Hormuz Strait पार करने में ईरान से सीधा संवाद काम आया, बोले जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि ईरान के साथ सीधे संवाद के कारण भारतीय जहाज होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजर पाए। हालांकि ईरान से कोई स्थाई समझौता नहीं हुआ है।

नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क। भारत के विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान के साथ सीधे संवाद के कारण भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने में मदद मिली है। विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई देशों से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खुला रखने के लिए युद्धपोत भेजने की अपील की है। फाइनेंसियल टाईम्स को दिए इंटरव्यू में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि भारत और ईरान के बीच हुई बातचीत के बाद शनिवार को भारतीय झंडे वाले दो गैस टैंकर फारस की खाड़ी में होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजर पाए।
“बातचीत के कुछ सकारात्मक नजीते मिले”
एस जयशंकर ने कहा- “मैं इस समय ईरान से बातचीत कर रहा हूं और इस संवाद के कुछ सकारात्मक नतीजे मिले हैं। यह प्रक्रिया जारी है और अगर इससे परिणाम मिलते हैं तो इसे आगे भी जारी रखा जाएगा।” हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय जहाजों के लिए ईरान के साथ कोई स्थाई समझौता नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि हर जहाज की आवाजाही को अलग मामले के रूप में देखा जा रहा है, और इसके बदले ईरान को कुछ नहीं मिला है।
External Affairs Minister S. Jaishankar has said that direct diplomatic engagement with Iran is proving to be the most effective way to ensure safe passage for Indian vessels through the Strait of Hormuz, as tensions in the Middle East continue to threaten maritime trade.… pic.twitter.com/MRQxQuc98K
— The Statesman (@TheStatesmanLtd) March 16, 2026
ईरानी नौसेना ने भी दी प्रतिक्रिया
शनिवार को भारतीय टैंकरों के सुरक्षित गुजरने की खबर के साथ ही ईरानी अधिकारियों ने ईरानी तेल ले जा रहे कई अन्य टैंकरों को भी रास्ता देने की घोषणा की। बीबीसी पर्शियन के मुताबिक- इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना के कमांडर अलीरेजा तंगसीरी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा है कि ईरानी नौसेना की कार्रवाई के कारण कई टैंकरों को सुरक्षित रास्ता मिल सका।
यूरोपीय देश भी तलाश रहे समाधान
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस और इटली समेत कई यूरोपीय देश भी ऊर्जा आपूर्ति बहाल करने के लिए तेहरान के साथ कूटनीतिक समाधान तलाश रहे हैं। जयशंकर ने कहा कि हर देश के संबंध अलग होते हैं, इसलिए भारत के मॉडल की सीधे तुलना अन्य देशों से करना मुश्किल है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपनी बातचीत और अनुभव यूरोपीय देशों के साथ साझा करने के लिए तैयार है।
वैश्विक ऊर्जा संकट की चिंता
इस बीच क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 104 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो अगस्त 2022 के बाद सबसे ज्यादा हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट में तनाव जारी रहा तो तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोत्तरी हो सकती है।
भारत पर भी पड़ सकता है असर
भारत अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आयात करता है। इसमें करीब 90 प्रतिशत हिस्सा सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों से आता है और इसका बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है।
देश में 33 करोड़ से अधिक घर एलपीजी सिलेंडर पर निर्भर हैं। हाल के दिनों में कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिली हैं और गैस आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका से कुछ रेस्तरां अस्थाई रूप से बंद करने का फैसला भी लिया गया है। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो गैस और तेल की कीमतों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

