बढ़ने के बाद, हिमाचल प्रदेश सरकार ने शनिवार को यौन उत्पीड़न के आरोप में बुक किए गए एक असिस्टेंट प्रोफेसर को सस्पेंड कर दिया

शिक्षण परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियां उजागर

आयोग ने कहा कि यह घटना शिक्षण परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करती है। बयान के अनुसार, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया राहटकर ने हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर मामले में तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने और सभी आरोपियों को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया है। बयान में आगे कहा गया है कि उन्होंने निष्पक्ष और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने, पोस्टमार्टम और मेडिकल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और यौन उत्पीड़न निरोधक कानूनों और रैगिंग विरोधी नियमों के तहत सख्त कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है।

परामर्श प्रणालियों को मजबूत करने के निर्देश

इसमें यह भी कहा गया है कि दोषी शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, महाविद्यालय में रैगिंग रोधी तंत्र की समीक्षा और परिसर की सुरक्षा, जागरूकता और परामर्श प्रणालियों को मजबूत करने के निर्देश जारी किए गए हैं। हिमाचल प्रदेश सरकार ने शनिवार को धर्मशाला के सरकारी महाविद्यालय के एक सहायक प्रोफेसर को 19-वर्षीय एक दलित लड़की के कथित यौन उत्पीड़न और उसकी रैगिंग करने के मामले में निलंबित कर दिया। पीड़ित छात्रा की पिछले सप्ताह इलाज के दौरान मृत्यु हो गई थी। यह निर्णय सहायक प्रोफेसर (भूगोल) अशोक कुमार के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज होने के बाद लिया गया, जिन्हें विभागीय जांच के परिणाम आने तक तत्काल प्रभाव से निलंबित रखा जाएगा।

उनकी बेटी को तीन वरिष्ठ छात्रों ने पीटा, पिता का आरोप

छात्रा के पिता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि 18 सितंबर, 2025 को उनकी बेटी को तीन वरिष्ठ छात्रों ने पीटा, जबकि महाविद्यालय के प्रोफेसर ने उसके साथ अश्लील हरकतें कीं। लड़की का एक वीडियो सार्वजनिक हुआ, जिसमें आरोप लगाया है कि उसने सहायक प्रोफेसर के गलत व्यवहार का विरोध किया, तो उन्होंने उसका उत्पीड़न किया, उसके साथ अश्लील हरकत की, मानसिक उत्पीड़न किया और धमकी दी।

बेटी गंभीर मानसिक तनाव से पीड़ित थी

पिता ने शिकायत में आरोप लगाया है कि इन घटनाओं के बाद उनकी बेटी गंभीर मानसिक तनाव से पीड़ित हो गई, जिससे उसकी सेहत तेजी से बिगड़ने लगी और 26 दिसंबर को इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस ने बताया कि बृहस्पतिवार को भारतीय न्याय संहिता की धारा 75 (यौन उत्पीड़न), 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 3(5) (समान मंशा) और हिमाचल प्रदेश शैक्षणिक संस्थान (रैगिंग निषेध) अधिनियम 2009 की धारा तीन के तहत मामला दर्ज किया गया है और जांच जारी है।

असिस्टेंट प्रोफेसर को सस्पेंड

19 साल की दलित छात्रा की मौत पर गुस्सा बढ़ने के बाद, हिमाचल प्रदेश सरकार ने शनिवार को यौन उत्पीड़न के आरोप में बुक किए गए एक असिस्टेंट प्रोफेसर को सस्पेंड कर दिया और रैगिंग और पीड़ित के साथ जाति से जुड़े दुर्व्यवहार सहित आरोपों की जांच की घोषणा की, जबकि यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन ने भी एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाई है।कांगड़ा जिले के धर्मशाला के सरकारी कॉलेज के आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर (भूगोल) अशोक शर्मा ने आरोपों से इनकार किया है।

पुलिस ने बताया कि उनसे पूछताछ की जा रही है

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए, राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा कि यह 'शैक्षणिक परिसरों में सुरक्षा तंत्र की गंभीर विफलता' को उजागर करता है और राज्य के पुलिस महानिदेशक को सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच, पोस्टमार्टम और मेडिकल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और विभिन्न कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।


Mukesh Pandit

Mukesh Pandit

पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 1989 में अमर उजाला से रिपोर्टिंग से करने वाले मुकेश पंडित का जनसरोकार और वास्तविकत पत्रकारिता का सफर सतत जारी है। उन्होंने अमर उजाला, विश्व मानव, हरिभूमि, एनबीटी एवं दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक अपनी सेवाएं दीं हैं। समाचार लेखन, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में निपुणता के साथ-साथ उन्होंने समय के साथ डिजिटल और सोशल मीडिया को भी बख़ूबी अपनाया है। करीब 35 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ मुकेश पंडित आज भी पत्रकारिता में सक्रिय हैं और जनहित, राष्ट्रहित और समाज की सच्ची आवाज़ बनने के मिशन पर अग्रसर हैं।

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