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भारत में 2030 तक 150 अरब डॉलर होगा पैकेज्ड फूड मार्केट: रिपोर्ट

भारत का पैकेज्ड फूड और बेवरेज मार्केट 2030 तक 50% बढ़कर 150 अरब डॉलर पहुंच सकता है। क्विक कॉमर्स, तेज डिलीवरी और बदलती उपभोक्ता मांग इस ग्रोथ को बढ़ावा देती है।

भारत में 2030 तक 150 अरब डॉलर होगा पैकेज्ड फूड मार्केट: रिपोर्ट
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नई दिल्ली, आईएएनएस। भारत का पैकेज्ड फूड एंड बेवरेज मार्केट अगले चार वर्षों में 2030 तक 50 प्रतिशत बढ़कर करीब 150 अरब डॉलर का हो जाएगा, जो कि फिलहाल 100 अरब डॉलर के आसपास है। इस वृद्धि को क्विक कॉमर्स से सपोर्ट मिलेगा। यह जानकारी गुरुवार को जारी की गई रिपोर्ट में दी गई। रेडसीर की रिपोर्ट में कहा गया है कि अकेले क्विक कॉमर्स सेगमेंट की सकल व्यापार मूल्य (जीएमवी) वर्तमान में 4 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2030 तक 25 बिलियन डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है, जिसका मुख्य कारण गति, सुविधा और उच्च आवृत्ति उपभोग की बढ़ती मांग है।

रोजमर्रा की खरीदारी पर भी कब्जा कर रहा क्विक कॉमर्स

क्विक कॉमर्स अब केवल लास्ट मिनट में ऑर्डर पूरा करने वाले चैनल से कहीं अधिक विकसित हो चुका है और रोजमर्रा की खरीदारी के व्यवहार को तेजी से प्रभावित कर रहा है। 250 से अधिक शहरों में 5 करोड़ से अधिक मासिक उपयोगकर्ताओं के साथ, पैकेज्ड फूड एंड बेवरेज मार्केट में इसकी हिस्सेदारी 2030 तक लगभग 4 प्रतिशत से बढ़कर 15-20 प्रतिशत होने की उम्मीद है।

जानें क्या कहते हैं जानकार?

रेडसीर स्ट्रेटेजी कंसल्टेंट्स के पार्टनर मृगांक गुटगुटिया ने कहा, "पैकेज्ड फूड और बेवरेज मार्केट में क्विक कॉमर्स एक संरचनात्मक शक्ति के रूप में उभर रहा है," और उन्होंने आगे कहा कि यह प्रोडक्ट इनोवेशन, कैटेगरी स्ट्रेटेजी और निवेश निर्णयों को प्रभावित कर रहा है। रिपोर्ट में उपभोक्ताओं की प्राथमिकताओं में आए बदलाव पर भी प्रकाश डाला गया है, जिसमें युवा उपभोक्ता प्रोटीन उत्पादों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं, जबकि अन्य स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

रेडी-टू-कुक सेगमेंट की मांग बढ़ी

छोटे परिवारों, समय की कमी और रसोई उपकरणों के बढ़ते उपयोग के कारण रेडी-टू-कुक सेगमेंट की मांग बढ़ रही है। विश्लेषण के अनुसार, 10-15 मिनट की तेज डिलीवरी से ऑन-डिमांड खपत में भी वृद्धि हो रही है। स्वास्थ्य पर केंद्रित पेय पदार्थ, जिनमें प्रोटीन-आधारित पेय शामिल हैं, लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं, जबकि पैकेटबंद नारियल पानी की मांग भी बढ़ रही है।


Dhiraj Dhillon

Dhiraj Dhillon

धीरज ढिल्लों दो दशकों से अधिक समय से हिंदी पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने करियर के दौरान दैनिक हिंदुस्तान और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में नोएडा और गाजियाबाद क्षेत्र में गहन रिपोर्टिंग की है। प्रिंट मीडिया के साथ-साथ, उन्होंने डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी काम किया है। उनकी लेखनी में निष्पक्षता, तथ्यपरकता और गहरी विश्लेषण क्षमता स्पष्ट रूप से झलकती है। समसामयिक विषयों के साथ-साथ स्वास्थ्य, जीवनशैली, विकास संबंधी मुद्दों और राजनीति में उनकी गहरी रुचि रही है। उन्होंने पांच वर्षों तक Centre for Advocacy & Research (CFAR) के साथ मिलकर सार्वजनिक स्वास्थ्य संचार कार्य किया है।

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