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Hormuz संकट के बीच भारत अलर्ट, ओमान की खाड़ी में युद्धपोत तैनात

ईरान-इजरायल तनाव के बीच भारत ने ओमान की खाड़ी और अरब सागर में युद्धपोत तैनात किए। लक्ष्य- कॉमर्शियल जहाजों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना।

Hormuz संकट के बीच भारत अलर्ट, ओमान की खाड़ी में युद्धपोत तैनात
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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क। वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के संकट के बीच भारत ने बड़ा कदम उठाया है। भारतीय नौसेना ओमान की खाड़ी और अरब सागर में अतिरिक्त युद्धपोत तैनात कर रही है, ताकि भारतीय व्यापारिक जहाजों की सुनिश्चित आवाजाही सुन‌िश्चित की जा सके।

आधा दर्जन से अधिक युद्धपोत किए जा रहे तैनात

मीडिया रिपोर्ट़्स के मुताबिक ए‌हतियात के तौर पर आधा दर्जन से अधिक युद्धपोत, जिनमें लॉजिस्टिक जहाज भी शामिल हैं, तैनात किए जा रहे हैं। ये युद्धपोत होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्व में रहेंगे और सीधे विवादित क्षेत्र में प्रवेश नहीं करेंगे। इनका मुख्य उद्देश्य भारतीय जहाजों को एस्कॉर्ट देकर सुरक्षित जलक्षेत्र तक पहुंचाना है।

ईरान से टैंकरों की वापसी पर बातचीत जारी

बता दें कि हालिया घटनाक्रम के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। भारत अपनी 90 प्रतिशत एलपीजी जरूरतों के लिए मध्य- पूर्व पर निर्भर है। इस संकट से एलपीजी सप्लाई खासी प्रभावित हुई है। भारत ने हाल ही में दो एलपीजी टैंकरों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की है और अन्य जहाजों को निकालने के लिए ईरान के साथ बातचीत जारी है।

अमेरिका से कोई औपचारिक बातचीत नहीं

अमेरिका की ओर से अन्य देशों को भी इस क्षेत्र में युद्धपोत भेजने की अपील की गई थी, लेकिन भारत ने इस पर कोई सीधा रुख नहीं अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है। भारत की नीति रही है कि वह किसी भी सैन्य कार्रवाई में संयुक्त राष्ट्र क जनादेश के तहत ही भाग लेता है।

“ऑपरेशन संकल्प” के तहत की जा रही है तैनाती

यह तैनाती “ऑपरेशन संकल्प” के तहत की जा रही है, जिसकी शुरूआत 2019 में खाड़ी क्षेत्र में भारतीय समुद्री हितों के रक्षा के लिए की गई थी। वर्तमान में फारस की खाड़ी में भारत के 22 जहाज मौजूद हैं, जिनमें एलपीजी, एलएनजी और कच्चे तेल के टैंकर शामिल हैं।


Dhiraj Dhillon

Dhiraj Dhillon

धीरज ढिल्लों दो दशकों से अधिक समय से हिंदी पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने करियर के दौरान दैनिक हिंदुस्तान और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में नोएडा और गाजियाबाद क्षेत्र में गहन रिपोर्टिंग की है। प्रिंट मीडिया के साथ-साथ, उन्होंने डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी काम किया है। उनकी लेखनी में निष्पक्षता, तथ्यपरकता और गहरी विश्लेषण क्षमता स्पष्ट रूप से झलकती है। समसामयिक विषयों के साथ-साथ स्वास्थ्य, जीवनशैली, विकास संबंधी मुद्दों और राजनीति में उनकी गहरी रुचि रही है। उन्होंने पांच वर्षों तक Centre for Advocacy & Research (CFAR) के साथ मिलकर सार्वजनिक स्वास्थ्य संचार कार्य किया है।

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