Top
Begin typing your search above and press return to search.

सयाना बन रहा था इनकम टैक्स अफसर, लगी 2 लाख की चपत

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेके माहेश्वरी और विजय बिश्नोई की बेंच ने कहा कि राजस्व विभाग का अपने निर्देशों का जानबूझकर पालन न करना एक गंभीर चूक को दर्शाता है।

सयाना बन रहा था इनकम टैक्स अफसर, लगी 2 लाख की चपत
X
फाइल फोटो।

नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्कः सर्वोच्च न्यायालय ने 28 अगस्त को आयकर विभाग पर अपने ही नियमों का उल्लंघन करने वाले एक करदाता पर मुकदमा चलाने के लिए 2 लाख का जुर्माना लगाया।

सुप्रीम कोर्ट ने जुर्माना लगाकर दी नसीहत

जस्टिस जेके माहेश्वरी और विजय बिश्नोई की बेंच ने कहा कि राजस्व विभाग का अपने निर्देशों का जानबूझकर पालन न करना एक गंभीर चूक को दर्शाता है। फैसले में कहा गया कि इस तरह के कृत्य को सही नहीं माना जा सकता। राजस्व विभाग ने जरूरी निर्देशों की अवहेलना की है। अपने ही निर्देशों का जानबूझकर पालन न करना एक गंभीर चूक को दर्शाता है। ये निष्पक्षता, निरंतरता और जवाबदेही के सिद्धांतों को कमजोर करता है। अदालत ने आयकर अधिकारी को करदाता को 2 लाख का खर्च अदा करने का आदेश देकर केस को रद्द कर दिया।

मद्रास हाईकोर्ट के फैसले पर थी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट मद्रास हाईकोर्ट के एक फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। हाईकोर्ट ने आयकर अधिनियम, 1961 (आयकर अधिनियम) की धारा 276सी(1) के तहत कर चोरी के प्रयास के आरोपों के तहत विजय कृष्णस्वामी के खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही को रद्द करने से इनकार किया गया था।

जानिए क्या है पूरा मामला

मामले के मुताबिक अप्रैल 2016 में करदाता के आवास पर आयकर अधिनियम की धारा 132 के तहत तलाशी ली गई, जिसमें 4.93 करोड़ मूल्य की बेहिसाबी नकदी जब्त की गई। अक्टूबर 2017 में एक कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसके बाद प्रधान आयकर निदेशक ने 2018 में करदाता के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी।

आयकर उप निदेशक (डीडीआईटी) ने अगस्त 2018 में एक शिकायत दर्ज की, जिसमें आरोप लगाया गया कि करदाता ने आकलन वर्ष (एवाई) 2017-18 के लिए जानबूझकर कर चोरी करने का प्रयास किया था।

इस बीच, करदाता ने दिसंबर 2018 में आयकर अधिनियम की धारा 245सी के तहत निपटान आयोग से संपर्क किया। उसने अतिरिक्त आय का खुलासा करते हुए कर चोरी से छूट की मांग की। नवंबर 2019 में आयोग ने पाया कि कर चोरी का जानबूझकर प्रयास नहीं किया गया था, इसलिए जुर्माने से छूट प्रदान की। हालांकि, मद्रास उच्च न्यायालय में मामले को रद्द करने की एक याचिका लंबित होने के कारण आयोग ने केस बंद करने से गुरेज किया। बाद में उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद करदाता ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की।

Supreme Court, Madras High Court, Income Tax, Tax Evasion


Related Stories
Next Story
All Rights Reserved. Copyright @2019
Powered By Hocalwire