क्या है एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट? जिसे सरकार ने किया लागू, ये ESMA से कैसे अलग?
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच केंद्र सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलिंडर की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एसेंशियल कमोडिटीज़ एक्ट लागू कर दिया है।

वाईबीएन डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच गहराते युद्ध के संकट ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की सुरक्षा को लेकर खतरे की घंटी बजा दी है। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, इस स्थिति से निपटने के लिए अब एक्शन मोड में आ गया है। इस बीच, घरेलू बाजार में गैस की उपलब्धता बनाए रखने और घबराहट में हो रही जमाखोरी को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने एसेंशियल कमोडिटीज़ एक्ट (EC Act), 1955 को प्रभावी ढंग से लागू कर दिया है। हालांकि, इस फैसले के बाद मीडिया और सोशल मीडिया के कुछ गलियारों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि सरकार ने एस्मा (ESMA) लगा दिया है। लेकिन पेट्रोलियम मंत्रालय और सरकारी एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि यह कदम एस्मा नहीं, बल्कि आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करने वाला कानून (EC Act) है।
आखिर क्या है एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट (EC Act)?
यह कानून सरकार के पास वह शक्ति है, जिसके जरिए वह खाने-पीने की चीजों, दवाओं और ईंधन जैसी बुनियादी जरूरतों की सप्लाई को नियंत्रित करती है। इसका मुख्य उद्देश्य जमाखोरी और कालाबाजारी पर लगाम कसना है। युद्ध या किसी भी बड़े संकट के समय अक्सर बिचौलिए और कुछ दुकानदार सामान को स्टॉक कर लेते हैं, ताकि जब कीमतें बढ़ें तो वे मुनाफा कमा सकें। EC Act लागू होने के बाद सरकार यह तय करती है कि कोई व्यापारी या एजेंसी अधिकतम कितना स्टॉक रख सकती है। इसके जरिए उत्पादन से लेकर वितरण तक की हर कड़ी पर सरकार की नजर रहती है। सरल शब्दों में कहें तो यह कानून सुनिश्चित करता है कि संकट के समय भी आम आदमी को रसोई गैस या राशन के लिए भटकना न पड़े और न ही उसे मनमाने दाम चुकाने पड़ें।
क्यों भ्रमित हुए लोग: EC Act और ESMA में फर्क
लोग अक्सर इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों का उद्देश्य अलग है। आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (ESMA) तब लगाया जाता है, जब कर्मचारी हड़ताल पर चले जाएं और देश की अनिवार्य सेवाएं (जैसे अस्पताल, बिजली, या परिवहन) ठप होने लगें। एस्मा सरकार को शक्ति देता है कि वह कर्मचारियों को काम पर लौटने के लिए मजबूर करे और उल्लंघन करने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई करे। मौजूदा स्थिति में सेवाओं की कोई हड़ताल नहीं है, बल्कि समस्या सप्लाई और मांग के बीच के संतुलन की है, इसलिए सरकार ने ECA का सहारा लिया है ताकि तेल और गैस की सप्लाई चेन को युद्ध के प्रभावों से बचाया जा सके।
सरकार की रणनीति : LPG उत्पादन और नेचुरल गैस का नया ऑर्डर
सरकार ने न केवल कानून लागू किया है, बल्कि रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल यूनिट्स को युद्धस्तर पर काम करने के सख्त निर्देश दिए हैं। रिलायंस, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी कंपनियों को कहा गया है कि वे LPG उत्पादन को अपने अधिकतम स्तर पर ले जाएं। इसके अलावा जो हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम्स अन्य औद्योगिक कामों में इस्तेमाल होती थीं, उन्हें अब एलपीजी पूल की ओर डायवर्ट करने को कहा गया है ताकि घरेलू सिलेंडरों की कोई कमी न रहे।
नेचुरल गैस ऑर्डर 2026 भी जारी
इसके साथ सरकार ने नेचुरल गैस (सप्लाई रेगुलेशन) ऑर्डर 2026 भी जारी कर दिया है। इस आदेश के तहत प्राकृतिक गैस (PNG) और एलएनजी (LNG) के आवंटन के लिए प्राथमिकता तय की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सबसे पहले गैस उन क्षेत्रों को दी जाएगी जिनका सीधा असर जनता पर पड़ता है। इसमें घरेलू पीएनजी सप्लाई, परिवहन के लिए सीएनजी, फर्टिलाइजर प्लांट (ताकि खेती पर असर न पड़े) और चाय उद्योग जैसे महत्वपूर्ण सेक्टर शामिल हैं। इस पूरी व्यवस्था की निगरानी गेल (GAIL) और पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) को सौंपी गई है।
पैनिक बुकिंग पर लगाम : बदल गया सिलेंडर बुकिंग का नियम
ईरान-अमेरिका युद्ध की खबरों के बीच भारत में अचानक गैस सिलेंडरों की पैनिक बुकिंग शुरू हो गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार घबराहट की वजह से मांग में अचानक 15 से 20 प्रतिशत का उछाल आया है। लोग डर के मारे एडवांस में सिलेंडर भरवाकर रखना चाहते हैं। इसी पर रोक लगाने के लिए सरकार ने बुकिंग नियमों में बदलाव किया है। अब एक सिलेंडर बुक करने के बाद ग्राहक 25 दिन से पहले दोबारा बुकिंग नहीं कर पाएंगे। पहले यह सीमा 21 दिन की थी। अधिकारियों का तर्क है कि एक औसत भारतीय परिवार साल भर में 14.2 किलोग्राम के केवल 7 से 8 सिलेंडर इस्तेमाल करता है। सामान्य परिस्थितियों में एक सिलेंडर 40 से 45 दिन (छह हफ्ते) चलता है, इसलिए 25 दिन का यह नियम आम जनता के लिए कोई समस्या पैदा नहीं करेगा, बल्कि यह उन लोगों को रोकेगा जो अनावश्यक स्टॉक जमा कर रहे हैं।
पैनिक न करें, ईंधन की कमी नहीं है
सरकार और तेल कंपनियों (HP, IOCL, BPCL) ने ग्राहकों को संदेश भेजकर आश्वस्त किया है कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार है। 10 मार्च को एचपी गैस द्वारा भेजे गए एक संदेश में स्पष्ट कहा गया कि ईंधन की कमी को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही खबरें निराधार हैं। नागरिक किसी भी भ्रम में न आएं। सरकार का यह कड़ा रुख और EC Act को लागू करना दरअसल भविष्य की उस तैयारी का हिस्सा है, जिससे पश्चिम एशिया में युद्ध लंबा खिंचने की स्थिति में भी भारत की रसोई सुरक्षित रहे। सरकार का संदेश साफ है-व्यवस्था नियंत्रण में है। बस जरूरत है कि जनता अफवाहों पर ध्यान न दे और सामान्य रूप से अपनी जरूरतें पूरी करे।


