किस पत्रकार की हत्या मामले में हाईकोर्ट से बरी हुए राम रहीम
2002 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में हाई कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम को उम्रकैद से बरी किया।

वाईबीएन डेस्क, नई दिल्ली।
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को 2002 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा से बरी कर दिया है। यह फैसला उस समय आया जब सात साल पहले उन्हें इस मामले में दोषी ठहराकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। राम रहीम के वकील जितेंद्र खुराना ने इस फैसले की जानकारी दी और कहा कि अदालत ने उनके मुवक्किल को इस मामले में किसी प्रकार का दोषी नहीं पाया।
रामचंद्र छत्रपति के परिवार और उनके वकीलों ने हाई कोर्ट के फैसले को निराशाजनक बताया है। छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने कहा कि वह इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। उन्होंने यह भी बताया कि अभी उन्हें फैसले की पूरी कॉपी नहीं मिली है, और फैसले के आधार को समझने के लिए पूरे आदेश का अध्ययन आवश्यक होगा।
क्या कहा वकील और पीड़ित परिवार ने
राम रहीम के वकील जितेंद्र खुराना ने बताया कि "माननीय उच्च न्यायालय ने यह माना कि गुरमीत राम रहीम का इस मामले से कोई संबंध नहीं है। शुरुआत से हम यही कह रहे थे और आज हाई कोर्ट ने इसे मान्य किया।" उनका कहना था कि यह निर्णय साबित करता है कि उनके मुवक्किल का इस हत्या मामले से कोई संबंध नहीं था।
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के परिवार और उनके वकील हाई कोर्ट के फैसले से निराश हैं। छत्रपति के वकील लेखराज धोत ने कहा कि सीबीआई ने लंबी और विस्तृत जांच के बाद राम रहीम को दोषी ठहराया था। उन्होंने यह भी कहा कि हाई कोर्ट ने मामले में अन्य आरोपी, जैसे शूटर्स और साज़िशकर्ता कृष्ण लाल की सजा बरकरार रखी है, जिससे यह साफ होता है कि जांच में पर्याप्त सबूत थे।
अंशुल छत्रपति ने कहा कि यह मामला 24 वर्षों से कोर्ट में लंबित था और वह हार नहीं मानेंगे। उनका मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती देकर न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है।
क्या है मामला
19 अक्टूबर, 2002 को हरियाणा के सिरसा में ‘पूरा सच’ अखबार के संपादक रामचंद्र छत्रपति को उनके घर के बाहर गोली मार दी गई थी। गोली लगने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन 21 अक्तूबर 2002 को अपोलो अस्पताल में उनकी मौत हो गई। इस घटना के विरोध में 25 अक्तूबर 2002 को सिरसा में बंद रहा। पत्रकारों और आम जनता ने कई जगह विरोध प्रदर्शन और धरना दिया।
छत्रपति परिवार ने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस मामले के मुख्य आरोपी को बचा रही है। जनवरी 2003 में अंशुल छत्रपति ने हाई कोर्ट में सीबीआई जांच की मांग की। दिसंबर 2003 में सीबीआई ने पत्रकार रामचंद्र और रणजीत सिंह की हत्या की जांच शुरू की। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2004 में डेरा की याचिका खारिज कर दी और जांच जारी रखने का आदेश दिया।
सीबीआई ने जांच के दौरान डेरा प्रमुख और अन्य आरोपियों को आरोपी बनाया। इस जांच के दौरान डेरा अनुयायियों द्वारा चंडीगढ़ में विरोध प्रदर्शन भी किया गया।
ट्रायल और सजा
25 अगस्त 2017 को पंचकुला की सीबीआई अदालत ने डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी ठहराया। 28 अगस्त 2017 को उन्हें साध्वी बलात्कार मामले में 10 साल की जेल की सजा सुनाई गई। राम रहीम फिलहाल हरियाणा की रोहतक जेल में बंद हैं।
17 जनवरी 2019 को पंचकुला स्थित सीबीआई अदालत ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस मामले में अन्य तीन अभियुक्तों को भी आजीवन कारावास की सजा मिली। सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई थी।
मुख्य गवाह खट्टा सिंह ने बताया था कि "आजीवन कारावास का अर्थ स्वाभाविक मृत्यु तक जेल में रहना है।" सीबीआई के वकील ने कहा कि साध्वी के यौन शोषण के मामलों की 20 साल की सजा पूरी होने के बाद यह आजीवन कारावास शुरू होगा।
हाई कोर्ट का यह फैसला यह दर्शाता है कि अदालत ने इस मामले में राम रहीम के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं माना। वहीं, अन्य आरोपियों की सजा बरकरार रहने से यह स्पष्ट होता है कि हत्या में शामिल कुछ लोगों को अपराधी माना गया।
पीड़ित परिवार का मानना है कि यह न्याय के दृष्टिकोण से निराशाजनक है। वकील लेखराज धोत और अंशुल छत्रपति ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में अपील करके इस फैसले को चुनौती दी जाएगी।
जानकारी इस केस में हाई कोर्ट के फैसले को विवादास्पद बता रहे हैं। क्योंकि, कई साक्ष्य और गवाह थे जो राम रहीम के अपराध से संबंधित बताए गए थे। जबकि कोर्ट ने राम रहीम को बरी कर दिया, अन्य आरोपियों की सजा बरकरार है। इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय न्याय प्रणाली में लंबी लड़ाई और पुनर्विचार की प्रक्रिया हमेशा बनी रहती है। छत्रपति परिवार ने यह भी कहा कि न्याय पाने के लिए वह अंत तक लड़ेंगे और सुप्रीम कोर्ट में मामले की पूरी ताक़त से पैरवी करेंगे।


