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केंद्र ने चला नया दांव! महिला आरक्षण की राह से हटेगा 'परिसीमन' का रोड़ा?

ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद विधेयक को संभवतः अगले सप्ताह राज्यसभा में पेश किया जाएगा। महिला आरक्षण अधिनियम संसद द्वारा 2023 में पारित किया गया था।

केंद्र ने चला नया दांव! महिला आरक्षण की राह से हटेगा परिसीमन का रोड़ा?
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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क। देश में परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने से पहले महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने के उद्देश्य से, सरकार द्वारा संसद के मौजूदा बजट सत्र में कानून में संशोधन के लिए एक विधेयक लाये जाने की संभावना है। सूत्रों ने बताया कि संसद में संविधान संशोधन विधेयक को सुचारू रूप से पारित कराने के लिए विपक्ष से संपर्क किया गया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित विधेयक को अभी तक केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी नहीं मिली है। सूत्रों ने बताया कि ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद विधेयक को संभवतः अगले सप्ताह राज्यसभा में पेश किया जाएगा। महिला आरक्षण अधिनियम संसद द्वारा 2023 में पारित किया गया था।

परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रभावी होगा

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने का प्रावधान संविधान में संशोधन करके किया गया था, लेकिन यह परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रभावी होगा। सूत्रों ने इस बात पर जोर दिया कि परिसीमन या निर्वाचन क्षेत्र सीमा निर्धारण आयोग एक ‘‘तटस्थ’’ निकाय है, जिसे लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण करने का अधिकार दिया गया है, और इसके निर्णयों को उच्चतम न्यायालय में भी चुनौती नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि एक निष्पक्ष निकाय परिसीमन प्रक्रिया में विश्वास पैदा करेगा।

आरक्षित सीटों के ‘रोटेशन’ का सुझाव दिया था

निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र संस्था है, लेकिन इसे अखिल भारतीय परिसीमन प्रक्रिया संचालित करने का दायित्व नहीं दिया जा सकता। एक अधिकारी ने बताया, अधिकतम, यह एक या कुछ राज्यों का परिसीमन कर सकता है, जैसा कि इसने हाल ही में असम में किया है। वर्ष 1990 के दशक के मध्य में, गीता मुखर्जी समिति ने सभी निर्वाचन क्षेत्रों में समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए चुनावों में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों के ‘रोटेशन’ का सुझाव दिया था। इस सिफारिश के तहत, प्रत्येक आम चुनाव के बाद आरक्षित सीटों का ‘रोटेशन’ किया जाएगा। यह चक्रीय व्यवस्था इस प्रकार बनाई गई थी कि तीन आम चुनावों के बाद, लोकसभा और विधानसभाओं के सभी निर्वाचन क्षेत्र कम से कम एक बार महिलाओं के लिए आरक्षित हो चुका होगा। हालांकि, पारित कानून में सीटों के लिए ‘रोटेशन’ के आधार पर आरक्षण का प्रावधान नहीं है।

मुर्मू ने महिला आरक्षण विधेयक को अपनी मंजूरी दी थी

सितंबर 2023 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महिला आरक्षण विधेयक को अपनी मंजूरी दी थी। इस कानून को आधिकारिक तौर पर संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम के नाम से जाना जाता है। सूत्रों के अनुसार, यह अधिनियम अभी लागू नहीं हुआ है, लेकिन यदि सरकार चाहे और दोनों सदनों में आवश्यक समर्थन हासिल हो जाए, तो संसद द्वारा एक अन्य संविधान संशोधन विधेयक के माध्यम से इसमें संशोधन किया जा सकता है। इसके प्रावधान के अनुसार, यह अधिनियम उस तिथि से लागू होगा, जो केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निर्धारित करे। संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में लगभग सर्वसम्मति से और राज्यसभा में भी सर्वसम्मति से पारित हुआ था।

कैसे होगा आरक्षित सीटों का आरक्षण

विधेयक पारित होने के समय सरकार ने कहा था कि अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन से महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण हो जाएगा। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए कोटा 15 वर्षों तक जारी रहेगा और संसद बाद में इस अवधि को बढ़ा सकती है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए कोटे के भीतर कोटा निर्धारित होने के बावजूद, विपक्ष की मांग है कि यह लाभ अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को भी दिया जाए।


Mukesh Pandit

Mukesh Pandit

पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 1989 में अमर उजाला से रिपोर्टिंग से करने वाले मुकेश पंडित का जनसरोकार और वास्तविकत पत्रकारिता का सफर सतत जारी है। उन्होंने अमर उजाला, विश्व मानव, हरिभूमि, एनबीटी एवं दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक अपनी सेवाएं दीं हैं। समाचार लेखन, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में निपुणता के साथ-साथ उन्होंने समय के साथ डिजिटल और सोशल मीडिया को भी बख़ूबी अपनाया है। करीब 35 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ मुकेश पंडित आज भी पत्रकारिता में सक्रिय हैं और जनहित, राष्ट्रहित और समाज की सच्ची आवाज़ बनने के मिशन पर अग्रसर हैं।

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