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किस खतरनाक इरादे से मिजोरम में घुसे थे यूक्रेनी और अमेरिकी नागरिक? NIA को बड़े षडयंत्र का शक

आरोपी कथित तौर पर मिजोरम सीमा के रास्ते म्यांमा से भारत में घुसपैठ करने में कामयाब रहे थे, जिसके बाद उन्हें विभिन्न घरेलू हवाई अड्डों पर रोका गया।

किस खतरनाक इरादे से मिजोरम में घुसे थे यूक्रेनी और अमेरिकी नागरिक? NIA को बड़े षडयंत्र का शक
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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क। दिल्ली की एक अदालत ने छह यूक्रेनी नागरिकों और एक अमेरिकी नागरिक को 11 दिन की एनआईए हिरासत में भेज दिया, जिन पर म्यांमा स्थित जातीय सशस्त्र समूहों (ईएजी) को प्रशिक्षण देने का आरोप है। ये समूह भारत में विद्रोही समूहों का समर्थन करने के लिए जाने जाते हैं। अधिकारियों ने बताया कि आरोपी कथित तौर पर मिजोरम सीमा के रास्ते म्यांमा से भारत में घुसपैठ करने में कामयाब रहे थे, जिसके बाद उन्हें विभिन्न घरेलू हवाई अड्डों पर रोका गया। छह यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी मामले पर भारत की ओर से कहा गया क‍ि यह कानूनी विषय से जुड़ा है। भारत की सरकारी एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं। विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल नेमीडिया ब्रीफिंग में बताया कि भारत को यूक्रेन दूतावास से एक अनुरोध प्राप्‍त हुआ है। इसमें गिरफ्तार किए गए लोगों के लिए काउंसलर एक्सेस के लि‍ए कहा गया है।

बड़े षड्यंत्र का खुलासा करने के लिए मांगी रिमांड

विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने 16 मार्च को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण(एनआईए) की इस दलील पर गौर किया कि बड़े षड्यंत्र का खुलासा करने के लिए उसे आरोपियों से पूछताछ करने की आवश्यकता है। एजेंसी ने हिरासत का अनुरोध करते हुए कहा कि आरोपियों से पूछताछ, उनसे बरामद उपकरणों के डेटा का विश्लेषण, अधिक सबूत एकत्र करने, मुख्य साजिशकर्ता और वित्तपोषण के स्रोत का पता लगाने, आरोपियों के द्वारा अपनाए गए मार्ग का पता लगाने और उनके अज्ञात सहयोगियों को गिरफ्तार करने के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।

27 मार्च तक एनआईए की हिरासत में भेजा

अदालत ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और यूक्रेनी नागरिकों हुरबा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफनकीव मारियन, होनचारुक मैक्सिम और कामिंस्की विक्टर को 27 मार्च तक एनआईए की हिरासत में भेज दिया। अदालत ने हर 48 घंटे के बाद उनकी चिकित्सा जांच कराने का भी आदेश दिया। अदालत ने गौर किया कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के हितों से संबंधित हैं, और व्यापक रूप से गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धारा 18 (षड्यंत्र) के अंतर्गत आते हैं।

यूक्रेन ने की ‘पारदर्शी’ जांच की मांग की

उधर, भारतीय अधिकारियों द्वारा छह यूक्रेनी नागरिकों को हिरासत में लिए जाने के कुछ दिन बाद, यूक्रेन ने इस मामले की पारदर्शी जांच की मांग की और जांच में सहयोग करने की इच्छा प्रकट की। यूक्रेन ने कहा कि वह भारत में ‘आतंकवादी गतिविधियों का साथ देने में अपनी किसी तरह की संलिप्तता के आरोपों को सिरे से खारिज करता है।’ यूक्रेन के नागरिकों को मिजोरम में बिना अनुमति के प्रवेश करने और कथित गैरकानूनी गतिविधियों के आरोप में हिरासत में लिया गयाथा। इस मामले में एक अमेरिकी नागरिक को भी हिरासत में लिया गया।

राजनयिक पहुंच उपलब्ध कराने की मांग की

यूक्रेन के राजदूत ओलेक्सांद्र पोलिशचुक ने इस सप्ताह विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज से मुलाकात की और यूक्रेनी नागरिकों के सिलसिले में राजनयिक पहुंच उपलब्ध कराने की मांग की। यूक्रेन के दूतावास ने मीडिया की उन खबरों का कड़ा संज्ञान लिया जिनमें संकेत दिया गया था कि इस मामले में कार्रवाई की शुरुआत रूसी पक्ष द्वारा प्रदान की गई जानकारी पर ‘आधारित’ है। खबरों में कहा गया है कि यूक्रेनी नागरिकों पर म्यामां में कुछ ऐसे समूहों की मदद करने के संदेह में गैरकानूनी गतिविधियों का आरोप लगाया गया है, जो भारत विरोधी विद्रोही समूहों के साथ मिलकर काम करती हैं।

गिरफ्तारी कानूनी मामला, जांच कर रहीं एजेंस‍ियां : एमईए

छह यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी मामले पर गुरुवार को भारत की ओर से कहा गया क‍ि यह कानूनी विषय से जुड़ा है। भारत की सरकारी एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं।विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए बताया कि भारत को यूक्रेन दूतावास से एक अनुरोध प्राप्‍त हुआ है। इसमें गिरफ्तार किए गए लोगों के लिए काउंसलर एक्सेस के लि‍ए कहा गया है।यूक्रेन के बयान के बारे में पूछे जाने पर जायसवाल ने कहा, "आप सभी इस मामले के बारे में जानते हैं और हम भी इससे अवगत हैं। जैसा कि आप जानते हैं, यह एक कानूनी मामला है और संबंधित भारत सरकार की एजेंसियां वर्तमान में इसकी जांच कर रही हैं। यह भी पूछा गया था कि क्या हमें काउंसलर एक्सेस का अनुरोध प्राप्त हुआ है। हां, हमें काउंसलर एक्सेस का अनुरोध मिला है और इसे इस मामले में लागू कानूनी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए संबोधित किया जाएगा।”


Mukesh Pandit

Mukesh Pandit

पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 1989 में अमर उजाला से रिपोर्टिंग से करने वाले मुकेश पंडित का जनसरोकार और वास्तविकत पत्रकारिता का सफर सतत जारी है। उन्होंने अमर उजाला, विश्व मानव, हरिभूमि, एनबीटी एवं दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक अपनी सेवाएं दीं हैं। समाचार लेखन, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में निपुणता के साथ-साथ उन्होंने समय के साथ डिजिटल और सोशल मीडिया को भी बख़ूबी अपनाया है। करीब 35 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ मुकेश पंडित आज भी पत्रकारिता में सक्रिय हैं और जनहित, राष्ट्रहित और समाज की सच्ची आवाज़ बनने के मिशन पर अग्रसर हैं।

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